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बारीश कि बूंदें

मनीषा गुप्ता ‘मिशा’ छ्त पर पड़ती बारिश की बूंदे आज  जैसे  फिर राज को अतीत कि तरफ़ खींच रही थी। एक एक बुदं राज के दिल पर नश्तर कि तरह चुभ रही थी । बरसो जिन बुदों से पीछा  छुड़ा कर वो भाग रहा था आज वक्त  ने फिर उसको उसी जगह आने को मजबुर…

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माँ

माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में नव मास उदर में तूने पालादुःख सहकर भी मुझे संभालासौ बार न्योछावर तू हो जातीमेरी मीठी मीठी मुस्कानों मे,माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में ।।1।। मैं हंसता हूं तू हँसती हैमैं रोता हूँ तू रोती है।मेरा संसार सजाती तुमअपने…

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लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा, PM मोदी ने मांगा देशवासियों का साथ

मोदी ने कहा कि सारे राज्यों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है कि लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाना पड़ेगा। इस दौरान लोगों को अपने घरों में रहना होगा। नए क्षेत्रों में कोरोना को रोकना होगा। मोदी बोले, “20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने और हर राज्य को और…

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आया सावन

मयूर जब बोलेगा चातक मुंह खोलेगा आयेगी मस्त फुहारें चहुंओर रहेगी बहारें झींगर जब टेर लगाये दादुर वक्ता बन जाये दीखे पानी ही पानी मेघों पर आये जवानी कोयल जब राग सुनाये बादल जब नाद बजाये झरने की कल-कल छल-छल रंग बदले प्रकृति पल-पल प्रकृति का होगा ऐसा दामन तब समझो आया सावन                                   –…

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तितली

बस पीछे पीछे दौड़ा जाता पंखों को पकड़ने रंग विरंगे; कटिले वृंत-कुंजों में जाता कोशिश के पाँव रहते नंगे। पीली पंखों वाली तितली हाथों में पीले रंग भुरकती; पंख फड़फड़ा सूंड हिला उड़ भागने खूब मचलती। नीली,बैगनी,गुलाब रंग की जैसे परीलोक से थी आई; लाख कोशिश कर हारा मैं सदा रही वह भागती-पराई। कितनी भूखी…

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तुम्हारी जय जय

रचयिता डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र काशीकुंज जमुनीपुर प्रयागराज तुम्हारी जय जय तुम्हारी जय जय हे  भूमि भारत! तुम्हारी जय जय मैं पूज्य बापू की साधना हूं, आज़ाद शेखर की कल्पना हूं, सुभाष की मैं वो कामना हूं, सिंह भगत की संवेदना हूं, शुद्ध आचरण की रीतिका हूं मैं राष्ट्र देवी की दीपिका हूं। तुम्हारी जय…

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मित्रता दिवस पर सखी को समर्पित कविता

मंजू लता हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं तुम्हारीखोजती हैं आंखे तुम्हारी चंचलतातुम्हारे कोमल अधरों की मुस्कुराहट हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेखोजती हैं मेरी आंखे तुम्हारा भोलापनमेरा रूठना तुम्हारा मनानासाथ ही डेरी मिल्क गिफ्ट करना हे ! सखी फ़िर कब मिलेंगेयाद आती हैं क्लास की बातेएक दूसरे में खोकर खाली पीरियड मेंबाते…

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पीड़ा : वंदना भार्गव

सबने तुझको ठुकराई है । जब तू पास मेरे आई है ।। आजा तुझको गले लगा कर। पीड़ा आज पुरस्कृत  कर दू।। साथी पाने की चाहत में । घूम रही क्यों सबके पीछे।। तुझसे भाग रहा जग सारा ।  आ तुझमें आकर्षण भर दूं।। अरी तिरस्कत ओ दुखियारी । आजा मेरी राज दुलारी ।। तेरी…

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खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है

संसद के अंदर  जब  शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही  घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का  ध्यान नहीं जाता है। संसद  में  एक मिनट  के  बहस  में  व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी  जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…

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