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 हिंदी दिवस (डॉ चंद्रसेन भारती)

हम भारत के वासी हैं, हिंदुस्तान हमारा है। हिंदी दिवस हिंदी भाषा, यह संकल्प हमारा है। हिंदी दिवस मनाने को, हम आगे बढ़के आए हैं, मातृभूमि की रक्षा को, संकल्पित भाव सजाए है।  आर्य वृत्त भारतखंडे, आदिकाल ने नाम दिया। इंडिया की पड़ी जरूरत क्यों, क्यों  इसमें बदलाव किया। भारत मां के बनें  प्रहरी, लोकतांत्रिक…

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गजल : देवेन्द्र पाठक महरूम

पुरखों के गांव खेत बाग वन उजाड़कर फैलाओ न बदबू गड़े मुर्दे उखाड़कर अमरौती तो खाकर नहीं आये हो तुम यहां जाओगे तुम भी आखिरी कपड़ा उतारकर हम हैं तबाह अपने भी हैं तुमसे परेशां हालात रख दिया जो बेतरह बिगाड़कर कैसी हमारी जिंदगी गांवों में आज भी दो दिन हमारे साथ देखना गुजारकर चुप…

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डोनाल्ड ट्रंप बोले- भारत जैसे देश के साथ काम करना अच्छी बात, बुरी नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि भारत, रूस और चीन जैसे देशों के साथ काम करना अच्छी बात है ना कि बुरी। वह रूस के साथ संबंध सुधारने की अपनी इच्छा को लेकर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग के साथ व्हाइट हाउस…

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व्यंग्य – थप्पड़ खाकर उबरे नेता, मानुष, चून…….

    पंकज सी बी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर राजनीति में थप्पड़ खाना कभी कभी जरुरी हो जाता है। ये अलग बात है कि कभी थप्पड़ आप खुद आर्गेनाइज करवाते है और कभी कभी यह विपक्ष आर्गेनाइज करा के देता है या फिर कभी कभी देश के होनहार भगत सिंह टाइप के युवा  सधे…

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ये हितैषी बच्चियों के

                      भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी ।  मैले-कुचले  कपड़े व  अधफटे चप्पल  बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…

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….फिर यह दुनिया होगी खूबसूरत

जब ना जाति होगी ना भेदभाव होगा जब धर्म सिर्फ इंसानियत का होगा तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत। जब इंसान अपने प्रोटीन व स्वार्थ के लिए किसी बेजुबान जानवर की हत्या ना करके सही मायनों में प्रेम की परिभाषा सीखेगा। तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत।…

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युवाओं को संसदीय कार्यवाही को नियमित रूप से देखना चाहिए : ओम  बिरला

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए देश के युवाओं से नियमित आधार पर संसदीय कार्यवाही देखने का आह्वान करते हुए कहा है कि पिछले 20 से ज्यादा वर्षों से भारत की संसद और विधान सभाओं में महिलाओं, युवाओं तथा उपेक्षित समाज की हिस्सेदारी लगातार…

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छंद- गीतिका : यह समझ

मापनी- 2122 2122 2122 212 पदांत- यह समझ समांत- अहले साँस चलती है समय से तेज पहले यह समझ। चल सके तो वक्‍़त के ही संग बहले यह समझ। पंचतत्‍वों से बना अनमोल है यह तन मिला, ये बचें इनके लिए हर कष्‍ट सहले यह समझ। यह अगर हैं संतुलित तो मानले तू है सुखी,…

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क्या ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी जैसे अन्य ग्रह भी हैं ?

                 मानव समाज आदिकाल से ही अनन्त ब्रह्मांड में अपनी धरती जैसे जीवन के स्पंदन से युक्त ग्रहों की खोज के लिए सतत प्रयत्नशील रहा है,लेकिन प्राचीनकाल में अंतरिक्ष की सूदूर अंतहीन गहराइयों में झांकने के लिए उस समय न तो बेहतरीन ढंग के दूरदर्शी थे,न आज की तरह द्रुतगामी अंतरिक्ष यान थे,समय के साथ…

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गांधार की मचलती हवाएं -DR KAMINI KAMAYANI

प्रत्यंचा गांधार की मचलती हवाएं और /थिरकते इन्द्रधनुषी सपनों पर, अचानक वज्रपात करते/ हे / पितामह (भीष्म) तुझे तनिक भी हिचक न हुई । अपने जनक के अरमानों के लिए स्वयं की इच्छाओं का चिता जलाने वाला एक सामान्य अबला नारी के लिए क्यों इतना निर्मम, नि:क्षत्र हो गया ? युद्ध में जीती/पराजित /नरेश की…

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