Latest Updates

सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

Read More

आईए! राम!

आईए! राम!अयोध्या में आपका स्वागत है।वैसे, मंदिरों-महलों की आपको जरूरत नहीं;लेकिन, श्रद्धा का भाव लेकर आईए! आप ही खुद प्रकाश हो,दीपकों की आपको जरूरत क्या;मगर, ज्ञान का प्रकाश लेकर आईए! आप सर्वव्यापी हो,आप जय-जयकार नहीं चाहते;मगर, गुणों की जय-जयकार लेकर आईए! जो सबकी भूख मिटाते हैं,उनको पकवानों से क्या लेना-देना;लेकिन, आदर्श के पकवान लेकर आईए!…

Read More

जीएसटी अनुपालन व्यवस्था अभी भी सरल नहीं : सीएजी

नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के दो वर्ष बाद भी सरकार एक सरल कर अनुपालन व्यवस्था नहीं दे पाई है और गैर-दखलकारी ई-कर प्रणाली दूर की कौड़ी बना हुआ है। सीएजी ने संसद में पेश की गई एक रपट में कहा है,…

Read More

पिता (कविता-2)

दीया में तेलशक्ति भले क्षीण हो पिता सूर्य की तरह जला है; राहें अंधियारी उबड़ खाबड़ अपनों के खातिर सदा चला है!               अपनों के खातिर सदा चला है!! 🌹 तूफान के साये काले कंदर्प टूटा न उसका लोहित दर्प लहूलुहान हुआ अपनों के लिए दिल में रख बस एक तड़प!                 दिल में रख…

Read More

“मूल्यों का अपहरण”

हमारे देश में भ्रष्टाचार का ही चलन है। जो भ्रष्ट नहीं है वो पिछड़ा हुआ है। परिवार, समाज और प्रांत सभी इसकी गिरफ्त में हैं। केवल नेता या अफसर ही नहीं, सामान्य नागरिक भी भ्रष्ट आचरण को अपना चुका है। मर्यादित आचरण से सभी अनभिज्ञ हैं। दुख की बात है कि परिचित होना भी नहीं…

Read More

दिल वालों की दिल्‍ली

गीतिका छंद विधाता मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत -आना, पदान्त-तुम कभी दिल्ली रुको तो बिन इसे देखे न जाना तुम। पुरानी अब नहीं यह आज देखो फिर बताना तुम ।1। यहाँ चारों तरफ हैं वन हरित उपवन हजारों में, प्रदूषणमुक्त दिल्ली के लिए पौधा लगाना तुम।2। यहाँ उपलब्ध हैं उत्कृष्ट पथ, बस, रेल सेवाएँ,…

Read More

जलाओ री सखी मंगल दीप!

जलाओ री सखी मंगलदीप,आज घर आये हैं राजा राम।राह बुहारो ये महल सजाओ ,आयो‌ शुभ घड़ी‌ ये वर्षों बाद।फूलों का वन्दनवार लगाओ,आये हैं जग के ही तारनहार।जलाओ री सखी मंगलदीप——-।शुभ ये घड़ी शुभ गीत सुनाओ,मिलजुलकर सब नाचो गाओ।सदियों से इन्तजार था इसका,आयो शुभ दिन है वह आयो।पांव पखारो जी आरती गावो,झूमि उठे सकल संसार सखी।जलाओ…

Read More

विश्व पुस्तक मेले (10-18 फरवरी) में अनुराधा प्रकाशन के स्टाल पर अपनी पुस्तक को प्रदर्शित/विमोचन हेतु संपर्क करें

.फरवरी 2024  में होने वाले विश्व पुस्तक मेले’ का आयोजन प्रगति मैदान ,नई दिल्ली में, 10 फरवरी से 18 फरवरी 2024 तक होने जा रहा है , जिसमे अनुराधा प्रकाशन , नयी दिल्ली की भी भागीदारी निश्चित हुई है : सम्मानित लेखक जो अपनी पुस्तक को स्टाल पर डिस्पले (प्रदर्शित) करना चाहते हैं अथवा विमोचन…

Read More

है (थी) प्रीत जहां की रीत सदा

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) आप सभी को नव वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ । प्रभु आपको सुख, शांति, समृधि, वैभव प्रदान करे, ऐसी मैं प्रार्थना करता हूँ । बात अपने देश भारत की करते हैं, वर्ष 2019 में जो हुआ, वो हो चुका अब हमें 2020 में 20–20 का मैच बनाने यआमने–सामनेद्ध के बजाए 2020…

Read More

पुस्तक समीक्षा मंज़र गवाह हैं

समीक्षक : मुकेश पोपली दुनिया में अनेक तरह के मंज़र हम देखा करते हैं।  कुछ मंज़र ऐसे होते हैं जो हम कभी भी दुबारा नहीं देखना चाहते।  कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम बार-बार देखना चाहते हैं।  हमारे जीवन में बहुत बार ऐसा भी होता है कि हम विभिन्न परिस्थितियों से गुजरते हुए कुछ…

Read More