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ब्रिक्स की ‘गूंज’ वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार,लखनऊ ( उ. प्र.)नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ कैमरे के सामने आए, तो वाशिंगटन से लेकर पश्चिमी राजधानियों तक भू-राजनीतिक हलचल तेज होना लाजिमी था।…

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लालच में मुर्गी का पेट चीरना बेमानी है और बेईमानी भी

30 मई, हिन्दी पत्रकारिता दिवस के बहाने 30 मई 2024 को भारतीय हिन्दी पत्रकारिता 198 वर्षों की हो गई। दो सौ साल होने में केवल दो साल शेष हैं, यह एक लंबा समय है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में अपना अलग महत्व रखने वाला समाचार-पत्र “उदन्त मार्तण्ड” हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र, 30 मई 1826…

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(व्यंग्य) मेरी भाषा मेरा देश अभियान की अनसुनी कवर स्टोरी..!

आजकल  भाषा की जंग मची है तो सोचा मै भी बहती गंगा में हाथ धो लूं क्योंकि मेरी भाषा वैसे भी ओवैसी टाईप की है । भारत में जी 20 सम्मेलन और भारत बनाम इंडिया के बीच महासंघर्ष जारी है और इस लड़ाई में सबको एक पक्ष की तरफ से जरूर लड़ना ही होगा ।…

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अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस : गीतकार -अनिल भारद्वाज एडवोकेट

हिमालय के भाल पर सूरज सी जो दमके,वही मेरी राष्ट्रभाषा हिंदी भाषा है। सूर तुलसी ने सजाई काव्य गहनों से,है बहुत सुंदर ये अपनी और बहनों से,अजंता की मूर्ति सा जिसको तराशा है,वही मेरी मातृभाषा हिंदी भाषा है। गीत सा श्रृंगार और संगीत सा स्वर है,भाव मन के जहां बसते हिंदी वह घर है,हिंद के…

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संसदीय गरिमा पर अविश्वास

(राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस।)  राज्यसभा में सभापति के खिलाफ विपक्ष खेमे ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। भारतीय संसद के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जहां राज्यसभा में किसी सभापति के खिलाफ अविश्वास का नोटिस आया हो। दरअसल, यह मौका इसलिए सामने आया, क्योंकि सभापति के सदन में…

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हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे, का होगा मंचन

पंचानन पाठक हास्य नाटक समारोह में भव्य कल्चरल सोसाइटी पंजीकृत प्रस्तुत हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे लेखक प्रेम भारती,निदेशक संजय अमन पोपली,दिनांक 5 सितंबर,21,शाम 7 बजे अक्षरा प्रेक्षागृह, आरएमएल हॉस्पिटल के साथ,नई दिल्ली। कहानी बच्चूसिंह चौरसिया व सपना पति पत्नी हैं। इनके सामने घर में मुरालीलाल वह नीलम रहते हैं। मुरारीलाल को…

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प्यासी धरती मुरझा मधुवन

प्यासी धरती तुझे पुकारे, प्यासी नदिया तुझे पुकारे,       आ रे मेघा अब तो आ रे। बादल नीलगगन पर छाते, संग आंधियों को ले आते, तेरे राजदूत बनकर वे, झूठे आश्वासन दे जाते। सूखी पोखर तुझे पुकारे, आ रे मेघा अब तो आ रे।  कोयल सूखी अमराई में,  विरह गीत गाती रहती है,  और मोरनी…

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नमन तुम्हें मेरा शत बार नमन

हे भारत के रत्न तुम्हे मेरा शत बार  नमन मौन हो गयी चारो दिशाएँ, शान्त हो गयी सभी हवाये , उदय हुआ गहन उदासी ले सूर्य भी पर निस्तेज सा जैसे कही कुछ खो गया कोई बहुत अपना बस यही खो गया   मौन हो चले सभी सुबह के कलरव बस छाई एक निस्तब्धता एक…

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बच्चों का प्यार

इंद्रधनुषी रंगों से रंग देते हैं वो अपने प्यार को कोरे कागज पर। कितने मासूम होते हैं वो फिदा हो जाता हूं मैं इस आदत पर। क्या मैं इतना मासूम बन सकता हूं सोचता रहता हूं मैं तन्हाई में इतनी परत काम ,क्रोध,लोभ,मोह की चढ़ी है वक्त लगेगा हटाने में। काश मेरा बचपन फिर से…

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साँस हर दिल की थमी-थमी है सहमा-सहमा सा हर आदमी है

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार-उत्कर्ष मेल, कवियित्री एवं समाजसेवी) आज से तीन महीने पहले कब किसी ने सोचा था कि सरपट भागती जीवन की रफ़्तार अचानक यूँ थम जाएगी कि अगले पल साँस लेने से पहले भी सोचना पड़ेगा और साँस छोड़ने की दशा भी अकल्पनीय हो जाएगी। सच है! परिवर्तन ही संसार का शाश्वत नियम…

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