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दीवाल पर टांग लिया नया कैलेण्डर

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक अलसाई सुबह के साथ नए कैलेण्डर के नए पन्ने पर अंकित नए वर्ष के उदित होते सूरज ने आंगन में अपनी रोशनी बिखेर दी है । ‘‘यह हमारा नव वर्ष नहीं है’’ के स्लोगन के बीच भी सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की भरमार है । हर साल 31 दिसम्बर…

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वात्सल्य सामाजिक सँस्था के बच्चों संग साहित्यिक गोष्ठी का शुभारम्भ

महारानी एँक्लेव हस्तसाल उत्तम नगर में 2019 से कार्यरत वात्सल्य सामाजिक सँस्था में 26 मार्च 2021 को वात्सल्य के सौजन्य से अनुराधा प्रकाशन के बैनर तले युवा साहित्यकार चितरंजन भार्गव (जिसकी उम्र मात्र 13 वर्ष है ) की पुस्तक का लोकार्पण मनमोहन शर्मा जी के कर कमलों से किया गया। मनमोहन शर्मा ‘शरण’ ने अपने…

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।। हमारा तंत्र ।।

                                          समाज में राजतंत्र के बाद प्रजातंत्र आया। लेकिन प्रजातंत्र के साथ साथ राजतंत्र भी उसी के समानांतर चलता रहा है। लेकिन समाज को यह दिखता नहीं केवल महसूस होता है।यह राजतंत्र राजाओं से भी क्रुर व्यवस्थाओं में पनपा है ,और पनप रहा है।इस राजतंत्र को आज गुंडातंत्र, आतंकवाद,आदि नामों से कहा जाने लगा है।…

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मैयत के मेरे फूल खिल उठे

मैयत के मेरे फूल खिल उठे हैं अब थोड़ा पहले आते आधा जल चुके हैं अब तुमने कहा था कि जा रहे हो अपने रास्ते तो हम भी अपने रास्ते निकल चुके हैं अब कई लम्हे पत्थरो से बात करता रहा मगर कई पत्थर पिघल चुके हैं अब आज फिर मेरी उनसे बात हुई लगा…

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नारी (कविता-6)

विश्व की शान है नारी विश्व की …………. हर घर की पहचान है  नारी नारी है तो मान है नारी है तो सम मान है क्यों भूल जाते हो नारी ही नर की खान है नारी है हर सफलता है नारी है तो ममता है नारी से ही समता है नारी नहीं विफलता है ।…

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बाबू जी की स्मृति में.. (कविता-6)

बाबू जी की याद बहुत ही आती हैं            स्मृतियों की विपुल राशि संग लाती है… बचपन की धुंधली तश्वीरें जुड़ करके जीवन की आपा-धापी से मुड़ करके नयनों से चुपचाप उतर कर अन्तस् में लगता जैसे पास मुझे वह बुलाती है….          बाबू जी की याद बहुत ही आती है          स्मृतियों की विपुल…

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पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉक्टर सुधीर सिंह

पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं,हर हिंदुस्तानी यहां  सुखी-समृद्ध रहे।सबों के मन में रहे  भाईचारे का भाव,प्रगति-पथ पर सब  सदा अग्रसर रहे। प्रेमपूर्ण परिवेश के रंग में रंग जाने से,फाग का राग दिल गाने लग जाता है।थिरकने लगता है अधर गीत सुनकर,ढोल,मृदंग पर थाप बरसने लगता है। गुलाल की खुशबू  से  भींगा माहौल,वसंत का एहसास  कराने…

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क्या आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक होना चाहिए?

संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 क्या गारंटी देते हैं? औपचारिक और वास्तविक समानता में क्या अंतर है? क्या आरक्षण अवसर की समानता या निरंतरता के विचार में एक अतिरिक्त प्रावधान है? क्या आरक्षण के लाभ केवल ओबीसी, एससी और एसटी तक ही सीमित हैं? समतलीकरण के लिए आरक्षण ही क्यों जरूरी है? अनुच्छेद 15…

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अनारी नारी (कविता-4)

अनारी नारी अशिक्षा की पिटारी बड़ी बीमारी।। शिक्षित नारी परिवारी जेवर फूलों की क्यारी।। नारी महान देती जीवन दान करो सम्मान।। नारी जनक पीढ़ियों की पोषक छुये फ़लक।। नारी दिवस लड़े अधिकार को मारे गर्भ को।। सशक्त नारी हर क्षेत्र पे कब्जा तोड़ती भ्रम।। क्रांति जगाती भ्रांतियां झुठलाती दिये की बाती।। केवल बेटा दकियानूसी सोच…

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माटी में मिल गई माफियागिरी   

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ यह कहावत तो सदियों से लोकमानस में गूंजती आ रही है और अनेक बार इसे चरितार्थ होते हुए भी देखा है । उत्तरप्रदेश का कथित डान अब इसे चरितार्थ कर रहा है । बबूल बोओगे तो कांटे ही पाओगे सो अीतक अहमद अब कांटों का ताज पहनकर चीत्कार कर…

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