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जिसे तू क़बूल कर ले वो दुआ कहाँ से लाऊँ

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार) स्वार्थ साधते, नए युग में पदार्पण, खुद आगे बढ़ने के लिए दूसरों को नीचे गिराता मानवता का पतन, नई सदी में अपनत्व का तर्पण, क्या यही है मेरे सपनों का भारत? जब तक समूचे वतन की सम्मिलित सोच इस समस्या का सामूहिक समाधान नहीं तलाशेगी, तब तक, कोई हल नहीं निकलने…

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार हमारे देश में इस तरह सर्वव्यापी बन गया है कि बिना भ्रष्टाचार के हम कोई भी भी सरकारी काम कर सकते है | जहां कहीं भी सरकारी काम होता है | वहां भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है | हमारे देश में भ्रष्टाचार बहुत ही खतरनाक समस्या है | भ्रष्टाचार बहुत सी समस्याएं उत्पन्न करता…

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सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,

डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख  मांगकर  भूख मिटाता है। जिसकी आदत  भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में  बेनकाब…

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अन्तर्द्वन्द्व—(कहानी) : आशा सहाय

सन्नाटा है चारो तरफ।मैं चीख रही हूँ।लगता है, दूर दूर तक मेरी चीख की आवाज पहुँच गयी होगी।पर, नहीं – कहींकोई आवाज नहीं।एक गहरे सन्नाटे की ध्वनिसे भरा पड़ा है सबकुछ।सन्नाटे की एक विचित्र सी गूँज मस्तिष्क को बौखलाहट से भर रही है।और अधिक जोर से चीखने का मन हो  रहा है।पर,चीख जैसे मेरे अन्दर…

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जिन खोजा तिन पाईया ,गहरे पानी पैठ!

होम मिनिस्ट्री से उम्मीदे बढ़ गयी है । एकाएक गडकरी चचा की दस बरिश पुरानी दो पहिया प्रदूषण सर्टिफिकेट पाकर ऑक्सिजन उगलने लगी किन्तु यकीन मानिए कल तक उसमे से काला धुँआ निकलते देखा गया था । देश  में एक ग्रहनाशक यज्ञ कराने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए काहे से  कि आजकल पूरा भारत…

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‘सबसे पहले अपना हित’ …..???

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) महंगाई, बेरोजगारी पर विपक्ष पहले ही आँखे तरेरी किए है, उस पर एनआरसी का विरोध, जेएनयू विवाद ने और आग में घी का काम कर दिया. लोहड़ी, मकर संक्रांति और पोंगल के त्यौहार की चमक भी मानो फीके ही पड़ गए. दिल्ली में फरवरी में विधानसभा चुनावो की तारीख घोषित हो…

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मत बहाओ खून

मत  बहाओ  खून  मनुता का,    अये सभ्य  मानवो! रो- रोकर  है  पूछती  तुमसे   मनुजता      आज  है। तुम  थे  बहुविकसित, बुद्धि – विवेकयुक्त भलेमानस कहां  पायी  ऐसी  पशुता,    कैसा   यह  समाज   है? धांय-धांय, सांय-सांय  करते  गिर  रहे  बारूद- गोले टूट- टूटकर  के  ढह  रही  हैं    बहुमंजिली   इमारतें बन गए  वीरान   शहर  जो   कलतक   थे   आबाद नहीं…

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तितली के पंख : अरुण कुमार शर्मा

क्या, तितली के पंख को तुमने, हाथ लगा कर देखा है , जिसपर वो मंडराती है, उस फल को खाते देखा है ! क्या देखी है “अरुण” कभी, तनहाई सूरज की बोलो , क्या तुमने रवि की किरणों को, पास से जाकर देखा है! चंदा हँसता है खिलकर, और तारे मुसकाते तो हैं , मुझे…

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‘मीडिया और मुद्दे’ पुस्तक का विमोचन

माध्यमों में जन सरोकारों की प्रतिबद्धता आवश्यक- प्रो. रघुवंशमणि त्रिपाठी बस्ती । रविवार को प्रेस क्लब सभागार में अनुराधा प्रकाशन से प्रकाशित नीरज कुमार वर्मा ‘नीरप्रिय’ कृत ‘मीडिया और मुद्दे’ पुस्तक का विमोचन किया गया। शिव हर्ष किसान पी.जी. कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर रघुवंशमणि त्रिपाठी ने कहा कि माध्यमों का प्रभाव समाजों पर पड़ता…

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विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष (11 जुलाई)

लाल बिहारी लाल । सन 1987 में विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार गई तभी से सारी दुनिया में जनसंख्या रोकने के लिए जागरुकता की शुरुआत के क्रम में 1987 से हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाते आ रहे हैं।      आज सारी दुनिया की 90% आबादी इसके 10% भू भाग…

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