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….. नहीं नहीं ‘मंदी’ है भाई

गाँधी –पटेल के सपनों का भारत, फिर से सोने की चिड़िया कहलायेगा अपना भारत, 5 ट्रिलियन इकोनॉमी होगी यहां की, सभी देशवासियों को घर नसीब होगा । विदेश में जमा धन लौट आएगा भारत में । प्रत्येक नौजवान नौकरी/ रोजगार पर होगा । देश में भी काला धन बाहर आ जाएगा और देश नं 1…

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हैदराबाद के दरिंदों को सख्त से सख्त सजा मिले

डॉक्टर सुधीर सिंह हैदराबाद के दरिंदों  को सख्त से सख्त सजा मिले,‘डा.दिशा’ के परिवार को शीघ्रातिशीघ्र इंसाफ मिले.बलात्कार के गुनाहगारों को फाँसी मिले चोराहे पर,खौल रहा है खून लोगों का दोषियों की बर्बरता पर.हैवानों की हैवानियत पर शर्मसार है आज मानवता,हृदय विदारक घटनाओं  से हतप्रभ  हैं भारत माता.कितनी मजबूर ‘निर्भया’की निर्ममता से हत्या होगी?बेमहफूज बेटियों…

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असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद

लाल बिहारी लाल गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार के तत्कालिन सारण जिला (अब सीवान)के जीरादेई गांव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता महादेव सहाय हथुआ रियासत के दीवन थे। अपने पाँच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके लाडले थे।…

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रिटायरमेंट-नये जीवन की नई शुरुआत

सेवानिवृत्ति या रिटायरमेंट जीवन का एक अनमोल क्षण होता है।सर्विस के शुरू में ही रिटायरमेंट की तिथि तो तय ही होती है। पर हम पचास नहीं बल्कि पचपन वर्ष की उम्र के बाद ही थोड़े से सावधान होते हैं कि कैसे समय बिताएंगे,कैसे रहेंगे,क्या करेंगे। कुछ तो रिटायरमेंट के बाद ही सजग होते हैं।चाहे कुछ…

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जेएनयू की साख बनी रहने दो!

जेएनयू को जनतांत्रिक शिक्षण संस्कृति के लिए जाना जाता है। जेएनयू की एक पूरी सांस्कृतिक विरासत है। जिसके निर्माण के पीछे एक विचार था देश में एक ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना का जिसमें बौद्धिक खुलेपन, विकास-विवाद, सहमति-असहमति और स्वतंत्र जीवन शैली की पूरी गुंजाइश हो, जहाँ पैसे की तंगई प्रतिभाओं के आड़े न आएं।…

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महाराष्ट्र में सियासी नौटंकी का पटाक्षेप

राजनीति के द्वंद्व मे फँसी शिवसेना को मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली तब जाकर उद्धव ने राहत की सांस ली । संजय राउत ने तो शरद पवार को राजनीति का चाणक्य तक कह डाला  । वैसे बता दे कि बीते  शनिवार २३ तारीख को सुबह अचानक तब झटका लगा जब सुबह सवेरे…

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फ़िट इँडिया-हिट इँडिया

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए कबीर जी के दोहे में धैर्यशीलता का कितना खूबसूरत सँदेश छिपा है।बात केवल इतनी सी है कि किसी भी सोच विचार के बीज को बो देने भर से फ़सल के इँतज़ार में हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने भर…

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वह कौन था!

लघु कथा, 👉वह कौन था!— बात उस समय की है जब वही अपना देश आजाद हुआ था।लोगों मेंईमानदारी तो थी ही पर संसार में बेईमानों की कोई कमी नहीं होती ।एक गाँव था जिसका नामधर्मराजपुर था उसी गाँव के निवासी थे भोला पंडित ।उससमय भोला पंडित के पास खेती करने लायक जमीन तो थी ही…

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आदरणीय वशिष्ठ नारायण सिंह जी

अलविदा सर, अच्छा हुआ आपको इस‌‌ दुनिया से जल्दी ही मुक्ति मिल गयी । हां आपको सम्पूर्ण सम्मान इस दुनिया में नहींमिला इसका दुख अवश्य ही रहेगा। आपकी भी तो गलती थी राष्ट्र भक्ति के चक्कर में पड़ गये और वापस अपने वतन लौटकर आ गये। क्या मिला आपको अपने वतन में। किसी पैसे वाले…

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रावण का चेहरा

हर साल की तरह इस साल भी वह रावण का पुतला बना रहा था। विशेष रंगों का प्रयोग कर उसने उस पुतले के चेहरे को जीवंत जैसा कर दिया था। लगभग पूरा बन चुके पुतले को निहारते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कान आ गयी और उसने उस पुतले की बांह टटोलते…

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