शक्ति स्वरूप नारी
शक्ति स्वरूप नारी———————– न क्रुंदन करती ना ही चित्कार करती कभी न किसी को वो तिरस्कार करती।रूप बदलकर आती, सभी अवस्थाओ में वो तो सिर्फ हृदय से, हमें प्यार करती।शक्ति की प्रगाढ़ता, जीवन की मौलिकताआधार बनकर जीवन में वास करती।सच्चाई की मिशाल, विश्वास में विशालछल कपट भी, मुस्कुरा के टाला करती।वो काया कितनी महान, जिसमें…
