वारिष्ट साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा की कलम से (अनुभव-2)
मेरी शादी को एक साल हो गया था। उन दिनों हम लोग पहाड़गंज के कटरा राय जी में रहते थे और वहां से प्रतिदिन बस के द्वारा में संसद मार्ग अपने कार्यालय ट्रांसपोर्ट भवन जाया करती थी। एक दिन जब मैं बस में चढ़ी तो मैंने देखा बस में काफी लोग खड़े हुए हैं और…
