“समय है सतर्क रहने का “
दूर से ही करबद्ध प्रणाम करेंजिम्मेदार बनेकेवल घर परिवार के लिए ही नहींजिसको जहां आवश्यकता हैसहयोग करें समाज औरदेश के साथ खड़े होकरइंसानियत का फर्ज़ निभाए” कोरोना” नाम की महामारी कोआस पास ना और बढ़ाएडरना नहीं समझना है जरूरीघर में रहना ना बाहर जानासावधानी , स्वच्छता का हैपाठ पढ़ना और पढ़ानाहाथो को धोना , चहेरा…
युद्ध जीतने के लिए योजना बहुत जरूरी है
Doctor Sudhir Singh युद्ध जीतने के लिए योजना बहुत जरूरी है,इसके साथ जोश-जुनून ,विवेक भी चाहिए.धीरज का आकलन भी समर में ही होता है,जंग में जागरुकऔर सावधान रहना चाहिए.संकल्प के अभाव में जीतना संभव ही नहीं,सत्प्रयास संकल्प को सदा जीवंत रखता है.‘कोरोना’से महायुद्धआज कर रहा है इंसान,सामूहिक साधना से ही युद्ध जीता जाता है.‘कोरोना’ जानता…
बूढ़े नहीं,भूतपूर्व नौजवान
साठ वर्ष से ऊपर के हो गए तो क्या हुआ!अपने को बूढ़ा तो नहीं समझते न!समझना भी नहीं है। क्या कहा-लोग कहते हैं, लोगों की परवाह मत करो,लोगों का काम है कहना।अरे!रिटायर्ड ही तो हुए हो,टायर्ड तो नहीं।टायर्ड होना भी नहीं है,जो काम स्वयं कर सकते हो,वह स्वयं करना ही है।बार बार पत्नी को हर…
बाहर काल है
विपदा आई जग पर भारी, विष हर ओर है घुल रहा। तांडव फिर से मचा रही, जग में सुरसा मुख खुल रहा। कठिन समय यह जग पर भारी, जब लॉक डाउन सफल बनेगा । संकल्प के अस्त्र से ही बंधु , देश – दुनिया करोना मुक्त बनेगा । लांघो न तुम लक्ष्मणरेखा, घर अपने और…
घर पर खाली समय में क्या करें
मन को फिर बच्चा बनाये कागज़ की नाव बनाये, दूर तलक मनकी पींगें जाए सपनों के आओ महल बनाये।। बुन ले सपनों की दुनिया, मन उलझाके मन सुलझाये। खोलकर मन की अलमारी को, भावों के कपड़ों को जांचे। बदल-बदल कर उन कपडों को, खुद में खुद को पहचाने।। खाली समय में क्या करें, मन की…
वारिष्ट साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा की कलम से (अनुभव-4)
हम एक ही कार्यालय में काम करते थे । मैं प्रबंधक के रूप में कार्य कर रही थी और मेरी ड्यूटी थी 10:15 पर मुझे उपस्थिति रजिस्टर चीफ के कमरे में चपरासी के हाथों भिजवाना होता था । मेरे आगे रजिस्टर होता और मैं अपनी उस मित्र की प्रतीक्षा करती रहती एक 2 मिनट तक…
प्रकृति का रंग
Dr Rajni Yadav प्रकृति का ये रंग लाजवाब था इंसान घरो में कैद और बेजुबान आज़ाद था हवाएँ यू महकने लगी कोयले पेड़ो पर चहकने लगी नदिया इतनी साफ थी जमीन को आसमान से मिलने की आस थी जो डर अब तक मुर्गियों,मछलियों और बेजुबानो कीआंख में था उसकी झलक इंसानो में साफ़ थी यू…
कहानी : सड़क दुर्घटना
अंधेरी रात और लगभग 9 बजे का समय, मै और मेरा बॉस (राज) उनकी कार से घर लौट रहे थे। हम दोनों एक ही गाव के निवासी थे। वह मुझसे किराया तो नहीं लेता था परन्तु किराए की एवज में मुझे उसकी हां मे हां मिलनी पड़ती थी। उसकी झूठी तारीफ भी करनी पड़ती थी…
लॉक डाऊन पीरियड में मैं की महामारी से खुद को बचाया जाए
(कविता मल्होत्रा ) प्रदूषित मानसिकताओं के सँक्रमण से इस तरह सोशल डिस्टेंस बनाया जाएअपने अहम का सफ़ाया कर के “मैं” की महामारी से खुद को बचाया जाए ज़रा सोचिए –कल तक समूचे विश्व के तमाम देशों में एक दूसरे पर अपना वर्चस्व क़ायम करने की होड़ लगी हुई थी, और आज अचानक सब एक दूसरे का…
