सिक्सटी प्लस,पाओ यश
बचपन,यौवन,प्रौढ़ावस्था, बुढ़ापा ये तो प्रत्येक के जीवन की अमिट कहानी है।राजा हो या रंक,धनी हो या धनहीन,उद्योगपति हो या मज़दूर सब को हीइस चक्र से ही गुजरना हीगुजरना है।गौतम बुद्ध ने तो बूढ़े व्यक्ति को देखकर व्यथित हो वैराग्य ले कर राजपाट को ही त्याग दिया था। इन्सान अपनीजवानी के पैंतीस-चालीसवर्ष धनोपार्जन व बच्चों के पालनपोषण…
