विश्व महिला दिवस पर हार्दिक बधाई
नारी शक्ति ने अपनी योग्यता, क्षमता का लोहा सभी क्षेत्रों में मनवा रखा है, अब वह कहाँ किसी से कम है. शिक्षा, व्यापार, साहित्य, खेल, विज्ञानं, नौकरी ….. प्रत्येक क्षेत्र में नित नए आयाम लिख रही हैं . अनुराधा प्रकाशन परिवार के लिए यह गर्व का विषय है कि हमें नारी शक्ति का स्नेह, आशीर्वाद,…
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अग्रवाल वैश्य समाज की महिला कार्यकारिणी का गठन
चंडीगढ़, 7 मार्च। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अग्रवाल वैश्य समाज की महिला कार्यकारिणी का गठन करते हुए प्रदेश पदाधिकारियों एवं लोकसभा व विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्तियां की गई है। समाज की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्षा सुशीला सर्राफ ने नवनियुक्त पदाधिकारियों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक…
बन्द करो ‘करोना’ का रोना
बन्द करो #करोना का रोना बनो सनातन कुछ ना होना तन- मन- जीवन हिन्दू हो तो सदा स्वस्थ कोई रोग ना होना करना है तो करो नमस्ते शेक हैंड मत “#करोना” खाना में शाकाहार करो , मांसाहार मत ” #करोना” रोज करो तुलसी का सेवन , धूम्रपान मत ” #करोना” नीम गिलोय का घूंट भरो…
नफरत की लाठी तोड़ो
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) मार्च के प्रथम पखवाड़े में ‘होली’ त्यौहार है । बात ‘होली’ की करूँ या जो दिल्ली में ‘हो + ली’, उसकी करूँ । संपादकीय लिखते समय यही विचार मेरे मन में उपज रहा है । ‘होली’ त्यौहार आपसी मेलजोल एवं सद्भावना को बढ़ावा देने वाला है, आप सभी को इस…
मेरे ज़रूरी काम
जिस रास्ते जाना नहीं हर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ। मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। जिस घर का स्थापत्य पसंद नहीं उस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ। मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन है वही कोई और करे…
हृदय के मोती
डॉ उषा किरण (पूर्वी चंपारण, बिहार ) निशा नहाती ज्योत्सना में, मुग्ध सी कुछ हो रही है। उद्वेलित होते अंतर में , नूतन सी कुछ बो रही है। कुछ कोलाहल हो रहे हैं, दूर अंबर के प्रांगण में। आज फिर लहरा उठा है, कल्पतरु मन के आँगन में। हास…
दुनियादारी
जो खुद से ही अंजान है उसे क्या दुनियादारी समझाई जाए, एहसान जितनों के हैं हम पर चलो उनसे ही यारी निभाई जाए। होगा कभी यूं भी कि वह खुद से दोस्ती कर लेगें बड़े कठिन हैं रास्ते इस मंजिल के चलो खुद को भी समझाया जाए। टूटते, जुड़ते, बिखरते हैं जो शख्स चिंगारियों को…
हो रँग यही अब फागुन का
कविता मल्होत्रा (स्तंभकार-उत्कर्ष मेल) वसँत ऋतु ने अब के बरस ये कैसी दस्तक दी है, चारों तरफ रक्त-रँजित फाग का मँज़र है। कहाँ गया वो मौसम जब हर पखवाड़ा वृँदावन की पावनता से महकता था। आखिर एैसा क्या हो गया कि आज सर्वोत्तम योनि पाकर भी मानव अपनी ही चाल भूल गया है। क्यूँ चाहिए…
होली सामाजिक भाईचारे की अजब मिसाल- लाल बिहारी लाल
भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाला रंगों से भरा हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकतापूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ धूमधाम से मनाते है। बच्चे सुबह-सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ…
