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15अगस्त्

रहिए सदा आप मस्त मस्त आया है पन्द्रह अगस्त यह हर साल पर आता है इसी लिए यह भारत माता है कारगिल में वीरों ने, दुश्मनों को, किया विवश और त्रस्त। आया है पन्द्रह अगस्त।।।। आओ फिर से नये भारत का करें सृजन द्वेष बुराई, जाति भावना न आने दें मन सद उपयोग करें यह…

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चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है…

चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है उजली शब का वो मुनव्वर माहताब लगे है l जब भी देखा है उसे तारीकियों से लड़ते वो फ़लक पर इक चमकता आफताब लगे है l क्या करें तारीफ़ हम उस जल्व ए जाना की सिर से पाँ तक जो ग़ज़ल की इक क़िताब लगे है l सब…

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आज की आवाज

शोषित पीड़ित की ढाल था जो, अब समुदायों की ढाल बना। अल्पसंख्यक का हार बना, यह देश के हित जंजाल बना।। कानून को ढाल बनाकर के, तुम अपने निज़ हित साध रहे। स्वारथ में इतने डूब गए, कर देश को तुम बर्बाद रहे।। याद करो कुछ पिछली भी, हम क्या सह कर के आए हैं।…

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अटल सत्य

पता नही क्यो? कोई भा जाता आँखो के रास्ते दिल में समा जाता। पता नही क्यों? उसे दखते ही प्यार उमर जाता आँखे चमक जाती और होठ मुस्कुराता। पता नही क्यों? दिल की धड़कने बढ़ जाती एक एहसास जगा जाती जैसे सपनों में खोया हूँ यह आभास क्यों जगा जाता ? पता नहीं क्यों? अब…

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आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार?

भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की…

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एक बैठक

एक दिन सभी महिलाओं के आत्मसम्मान  एवं  भावनाओं ने बैठक रखी। दूर एक निर्जन पहाड़ी की चोटी पर, जहाँ कोई मनुष्यरूपी प्राणी नहीं पहुंच पाता, सभी मिले। उनका साथ देने के लिए कल-कल बहती नदियां, ऊँची पहाडियाँ, आकाश में उड़ते पंछी थे। उनका हौसला बढ़ाने के लिए सूरज भी चमक रहा था और बादल भी…

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मंत्रालय वितरण में दिखा खुन्नस , योगी ने खुद सम्हाली अधिकतर महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी !

 जब यूपी में योगी 2.0 के 52 सहयोगियों ने शपथ ली तो जातिवादी समीकरण  ,प्याज के छिलके की तह परत दर परत खुलते दिखे। हद्द तो तब हो गई जब शपथ के बाद ग्रुप फ़ोटो सेशन हुआ था , बीच में मोदी , मोदी के एक बगल राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और दूसरी बगल योगी।…

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काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती फिर अन्य रंगों का क्या होता इंद्रधनुष में सात रंगी न होता आसमां नीला न होता और फूल,फल सब बहुरंगी न होते पत्तों का रंग हरा न होता न ही धरती अंतरिक्ष से काली दिखती न ही अंधेरे का कोई सम्राज्य होता। काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती गोरी…

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व्यंग्य – थप्पड़ खाकर उबरे नेता, मानुष, चून…….

    पंकज सी बी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर राजनीति में थप्पड़ खाना कभी कभी जरुरी हो जाता है। ये अलग बात है कि कभी थप्पड़ आप खुद आर्गेनाइज करवाते है और कभी कभी यह विपक्ष आर्गेनाइज करा के देता है या फिर कभी कभी देश के होनहार भगत सिंह टाइप के युवा  सधे…

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तांटक छन्द

दुख में दीनानाथ हमेशा, साथ खड़े हो जाते हैं। होते वही सहायक सबके, काम सभी के आते हैं। आता है जो जीव शरण में,भवसागर तर जाता है। दयासिंधु के धाम सहज ही, मानव वह जा पाता है। जपले हरि का नाम सखी री, माया एक झमेला है। चारदिनों का जीवन खाली, बस इतना ही खेला…

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