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सात फेरे

सात फेरे (नमस्कार प्रिय पाठकों (मित्रों) मेरे द्वारा लिखी यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक हैं । किसी भी व्यक्ति का नाम या कहानी का कोई क़िस्सा सयोंग ही होगा। कहानी के शीर्षक के आधार पर जो सात वचन मैंने लिए हैं वो वास्तविक हैं । कहानी का उद्देश्य समाज में महिलाओं की स्थिति को दर्शाना…

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World leader of Heartfulness Meditation Trust Revered Daaji Unveils “Shiv se Samvad” – A Poetic Journey in search of ultimate reality

Revered Daaji, the esteemed spiritual luminary and global guide of Heartfulness, proudly launched “Shiv se Samvad,” an exquisite collection of poems penned by Shri Arun S Bhatnagar (Group Advisor- IIST Group of Institutes). The book launch event held amidst an aura of reverence and anticipation at Heartfulness Meditation Centre in Indore, marked the debut of…

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सोच सको तो सोचो

गिलगित बाल्तिस्तान हमारा है हमको लौटाओ। वरना जबरन ले लेंगे मत रोओ मत चिल्लाओ।। खून सने कातिल कुत्तों से जनता नहीं डरेगी। दे दो वरना तेरी छाती पर ये पाँव धरेगी।। तेरी मेरी जनता कहने की ना कर नादानी। याद करो आका जिन्ना की बातें पुन: पुरानी।। देश बाँटकर जाते जाते उसने यही कहा था-…

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लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का

लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का अश्लीलता फैलाने वाले कलाकारों पर लगे बैन, ग़लत दृश्य दिखाना, अश्लील नाटकों-गीतों का मंचन समाज से खिलवाड़।  एक ओर जहाँ कई लोग संस्कृति को प्रमोट करने के लिए अपना करियर, अपनी मेहनत और अपना सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं तो कोई हमारी संस्कृति को इस तरह…

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बरसती फुहारें

बरसती फुहारों में झूमे है मन, चलो उड़ जायें कहीं दूर चलो । लगा पंख मांग किसी पंक्षी के, चलो आज गगन के पार चलो। सारी उलझनें सुला कर कोने में, खुशियों के संग उड़ जायें चलो। कहां से आया है झूमता बादल , चलो इन बादलों के साथ चलो। गीत सीखेंगे कोयल से हो…

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लव आजकल

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार उत्कर्ष मेल) यदि किसी बच्चे को जन्म के तुरँत बाद केवल ऊपरी ख़ुराक पर किसी हिंसक व्यक्ति के सान्निध्य में पाला जाए तो उसका व्यक्तित्व कैसा होगा?  बिन माँ के बच्चे जैसा ही होगा ना?  लेकिन हम सब तो भारत माता के बच्चे हैं फिर हमारे वजूदों में इतनी व्याधियाँ कहाँ से…

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हौसले

अड़चने हों हजारों राह में तेरे साथी हौसलों को कभी कम नहीं होने देना। काटकर गिरि को राहें बनाई हैं तुमने बाँध सागर को जग को दिखाया कभी। चाँद मंगल की सरहद भी लांघा तुमने गहराई पयोधर की भी है नापा सभी। देव दानव सभी करते तेरी ही बड़ाई दुष्करों से आँखें नम तू नहीं…

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❤️ ये बाईं ओर रहता है ❤️

*ये जो सीने में मेरे . बाई और रहता हैं बखूबी सारे रिश्ते निभाने  को कहता है, हम काम में उलझ जाते तो, तो ये प्रकृति की धड़कन सुनाता है तर्क की बेरंग दुनिया में ये इश्क़ का रंग भरता है अक़सर यादों की सैर कराता है ये जो सीने में मेरे ❤️बाईं ओर रहता…

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बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

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