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दुनियादारी

दोस्त, तेरा चेहरा जो है बिल्कुल नूरानी है। सो,  तुझको  चाहने  की  हमें बीमारी  है।। उसकी आँखों में तेवर और होशयारी है। आज फिर से पड़ोसी ने की ग़द्दारी है।। दिल से दिल तक पहुँचती हैं जिनकी बातें। असल में वही बातें होती असर कारी हैं।। और बेटी से होती  हरेक आँगन में रौनक। सच …

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सही जीवन शैली अपनाकर एचआईवी संक्रमण से बचा जा सकता है

1 दिसंबर विश्व एड्स दिवस के अवसर पर विशेष डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाता ए आर टी सेंटर, एस एस हास्पिटल, आई एम एस, बीएचयू, वाराणसी एचआईवी की पहचान के चार दशक बाद भी यह एक विश्वव्यापी समस्या बना हुआ है। एचआईवी वायरस मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को  कमजोर करता है जब…

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विश्व पुस्तक मेले का आगाज 10 फरवरी से दिल्ली में

लाल बिहारी लालनई दिल्ली। पुस्तकों का महाकुंभ बहुभाषी भारत के रंग नई दिल्ली में देखने को इस बार मिलेगा विश्व पुस्तक मेले में । 10 से 18 फरवरी तक आयोजित विश्व पुस्तक मेला में इस बार 40 देश और 2000 से ज्यादा प्रकाशकों(स्टाँल) की भूमिका रहेगी ।इस वर्ष मेले का थीम है बहुभाषी भारतः एक…

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लिख जाएँ एक इतिहास नया

(श्रीमती कविता मल्होत्रा ) लॉकडाऊन की अवधि के दौरान तमाम लोगों की सोच के अनुसार कई तरह के सँदेशों का आदान-प्रदान दिखा। अधिकतर लोगों के बीच चर्चा का एक ही विषय था कि कोरोना वायरस मानव-निर्मित है या प्राकृतिक आपदा। इस प्रश्न के उत्तर में स्थित सबकी अपनी अलग सोच दिखी। ज़्यादातर लोग, जो केवल…

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कैसा धर्म ?

सविता चडढा सुबह के 5 और 6 बजे के बीच का समय था । इस समय तक बहुत कम लोग ही उठ पाते हैं । सुगंधा हर रोज देखती है  मंदिर जाने वाले कुछ लोग ही इस समय उसके घर के नीचे से निकलते हैं । उस दिन गली में शोर सुनकर सुगंधा ने दरवाजा…

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परीक्षा से आगे सोचना होगा: शिक्षा का असली मकसद – डॉ विजय गर्ग

  आज के दौर में ‘शिक्षा’ और ‘परीक्षा’ एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। जैसे ही बच्चा स्कूल में कदम रखता है, उसके सीखने की यात्रा अंकों और ग्रेड्स की दौड़ में बदल जाती है। लेकिन क्या जीवन की सफलता केवल उत्तर पुस्तिकाओं में लिखे गए शब्दों तक सीमित है? समय आ गया है कि…

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दिल्ली-राष्ट्रवाद की नई प्रयोगशाला दिल्ली चुनाव भाग 1

कुछ दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव होने वाले हैं | जैसे जैसे वक़्त क़रीब आता जा रहा है, यहाँ की फिजाओं में राजनीति की महक फैलती जा रही है | पर दिल्ली का चुनाव किसी के लिये भी आसान नहीं है, न तो 5 साल अच्छा सरकार चलाने का दावा करने वाली…

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आँसू जो तेज़ाब बन गये

प्रवासी नहीं,ये भारतवासी हैं,सैंकड़ों हजारों किलोमीटर दूर पैदल चलने को मजबूर हैं,इन्हीं को आप राष्ट्र निर्माता कहते हैं,भाग्य विधाता कहते हैं,यही तो आपके मतदाता हैं, जिन्होंने आप को सत्ता तक पहुंचाया है, यही हैं वो,जिनके बारे में संविधान की प्रस्तावना में लिखा है-“हम भारत के लोग”जिन गाँवो को ये लोग लौट रहे हैं, वे सालों…

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हरियाणा सरकार के बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में स्मारक निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम

मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन ऐसे कम ही होते हैं जो शोषितों के अधिकारों और न्याय के लिए संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए किसी भी बलिदान के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसे ही एक योद्धा लक्ष्मण दास/माधोदास (बाबा बंदा सिंह बहादुर) का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में राम देव के घर…

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नारी के अखण्ड सौभाग्य व अदम्य सहनशक्ति का परिचायक :करवाचौथ

व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाऽऽप्नोति दक्षिणाम् ।दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते।। अर्थात् व्रत धारण करनेसे मनुष्य दीक्षित होता है, दीक्षासे उसे दाक्षिण्य (दक्षता, निपुनता) प्राप्त होता है, दक्षताकी प्राप्तिसे श्रद्धाका भाव जाग्रत होता है और श्रद्धासे ही सत्यस्वरूप ब्रह्मकी प्राप्ति होती है । (यजुर्वेद १९ । ३०)। भारतीय संस्कृतिका यही लक्ष्य है कि, जीवनका प्रत्येक क्षण व्रत, पर्व…

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