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अपनी कटु हंसी पर फ़िदा महंगाई

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव हाय ! कितनी प्यारी कटु हंसी से हंसे वे । वे तो भूल भी गए कि वो एक राज्य के कृषि मंत्री हैं । नेता तो ऐसे ही भूल जाते हैं, उवे च्यवनप्रास खाते हुए भी भूलने की बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं । उत्तर प्रदेष के कृषि मंत्री…

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दो जून की रोटी

दो जून की रोटी जहां में, मिलती सखी सबको नहीं। दिन रात बहता है पसीना, तब हाथ आ पाती कहीं। मँहगाई का आलम ये है,  बढ़ती ही देखो जाती। मजदूरी जितनी भी मिलती, पूरी वह कब हो पाती। जिनपर काम नहीं है कोई, कैसे उनका दिन कटता। दिन में भी तारे दिखते है, मुश्किल से…

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हिन्दी भाषा देश की आन बान शान

मंजू लता (राजस्थान_ आज का दिन मेरे लिए बहुत ही खुशी का दिन होता है । आज मेरे विषय हिन्दी को सम्मान दिया जाता है । हमारे भारत में पूरे साल भर हिन्दी भाषा के साथ उपेक्षित व्यवहार किया जाता है । आज के दिन को हिन्दी दिवस मनाकर इतिश्री कर ली जाती है ।…

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पृथ्वी का मौन

आज बैठी हूँ मैं उदास लिखने जा रही हूँ कुछ खास इस महामारी के चलते लोग नहीं हैं आसपास किसी ने नहीं सोचा था कि कोर्इ समय ऐसा आयेगा, इन्सान इन्सान से मिलने के बाद पछितायेगा। कैसे हैं आज के समय के फसाने, लोग ही लोगों को लगे हैं डराने। क्या यह हमारी गलती है…

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आरोपों की अन्त्याक्षरी

राजनीतिक सफरनामा :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव तुकबंदी का दौर आ चुका है और यह तुक बंदी उत्तरप्रदेश से प्रारंभ हुई है । वहां के मुख्मंत्री ने एक नारा दिया ‘‘बंटेगें तो कटेंगें’’ अब इस नारे की काट खाजने के लिए तुकबं दी प्रारंभ हो गई । समाजवादी पार्टी ने अन्त्याक्षरी के जैसे इसे लपक लिया…

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अग्निपथ योजना से अनगिनत मेहनती युवाओं के सपने हुए बर्बाद : राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अल्पावधि सैन्य भर्ती कार्यक्रम अग्निपथ को लेकर शनिवार 30 दिसम्बर को केंद्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अनगिनत मेहनती और होनहार युवाओं के समर्पण तथा सपनों को बर्बाद कर दिया है। गांधी ने युवाओं से अपनी मुलाकात पर कहा, ‘‘ये युवा अपना संघर्ष बयां करने के…

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दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

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मां : राकेश कुमार (बिहार)

माँ अपनी छाया जरूर देना,  कुछ देना या ना देना माँ तू प्यार देना,  चंचल हु नादान हु गले से अपना लगा देना,  माँ मुझे किसी की नज़र ना लगने देना,  लाल हू तेरा माँ विजयी सितारा लगा देना।  प्यार भरा आशीर्वाद रहे हीरा जैसा चमका देना।  आँखों की रोशनी तू मुझे अपना बना देना।…

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पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी का इन्द्रपार्क पालम में आगमन

आज 26 मार्च , देव मानव सेवा ट्रस्ट इन्द्रा पार्क पालम के प्रांगण को प्रयाग पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने चरणों से शुद्ध कर दिया बहुत ही सुन्दर प्रवचन सुनने को मिले बहुत ही शिक्षाप्रद विचारों का प्रदान किया, संस्था विशेष रूप से पूर्व पार्षद मेरे बड़े भाई श्री अनिल…

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विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता

( क्या सचमुच भारत में अवसर कम हैं या हम एक भ्रम में जी रहे हैं?)  – डॉ. प्रियंका सौरभ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—बेटे-बेटियों को विदेश भेजने की होड़। कभी पढ़ाई के नाम पर, कभी नौकरी के नाम पर, तो कभी बेहतर जीवन के सपने…

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