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मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए

कविता मल्होत्रा (संरक्षक – स्थायी स्तंभकार) मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए अब के बरस श्राद्ध कर्म में श्रद्धा का भाव डाला जाए ✍️ ये तो सच है कि माता-पिता के प्रति अपने संपूर्ण दायित्व निभाने वाली संतान को तीर्थ यात्रा पर जाने की ज़रूरत नहीं होती।अपने विस्तृत परिवार के साथ-साथ समाज के…

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ग़ज़ल,

शराफत हम से कहती है,शराफत से जिया जाए, कोई हद भी तो होती है,कहाँ तक चुप रहा जाए। ग़ज़ल से गुफ़्तगू हमने इशारों में बहुत कर ली, मगर अब दिल ये कहता है कि कुछ खुल कर कहा जाये। अभी ज़िंदा हैं हम साँसें भी अपनी चल रहीं हैं न, तो फिर क्यों ना बुरे…

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गांधार की मचलती हवाएं -DR KAMINI KAMAYANI

प्रत्यंचा गांधार की मचलती हवाएं और /थिरकते इन्द्रधनुषी सपनों पर, अचानक वज्रपात करते/ हे / पितामह (भीष्म) तुझे तनिक भी हिचक न हुई । अपने जनक के अरमानों के लिए स्वयं की इच्छाओं का चिता जलाने वाला एक सामान्य अबला नारी के लिए क्यों इतना निर्मम, नि:क्षत्र हो गया ? युद्ध में जीती/पराजित /नरेश की…

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संपादक व समाजसेवी माधुरी घोष “एशिया अवार्ड” से सम्मानित

बड़ौदा : बड़ौदा की सम्पादक व सोशल एक्टिविस्ट माधुरी घोष को रविवार13 अक्टूबर शाम गुजरात के अहमदाबाद  स्थित ‘रेडक्रॉस सोसायटी’ के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित भव्य आयोजन में “अमीर सत्या फाउन्डेशन , हिसार ” द्वारा “एशिया अवार्ड” से सम्मानित किया गया।  यह सम्मान उनको  हिन्दीतर प्रदेश गुजरात से उत्कृष्ठ महिला पत्रिका ‘संगिनी आपकी हमसर’ के…

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खूब लड़ी ‘दीदी’ वह तो …..(सम्पादकीय)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) होली भी गई और जिस बात की आशंका भी वह भी हो ली । कोरोना ने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाना प्रारंभ कर दिया है । जबकि लोगों ने लगातार गिरते आंकड़ों को देखकर–सुनकर मानों निश्चित होना प्रारंभ कर दिया था कि शायद हम कोरोना से मुक्त…

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“समर्पण से मिलती है राह।”

समर्पण का अर्थ है “समस्त अर्पण” उस सर्वशक्तिमान के समक्ष जिसने हमें बनाया है। किसी निर्धारित उद्देश्य से हर प्राणी को पृथ्वी पर भेजा है। जब आप समर्पण भाव से जीवन को बिताते हैं तो सभी मुसीबतों से अपना नाता तोड लेते हैं। जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार कर लेते हैं। ईश्वर के…

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भारत वन्दना

हे जन्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, है कर्मभूमि भारत वन्दन  करूंगा तेरा।          तू चेतना  की  देवी          तू कर्मणा की  देवी          तू भावना की  देवी          तू साधना  की देवी हे कर्षभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा, हे धर्मभूमि भारत  वन्दन करूंगा तेरा।           तू  एकता  सिखाती           तू  नेकता   दिखाती           तू  नीति  …

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हम कहां आ गये हैं, यूं ही साथ चलते चलते’

सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’ आप सभी को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की हार्दिक बधाई  एवं अनन्त शुभकामनाएं ।  जीवन जीने का, स्वस्थ रहने का स्वआनन्द से परमानन्द तक की प्राप्ति का मार्ग दिखाने वाले भारत देश, जिसको पुन: विश्वगुरु बनाने का स्वप्न देखा जा रहा है ।  ऐसा हो तो सकता है किन्तु…

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दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल…

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पगड़ी का मान

तुम्हारी बहन के यहां शादी में तुम ही चले जाओ। मुझे नहीं जाना अपनी बेइज्जती कराने के लिए। पूजा अपने पति से झूंझलाकर कह रही थी। पूजा का पति नीतीश चुपचाप पूजा की बात सुन रहा था। पूजा की बात भी सही थी। क्योंकि उसकी बहन अपनी अमीरी के दंंभ में उनको बेइज्जत करती ही…

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