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चमत्कार और अंधविश्वास का फेर

                                                                          कुशलेन्द्र श्रीवास्तव  धीरेन्द्र शस्त्री और फिल्म पठान चर्चाओं में आ गई । जो चर्चाओं में आ जाता है वह फेमस हो जाता है । किसी के भी प्रसिद्ध होने के लिए यह सबसे आसान तरीका होता है । पूरी मीडिया धीरेन्द्र शास्त्री के हर क्रियाकलाप को दिखाने लगी । धीरेन्द्र शास्त्री अपनी हुकार से…

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सिद्ध बहुत तन की गुफा  (दोहे)

साधे तो सधता सभी, योग बड़ा विज्ञान | मन की इच्छा पूर्ण हो, आ जाये संज्ञान || मन की आंखें खोल तो, देख जगह संसार | वरना सब कुछ सो रहा, जो तेरा अधिकार || सांसों में है भेद सब, सब सांसों का सार | भार समर्पित भाव यह, जीवन का आधार || योग चेतन…

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श्री गुरु नानक देव जी के 550 में प्रकाशोत्सव पर सविता चडढा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ ऑनलाइन कवि दरबार

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन बहुभाषी कवि दरबार आयोजित किया गया ।इस कवि दरबार की अध्यक्षता हिंदी की जानी मानी लेखिका श्रीमती सविता चडढा ने की। इस बहुभाषी कवि दरबार में सतीश सोहल, सरदार सुलकखन सिंह, प्रीतम सिंह प्रीतम,दिनेश छिमवाल , सरदार परमजीत सिंह…

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नवरात्रि

नवरात्रि वर्ष में दो बार आती हैं।बसंतिक नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। हमारा हिंदू कैलेंडर व नव वर्ष की शुरुआत नवरात्रि से होती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नवरात्रि प्रारंभ होती हैं जो हिंदू नव वर्ष का पहला दिन भी होता है। इस दिन सनातन धर्म के लोग नव वर्ष बड़े ही उत्साह…

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अभ्युत्थानम्  धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्…..

पंकज कुमार मिश्रा, मिडिया विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  महाभारत के बाद युधिष्ठिर आश्चर्य में डूब गए। धीमे स्वर में माधव से कहा – यह महाभारत क्यों हुआ ? जबकि वह स्वयं जानते थे कि श्री कृष्ण नहीं होते तो पाण्डु पुत्र भिखारी होते, जैसे 1985 से पहले कश्मीर में पंडित और 2014 से पहले…

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हर वक्त बस उनका ही ख्याल आया-ग़ज़ल

दूर हूँ उनसे बहुत, इत्ती बात पर भी, नहीं कभी कोई मलाल आया। हर वक्त उनकी याद रही, हर वक्त बस उनका ही ख्याल आया।। उदास पतझड़ भी कुछेक पेड़ों पर कोई-कोई कोलम-सी पत्ती ले आया। पहुँचे जब हम, उनकी गलियों में, चेहरे पर उनके गुलाल उभर आया।। सवाल कोई पुराना था उनके जहन में,जो…

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बुरा न मानो, होली है

होली रंगों का त्योहार है। इस दिन लोगों द्वारा एक दूसरे पर रंगीन पाउडर और रंगीन पानी छिड़का जाता है। फागुन के महीने में पूर्णिमा (फरवरी-मार्च) के दिन पड़ने वाला यह वसंत उत्सव प्राचीन काल में ‘मदन-उत्सव’ के रूप में जाना जाता था। ब्रज की होली (उत्तर प्रदेश का मथुरा-वृंदावन क्षेत्र पारंपरिक रूप से कृष्ण…

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एक बैठक

एक दिन सभी महिलाओं के आत्मसम्मान  एवं  भावनाओं ने बैठक रखी। दूर एक निर्जन पहाड़ी की चोटी पर, जहाँ कोई मनुष्यरूपी प्राणी नहीं पहुंच पाता, सभी मिले। उनका साथ देने के लिए कल-कल बहती नदियां, ऊँची पहाडियाँ, आकाश में उड़ते पंछी थे। उनका हौसला बढ़ाने के लिए सूरज भी चमक रहा था और बादल भी…

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पिता (कविता-2)

दीया में तेलशक्ति भले क्षीण हो पिता सूर्य की तरह जला है; राहें अंधियारी उबड़ खाबड़ अपनों के खातिर सदा चला है!               अपनों के खातिर सदा चला है!! 🌹 तूफान के साये काले कंदर्प टूटा न उसका लोहित दर्प लहूलुहान हुआ अपनों के लिए दिल में रख बस एक तड़प!                 दिल में रख…

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छाया है पिता

बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोई आँसू छिपाता अन्तर में अपने। तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वो चाहता पूरे हों अपनों के सपने। बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद है पिता जीवन की इक…

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