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पत्नी अपने पति को बहुत प्यार से कहती है

जैसे शिव जी पार्वती के बिना अधूरे विष्णु जी लक्ष्मी के बिना अधूरे ठीक वैसे ही हर पति बिना पत्नी के अधूरे  “लड़की “इज्जत माता पिता के घर की “लड़की “ सिर का ताज ससुराल की नारी “ आन बान शान परिवार की शादी के बाद कुछ यूँ कहती अपने पति से “ माँग मेरी…

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योग की महत्वता— योग दिवस—– प्रवीण बहल

सारे विश्व में हर व्यक्ति के जीवन में– योग का महत्व बढ़ गया है– अगर हम 50 वर्ष पीछे चले जाएं तो हमें याद होगा कि हर स्कूल में पढ़ाई शुरू होने से पहले पी टी हुआ करती थी– महत्व था शरीर को चुस्त बनाना– आज यह— अध्ययन के विषय में आ गया– जब से…

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स्वतंत्रता दिवस

.{कविता मल्होत्रा, संरक्षक, स्थायी स्तंभकार} स्वतंत्रता दिवस की सभी को हार्दिक बधाई रक्षा सूत्र अपने विचारों पर बांधें न हो जग हंसाई सावन की फुहार अपने साथ अनगिनत त्योहारों का पैग़ाम लेकर आई है।सदियों से बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधती आईं हैं।परस्पर सुरक्षा की ये मन्नतें दोनों ओर से चलतीं हैं…

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संयमित जीवन शैली

आज का विशेष संयमित जीवनशैली वास्तव में एक महत्वपूर्ण विषय है क्यूकि हमारी पीढ़ी कम्प्यूटर, मोबाइल, बर्गर, पिज्जा और देर रात की पार्टियों पर आधारित है – मूल रूप से ये सब अस्वास्थ्यकर है। पेशेवर प्रतिबद्धताओं और व्यक्तिगत मुद्दों ने सभी को जकड़ लिया है और इन सभी अराजकताओं के बीच वे अपना स्वास्थ्य खो…

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होली महापर्व

विधा:-विधाता छंद मनाते होलिका मन से, सभी त्यौहार से बढ़कर।  बनें पकवान पूजा के, गुलरियों माल घर रख कर।  बड़ी होली रखें गावों, लकडियाँ बीच में रख कर।  सुहाना फाल्गुन महीना, मनाते पूर्णिमा तिथि पर॥  जलाते पूजकर होली, सभी जन फाग गाते हैं।  जलाने घर रखी होली, वहीं से आग लाते है।  नये गेंहू भुजीं…

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“राम तुम्हे आना होगा।”

राम यानि वो चरित्र जिसने जीवन जीने की कला सिखाई। अपना सम्पूर्ण जीवन इस तरह व्यतीत किया कि मिसाल बन गए। हर युग में, हर परिस्थिति में उनके द्वारा उठाए गए हर कदम का लोग गुणगान करते हैं। यूं ही नही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके व्यक्तित्व का आकर्षण, कोमल वाणी का सम्मोहन…

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रामजी मेरे आजाइयेगा

रामजी मेरे आ जाइयेगा।मेरी नजरों में बस जाइयेगा। अपनी धड़कन को लोरी बनाऊं,सांसों के झूले पर मैं झुलाऊं।मेरी पलकों के बिस्तर पर सोने,मेरी नीदों में आ जाइयेगा। नाव है जिंदगी ये हमारी,और पतवार बाहें तुम्हारी,पार कैसे करूं इस भंवर को,बन के केवट चले आइयेगा। शीश चरणों में रक्खा तुम्हारे,हाथ सिर पर रखो तुम हमारे।तुम विराजे…

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शबरी के प्रभु और केवट के राम ….!

राम मर्यादा पुरुषोत्तम है क्योंकि उन्होंने मर्यादा की सीमा कभी नही लांघी और वह वही जाते है जहां मर्यादा होती है । अमर्यादित स्थानों पर राम की उपस्थिति असंभव है । कुछ लोग जय श्री राम का नारा तो लगाते है किंतु उसके बाद सारे अनैतिक कार्य करते है । वह ये अनैतिक कार्य यह…

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तुम फागुन ही फागुन हो

गूंथ लिया सारा बसंत अपने जूड़े में , मौसम कहता है तुम फागुन ही फागुन हो। होटों से लिपट लिपट मखमली हंसी तेरी, दूधिया कपोलों का चुंबन ले जाती है। झील के किनारों को काजल से बांधकर, पनीली सी पलकों में सांझ उतर आती है। महावरी पैरों से मेहंदी रचे हाथों तक, छू छू कर…

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उम्मीदों का वृक्ष

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए। जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।। जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ। शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते उन्होंने…

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