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UP Election Results 2022: तमाम मिथक तोड़कर भाजपा को बड़ी जीत दिलाने वाले योगी आदित्यनाथ ने दी विधायकों को बधाई

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचार के दौरान दौरान एक ही दिन में चार-पांच रैली के साथ ही रोड शो करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुरुवार को परिणाम आने के बाद बड़ा सुकून मिला होगा। योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने पहले ट्वीट में भारतीय जनता पार्टी के सभी निर्वाचित विधानसभा सदस्यों…

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नोएडा में 26 जनवरी से 30 जनवरी तक नाट्य-उत्सव का आयोजन

नोएडा में 26 जनवरी से 30 जनवरी तक नाट्य-उत्सव का आयोजन किया गया। यह जाने-माने लेखक, इतिहासकार, अभिनेता और फिल्मकार दिनेश कपूर और नोएडा प्राधिकरण के सानिध्य द्वारा सेक्टर 91 के पंचशील कॉलेज के 700 सीट वाले अडिटोरियम में संयोजित किया गया। इस प्रकार का यह पहला आयोजन था। दिनेश कपूर मानते हैं की गंभीर…

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पेड़ की व्यथा

दोस्तों नमस्कार, पहचाना मुझे? पहले थोड़ा मुश्किल होता मुझे पहचान पाना लेक़िन इस फोटो के साथ पहचान ही लिया होगा। हाँ कल आपमें से बहुत से आए भी थे, मैं दिखा भी होऊंगा आप सब को लेकिन आपने शायद ध्यान न दिया हो, ओर ध्यान देते भी कैसे, इतना आसान थोड़ी ही था मुझे देख…

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कालजयी रचनाकार बंकिमचन्द्र चटर्जी-राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के प्रणेता

*(26 जून जन्मदिवस के बहाने)* पहले कलकत्ता में कवियों कलाकारों का भी अपना एक दौर था, जो अपने इस समाज में निस्संदेह सबसे ऊपर और लोकवरेण्य माना जाता था। कलकत्ता का बंगाली समाज आज भी अपने मुकुट के रूप में इसी वर्ग को धारण करता है। बंगाल के लोग अपनी अस्मिता की पहचान आधारभूत तौर…

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अब के ऐसा वसंत खिले आर्गेनिक हर निगाह रहे

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार, संरक्षक ) हर साल प्रतीकों के आधार पर हम सभी कुछ राष्ट्रीय और कुछ अँतर्राष्ट्रीय दिवस, कुछ वैश्विक और कुछ प्रतीकात्मक दिवस मनाकर अपने दायित्वों की इति श्री समझ लेते हैं।जिस भारतीय संस्कृति पर समूचा विश्व गर्वित होकर हमारे पारिवारिक संस्कारों के प्रति सम्मोहित होने लगा है, हम सभी उस संस्कृति की…

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ऐसा क्यों ?

             वन्दना को बहुत दिनों से नहीं देखा तो लगा शायद उसकी शादी हो गयी होगी ।अचानक ही व्हाट्सएप पर उसका नाम दिखा तो गरिमा से न रहा गया उसने मैसेज भेज ही दिया – “अरे वन्दना तू कैसी है ?कहाँ है ?”        कुछ समय बाद वन्दना…

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अन्तर्द्वन्द्व—(कहानी) : आशा सहाय

सन्नाटा है चारो तरफ।मैं चीख रही हूँ।लगता है, दूर दूर तक मेरी चीख की आवाज पहुँच गयी होगी।पर, नहीं – कहींकोई आवाज नहीं।एक गहरे सन्नाटे की ध्वनिसे भरा पड़ा है सबकुछ।सन्नाटे की एक विचित्र सी गूँज मस्तिष्क को बौखलाहट से भर रही है।और अधिक जोर से चीखने का मन हो  रहा है।पर,चीख जैसे मेरे अन्दर…

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चीत्कार

निः शब्द हो जाती है अंतरात्मा भी उस पल  ख्वाबों को अपने सामने जब तिनका तिनका बिखरते देखती है । लेकिन खुद का एक यकीं हूं मै  जरूरत नहीं मुझे बेपरवाही की खुद में सुरूर हूं खुद का गुरूर हूं अपनी ही ढाल हूं हां मै कमाल हूं । दुश्वारियों से बिखरती नहीं फर्ज़ से…

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खुशी हो या गम नशा का सेवन क्यों

पर्व-त्योहारों या गम को दूर करने के लिए अथवा विभिन्न सामाजिक पार्टीयों में विशेषकर फब पार्टीयों में नशीली पदार्थो जैसे शराब सिगरेट आदि का प्रचलन बढ़ रहा है और इसे बुराई के तौर पर देखने की प्रवृत्ति प्रायः कमजोर हुई है।नतीजा, युवा वर्ग इस ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं जो एक सभ्य समाज के निर्माण…

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( हास्य कविता ) मेरे पति

1 जब जब बीमार मैं पड़ती हूँ पति मेरे प्रेम पूर्वक रूबाब मुझे दिखाते है ख्याल नही रखती अपना सैर भी तेरी बंद है दूर मैं तुमसे रहता हूँ फ्रिक तुम्हारी करता हूँ नौकरी छोडूँ , घर बैठूँ बोलो , तुम क्या कहती हो 2      जब जब बीमार मैं पड़ती है पति मेरे  , दोस्त…

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