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नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता…

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पुराने हांडी में नया चावल पका रहें धनाढ्य नेता .!

बहुत पुराने वक्त से हम सुनते आ रहे हैं कि जनतंत्र, जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन होता है। जनतंत्र में जनता होती थी, सरकार होती थी, चुनाव होते थे, नीतियां होती थी, संसद और विधायकाऐं होती थीं, जिनमें जनता द्वारा सरकार को चुना जाता था। सरकार जनता के कल्याण के…

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भाषा तभी बड़ी बनती है

अज्ञानी था मानव आदिम सीखा प्रकृति से जीवन जीना रहना गाना पशु पक्षी सम उनकी भाषा में बतियाना जैसी हुई पहचान स्वरों की विविध प्राणियों तरु पत्तों की गगन गरज की,वायु सरण की सरित प्रवाह,जल थल औ नभ की वैसी ही ध्वनियों की रचना अभिव्यक्ति के लिए किया फिर अंतर्ध्वनि विभिन्न भावों की उसी रूप…

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हर मुश्किल राह भी आसान हो जाती है

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) जम्मू–कश्मीर से धारा 370 हटते ही न जाने क्यों पाकिस्तान में खलबली मच गई ? उन्हें इस बात का आभास है कि वहां खुशहाली होते ही ‘पीओके’ में हुड़दंग मच जाएगा फिर वो भी गंवाना पड़ सकता है । विश्व बिरादरी में खूब हाय–तौबा की, पर भारत की सफल कूटनीति के…

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मत बहाओ खून

मत  बहाओ  खून  मनुता का,    अये सभ्य  मानवो! रो- रोकर  है  पूछती  तुमसे   मनुजता      आज  है। तुम  थे  बहुविकसित, बुद्धि – विवेकयुक्त भलेमानस कहां  पायी  ऐसी  पशुता,    कैसा   यह  समाज   है? धांय-धांय, सांय-सांय  करते  गिर  रहे  बारूद- गोले टूट- टूटकर  के  ढह  रही  हैं    बहुमंजिली   इमारतें बन गए  वीरान   शहर  जो   कलतक   थे   आबाद नहीं…

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कोरोना का कहर सताता

शीर्षक-कोरोना का कहर सताता देखो कोई आता न जाताकोराना का कहर सताता..यूँ शहरों में पसरा सन्नाटाभूल से भी भूला न जाता.. न मिलो किसी से न हाथ मिलाओदूर-दूर रहकर हर राब्ता निभाओये बुरा वक़्त ही तो पहचान कराताअपने और परायों में भेद बताताकोरोना का कहर सताता.. हैण्डशेक के रीति-रिवाज विफल हैकरबद्ध नमन की संस्कृति सफ़ल…

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कविता क्या है

कविता क्या है शब्दों के अथाह समंदर से चुनकर पिरोई गई शब्दों की माला। जब कवि के ह्रदय में प्रज्वलित होती है ज्वाला तन मन यूँ सुलगे जैसे पी आया हो हाला तब बनती है शब्दों की माला । कविता क्या है शब्दों के फूलों से सजाया गया शब्दों का गुलदस्ता । जब कवि के…

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‘मीडिया और मुद्दे’ पुस्तक का विमोचन

माध्यमों में जन सरोकारों की प्रतिबद्धता आवश्यक- प्रो. रघुवंशमणि त्रिपाठी बस्ती । रविवार को प्रेस क्लब सभागार में अनुराधा प्रकाशन से प्रकाशित नीरज कुमार वर्मा ‘नीरप्रिय’ कृत ‘मीडिया और मुद्दे’ पुस्तक का विमोचन किया गया। शिव हर्ष किसान पी.जी. कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर रघुवंशमणि त्रिपाठी ने कहा कि माध्यमों का प्रभाव समाजों पर पड़ता…

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सात अजूबे (Seven Marvels)

यह एक उपाधी है जिसे प्राचीन समय से ही विश्व के अद्वितीय और अद्वितीय स्थानों को सूचीबद्ध करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इन “सात अजूबों” को दुनिया के सबसे अद्वितीय और श्रेष्ठ रचनात्मक कारणों के रूप में माना जाता है। ये हैं: ताजमहल (ताज महल) – भारत: भारत के आगरा शहर में स्थित…

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SAY NO TO SUICIDE (सम्पादकीय )

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) वर्ष 2020 पूरी दुनिया को रास नहीं आ रहा । स्वास्थ्य, आर्थिक, प्राकृतिक आपदाओं के साथ–साथ जब हमारे बीच में से होनहार व्यक्तित्व तथा युवाओं का आदर्श कहे जाने वाले प्रतिभावान नायक सुशान्त सिंह राजपूत का मुंबई में अपने निवास पर ही आत्महत्या कर लेने की खबर का आना, एक…

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