पथ के हो राही
पथ के हो राही तुम हो पथिक थक के न हारो थोड़ा भी तनिक थोड़ा धीरज धर बढ़ते जाना एक दूजे का मनोबल बढ़ाना, आएंगी बाधाएं हजार साहस को तुम बनाना आधार, टेड़ी मेड़ी होगी डगर चलते जाना तुम हो निडर, आएगी जो भी है रुकावट वो तो होगी बस क्षणिक… पथ के हो राही…
मेरी की व्यथा ही मेरी की कथा है
मैं सीता हूँ, विनीता हूँ, लोग मुझे देवी कहते हैं। जग जननी कहते हैं, माता कहते हैं। स्त्रियों के लिए आदर्श स्वरुपा हूँ, पति अनुगामिनी हूँ, धैर्य प्रतिरुपा हूँ, आज्ञाकारिणी पुत्री हूँ, शालिनी हूँ, कामिनी हूँ। मेरे पिता जनक, विदेह, महाज्ञानी राजा हैं। मेरे श्वसुर सम्राटों के सम्राट, रथियों में महारथी दशरथ हैं। और पति!…
बच्चों का प्यार
इंद्रधनुषी रंगों से रंग देते हैं वो अपने प्यार को कोरे कागज पर। कितने मासूम होते हैं वो फिदा हो जाता हूं मैं इस आदत पर। क्या मैं इतना मासूम बन सकता हूं सोचता रहता हूं मैं तन्हाई में इतनी परत काम ,क्रोध,लोभ,मोह की चढ़ी है वक्त लगेगा हटाने में। काश मेरा बचपन फिर से…
बुरा न मानो, होली है
होली रंगों का त्योहार है। इस दिन लोगों द्वारा एक दूसरे पर रंगीन पाउडर और रंगीन पानी छिड़का जाता है। फागुन के महीने में पूर्णिमा (फरवरी-मार्च) के दिन पड़ने वाला यह वसंत उत्सव प्राचीन काल में ‘मदन-उत्सव’ के रूप में जाना जाता था। ब्रज की होली (उत्तर प्रदेश का मथुरा-वृंदावन क्षेत्र पारंपरिक रूप से कृष्ण…
मेरा हिन्दुस्तान
आसमान से ऊंचे कद का भारत मां का गौरवशीशे पे जिसके कश्मीर और दिल में सुन्दर वैभवजनजन के होठों पे खिलती वीरो की गाथा होकदमों में गंगा हो – लहराता तिरंगा हो पाँच तत्व से बन जाती है इसकी शौर्य कहानीअग्नि जल पृथ्वी आकाश और हवा अभिमानीभगत सुभाष गांधी के संग लक्ष्मी की गाथा होकदमों…
कोरोना से मुक्ति के लिए जो सेवारत हैं.
Doctor Sudhir Singh कोरोना से मुक्ति के लिए जो सेवारत हैं,प्रभु उन सबों को सपरिवार स्वस्थ रखें.एक ही लक्ष्य रहे़;कोरोना मुक्त देश रहे,इसके लिए सब लोग सदा संघर्षरत रहें.‘सामाजिक – दूरी’ का पालन करते हुए,कोरोना के संक्रमण से बचकर रहना है.सबों को ‘लॉकडाउन’ सहर्ष मानते हुए,स्वयं और समाज को सुरक्षित रखना है.सबके सत्प्रयास से ही’कोरोना’…
सुख और आनन्द
दिनांक—10-7-2024 , टाइम्स आफ इंडिया,-द स्पीकिंग ट्री में एक आर्टिकल पढ़ा -It is easy to invite joy in your life.यह विशुद्ध अनुभूत उस खुशी की बातें करता हुआ सा प्रतीत हुआ जो मानव मन की वह अवस्था है जिसे मुदितावस्था कहते हैं और जिसे अक्सर हृदय की संकीर्ण भावनाओं के तहत ,सांसारिक हानि लाभ, ईर्ष्या…
धुंध में लिपटी राजधानी
– राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” शिक्षक एवम साहित्यकार दीपावली के तीन दिनों बाद हमारे देश की राजधानी दिल्ली धुंध के काले आवरण से ढँक चुकी थी।दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण की दर बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1600 बड़े शहरों में दिल्ली प्रदूषण में सबसे आगे हैं। भारत…
