Latest Updates

हमारा राष्ट्र निशान (कविता)

हमारा प्यारा राष्ट्र निशानलाल किले पर फहर रहा है वो भारत की शानहमारा प्यारा राष्ट्र निशानइसकेे नीचे आजादी की हमनें लड़ी लड़ाईजिसके कारण अंग्रेजों को लैनी पड़ी विदाईये भारत की आन बान है ये भारत की शान हमारा प्यारा राष्ट्र निशानभारत के उन्नत मस्तक का यह है प्रथम प्रतीकरहे एकता पूर्ण देश में यह देता…

Read More

अग्निपथ योजना से अनगिनत मेहनती युवाओं के सपने हुए बर्बाद : राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अल्पावधि सैन्य भर्ती कार्यक्रम अग्निपथ को लेकर शनिवार 30 दिसम्बर को केंद्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अनगिनत मेहनती और होनहार युवाओं के समर्पण तथा सपनों को बर्बाद कर दिया है। गांधी ने युवाओं से अपनी मुलाकात पर कहा, ‘‘ये युवा अपना संघर्ष बयां करने के…

Read More

कोरोना से डरे नही, डट कर सामना करें (आलेख)

आज केवल भारत ही नही पूरे विश्व के करीब पचास से अधिक देश कोरोना वायरस के शिकार हो चुके हैं । चीन और इटली में हजारों मौत होने के बाद अब भारत इस परिस्थिती से गुजर रहा है । भारत में भी अभी तक कई मौतें हो चुकी है, ना जाने आगे और कितनी होगी…

Read More

सोनम-राजा रघुवंशी की कथा ने हिला दिया समाज

राजनीतिक सफरनामा कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सोनम और राजा रघुवशी की कहानी ने आम लोगों को चिन्तित कर दिया है । लगातार घट रही ऐसी घटनाओं से समाज का चिन्तित होना जायज भी है । ऐसा भी अनुमान लगाया जा सकता है कि बहुत सारी ऐसी घटनायें भी होतीहोगीं जो समाज के सामने नहीं आ पा रहीं…

Read More

गीतिका (गज़ल)

तेरे होंठों की चंचल हंसी से मेरेदिल में फूलों के जैसे चमन खिल गयेतेरी बाँहों में सिमटी तो ऐसा लगामेरे पहलू में धरती गगन खिल गये तेरी धड़कन में धड़कन मेरी खो गयीदेह अधरों से पावन मेरी हो गयीयूँ संवारा मुझे प्रीत की रीत नेशब्द के भाव से सब वचन खिल गये दो बदन प्रेम…

Read More

‘सबका विश्वास’ की ओर सशक्त कदम तीन तलाक बिल हुआ पास

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) कभी कभी हम देखते,सुनते और पढ़ते हैं कि ज्योतिषीय गणना / आंकलन के अनुसार आज का दिन बहुत पावन है क्योंकि आज ग्रह–नक्षत्रें का एक अद्भुत एवं सुखद संयोग बन रहा है । ज्योतिष को मानने वाले उत्साहित हो जाते हैं, विशेषकर वे जिनकी राशि में वह संयोग लाभकारी सिद्ध होने…

Read More

“चलो तस्वीरें बनाए”

पारमिता षडगीं जिंदगी जिंदगी को बुला रही थी मेरे भीतर के खालीपन में रात भी थोड़ी थोड़ी मेरी नींद को चुराने लगी थी तुम्हारे भीतर व्याप्त रहने की इच्छा जो अनदेखी थी जो अनसुनी थी मेरे अकेलेपन के आतुर स्वर आकाश को खंड खंड कर पिघलने लगे थे आत्मा की उपत्यका में एक नदी बहने…

Read More