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कॉफी की खोज : लक्ष्मी कानोडिया

       कॉफी का एक कप हमें ताजगी, स्फूर्ति और शक्ति देता है। यह खुशबूदार सुगंध मेरा दिन बना देती है। कॉफी एक गर्म और ठंडा पेय पदार्थ है और इससे जिनमें किसी भी समय लिया जा सकता है। इसमें कैफीन काफी मात्रा में पाया जाता है।        सुबह आराम करते हुए जब मैंने कॉपी भी…

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भारत ने युद्धग्रस्त गाजा की स्थिति पर ‘चिंता’ व्यक्त की

भारत ने गाजा में युद्ध को “बड़ी चिंता” का विषय बताते हुए सोमवार को कहा कि संघर्षों से उत्पन्न मानवीय संकट के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है जो सबसे अधिक प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा…

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स्योरिटी

                 रूपा के काॅलेज की छुट्टियाँ चल रही थीं। उसने सोचा की खाली समय में खाली बैठने से अच्छा है की कुछ काम ही कर लिया जाये।एक सहेली से बात करके दोनों ने एक प्राइवेट स्कूल में बात की और  फिर इन्टरव्यू के बाद  दोनों का ही उसी स्कूल में सैलेक्शन हो गया। दोनों ने…

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कितनी कड़वी हैं सच्चाइयाँ

कितनी कड़वी हैं सच्चाइयाँ गिर रहीं नीचे ऊँचाइयाँ कोयलों के बाइक कंठस्वर चढ़ी नीलाम अमराइयाँ  बद हुये मौसमों के चलन हुयीं गुमराह पुरवाइयाँ  दिन ढले घर में अहसास के स्यापा करती हैं तनहाइयाँ आदमी कद में बकमतर हुआ बढ़ गयीं उसकी परछाइयाँ गिरना तय है जिधर जायेंगे उधर खंदक इधर खाइयाँ होश आयेगा ‘महरूम’ जब…

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मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान

मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं, श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम के सीमित घंटे, सम्मानजनक वेतन और श्रम अधिकारों की लड़ाई लड़ी। लेकिन भारत जैसे देशों में मजदूर…

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कर्मवीर काशी के’ एवं श्री शंकर वाचनालय का लोकार्पण

31 अक्टूबर, 2022 “पुस्तकें और प्रकृति मनुष्य के दो आवश्यक सहचर हैं। पुस्तकें मनुष्य को शिक्षित करते हुए उसके आचरण का भी निर्माण करती हैं। आज के डिजिटल युग में भी छपी हुई पुस्तकों का महत्त्व है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान का संचार करती हैं।” ये बातें कहीं लेखक-समीक्षक डाॅ. अशोक कुमार ज्योति ने। ग्रामीण क्षेत्रों…

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जीवन क्रिकेट खेल

अनिश्चितता मूल में जीवन क्रिकेट खेल फाइनल उनके बीच में जो करते थे ट्रेल जो करते थे ट्रेल, लीग टेबल में नीचे अब वो सब से आगे, और सब उनके पीछे ‘यश’ मत होय निराश तू , व्यर्थ लगा कर होड़ जीवन लंबी रेस है, बस तू केवल दौड़ और जिन्होंने लीग तक, किया विश्वकप…

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  क्रिकेटमय हो चुका है भारत

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव भारत में चुनाव और क्र्रिकेट का बुखार चढा है । बहुप्रतीक्षित विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन भारत में हो रहा है । वैसे भी भारत में क्र्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है ही तो जब विश्वकप हो रहा हो तो फिर आम आदमी को तो इस खेल से जुड़ना ही है सो जुड़ चुका…

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हौसले

अड़चने हों हजारों राह में तेरे साथी हौसलों को कभी कम नहीं होने देना। काटकर गिरि को राहें बनाई हैं तुमने बाँध सागर को जग को दिखाया कभी। चाँद मंगल की सरहद भी लांघा तुमने गहराई पयोधर की भी है नापा सभी। देव दानव सभी करते तेरी ही बड़ाई दुष्करों से आँखें नम तू नहीं…

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विकार

समाज सहता प्रहार इतने  बहुत जगह वे गड़े मिलेंगे ।  कहीं खुले तो छिपे कहीं पर  दुखी हृदय भी पड़े मिलेंगे ।।  सदा रहा आन बान जग में  सभी तरफ घोष थी जय जय।  पड़ा उसी पर कभी अँधेरा  किताब में वह जड़े मिलेंगे।।  कभी अँधेरा कभी उजाला  चले सतत यह समय निरन्तर।  समय सदा…

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