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कोरोना को हराना है

चाहे छाये हर और सूनापन,मिलना हो जाये एक दूजे से कम। कितना भी मन घबराए,चाहे कितनी भी दहशत बढ़ती जाए।  *करना है एक ही प्रण,किसी भी तरह कोरोना को हराया जाए।*  व्यवसाय कैसे चल पाएंगे और अब कैसे बच्चे पढ़ पाएंगे। चाहे कितनी भी विपदाएं आये,घर मे मन कितना भी घबराए।  *करना है एक ही…

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सिर्फ लूटते हैं फर्जी ट्रैवल एजेंट, एजेंसी और वेबसाइट

भारत में, हाल ही में धोखाधड़ी करने वाली ट्रैवल एजेंसियों में उछाल आया है जो अयोग्य व्यक्तियों को विदेश भेजने का वादा करती हैं। भले ही बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन निस्संदेह अभी भी बड़ी संख्या में लोग धोखाधड़ी से काम कर रहे हैं। अवैध छुट्टियों के पैकेज, पंजीकरण धोखाधड़ी…

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नारी सशक्तिकरण से विकास के खुलते द्वार

वन आर्थिकी को सशक्त करने के लिए सुदूर गांवो तक पहुंचा रहे बाजार की खबर पढ़ी | महिलाओं के जीवन में समृद्धि लाने के वनोपज एकत्र करने के बाद उत्पाद बनाकर बेचने का कार्य वन के समीप बसे  समुदाय के लिए वनोपज आजीविका का साधन एवं नारी सशक्तिकरण को एक नई दिशा देगा | कुछ दिनों पूर्व आनलाइन…

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नजरिया

हां मन उदास होता है यह देखकर कि आपको बाहरी रूप में देखकर आपके अंदर के इंसान को बाहर आने के पहले ही मार दिया जाता है। जिनकी सोच जिनकी धारणा बन जाती है वह स्वयं नहीं जानते ना ही कोशिश करते हैं समझने की उनको वही सही लगता है जो दिखाई देता है। अनेकों…

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घर वही,जहाँ बुढ़ापा खिलखिलाये

किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर मे बुजुर्ग सन्तुष्ट व प्रसन्नचित्त रहते हैं,वह घर धरती पर स्वर्ग के समान है,परन्तु आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में उत्पन्न व्यवहारिकता व आपसी सामंजस्य व  घटती सम्मान की भावना के कारण ऐसा स्वर्ग अब अपवाद का रूप लेता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में…

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किसी महासमर से ‘कॉरोना’ है कम नहीं

Doctor Sudhir Singh किसी महासमर से’कोरोना’ है कम नहीं,संपूर्ण  मानव-जाति को उससे लड़ना है.पुरुषार्थी योद्धा को  संयम और युक्ति से,महायुद्ध कोअब जीतकर ही दम लेना है.दुनिया का प्रत्येक इंसान महान योद्घा है,युद्ध के कौशल से कोई नहीं अनजान है.कंधा से कंधा मिलाकर कर  लड़ लेने से,‘कोरोना’ को हराना बिल्कुल  आसान है.जाति-धर्म-सरहद का भेद-भाव भूल कर,आइए!महामारी…

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चले जा रहे हैं

फिर वही दहशत है, फिर वही आलम, प्रवासी मजदूरों का   घर  को पलायन बड़ी  बेबसी दिख  रही  हर  तरफ   है न  दिन-रात की उनको चिन्ता सताती चले जा रहे  …   … वे चले जा रहे हैं। किधर तुम,  कहाँ जा  रहे   मेरे   भाई रुको तुम वहीं, अपनी हिम्मत न  हारो कुछ धीरज धरो,घर में हो…

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व्यंग्य –  मनुवाद के खिलाफ खड़े निठल्ले ..!

भारत में विचारधारा के खींचतान में आजकल कई समाज लहालोट है । जब भी कोई सफल व्यक्ति कही सफलता पाए नजर आता है तो उसे ये निठल्ले जातिवादी समाज वाले अपनी जाति में खीच कर उसकी सफलता को चीड़ फाड़ देते है । अब बात करें ऐसे निठल्ले घिन्नरबाजों की तो अब मंडल बंडल जैसे…

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डरना नही

  मुसीबतें तो  आएगी   पर फिसलना तुम नहीं।   जिन्दगी तो ये सतायेगी   मगर तुम डरना  नहीं।  बड़े बड़े चले आते यहां  कष्टों केभी पहाड़ कभी।  दोस्ती को भुला कर के  साधते हैं दुश्मनी सभी।  लेता है जीवन परीक्षाएं   कभी तो बड़ी से बड़ी।  जूझते रह जाते उनसे  अड़चनें जो आन पड़ीं।  जिन्दगी…

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शिक्षक दुष्यन्त कुमार को लेखन में मिला अन्तरराष्ट्रीय सम्मान

नेपाल सरकार द्वारा पंजीकृत अंतरर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल” द्वारा 8 मार्च 2024 को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में आयोजित की गई अन्तरराष्ट्रीय “महिला शक्ति कविता प्रतियोगिता” में अपनी कविता “मैं वर्तमान की नारी हूं।” के माध्यम से उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के गांव तरारा के लेखक कवि एवं…

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