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कमी अपनी परवरिश में

मालती ने आज पूरा घर फिर सर पर उठा रखा था। ससुर जी के खत्म हो जाने के पश्चात यह अब आम बात हो गई थी। मालती की सास दयावती खून का घूंट भरकर रह जाती। मालती अपनी छोटी बहन को पढ़ाई करने के लिए अपने साथ रहना चाहती थी लेकिन घर पर जगह उपलब्ध…

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माँ

माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में नव मास उदर में तूने पालादुःख सहकर भी मुझे संभालासौ बार न्योछावर तू हो जातीमेरी मीठी मीठी मुस्कानों मे,माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में ।।1।। मैं हंसता हूं तू हँसती हैमैं रोता हूँ तू रोती है।मेरा संसार सजाती तुमअपने…

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बुद्ध का सदियों का सफर

जैसे-जैसे बौद्ध दर्शन समय के साथ-साथ बदलता गया, वैसे-वैसे बौद्ध कला भी बदलती गई। परंपरा के शुरुआती दौर में, बुद्ध को कभी भी मानव रूप में नहीं दिखाया गया। बल्कि, उनकी उपस्थिति को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। पैरों के निशान, एक बोधि वृक्ष या यहाँ तक कि एक साधारण पगड़ी – ये उनकी छवि…

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जो जहां हैं वहीं पर रुक जाएं

Doctor Sudhir Singh जो जहां हैं वहीं पर रुक जाएं,‘होम शेल्टर’ का  सहारा ले लें.घर-गांव आने की  हड़बड़ी में,‘कोरोना’का खतरा बढ़ने न दें.सबों की  अपनी जिम्मेवारी है,उससे  हमलोग मुँह  नहीं मोड़ें.देश आपात स्थिति में खड़ा है,हर प्रकार से सब सहयोग करें.वक्त कभी  भी ढहरता नहीं है,आकर तेजी से  गुजर जाता है.‘कोरोना’ भी जाएगा जरूर ही,जागरुक…

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सावधान सावधान वोटर मौन है ! -कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

चुनाव चल रहे हैं भले ही केवल दो राज्यों के चनाव हों पर माहौल वैसा ही है, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप वाला । वैसे ऐसी अंत्याक्षरी न हो तो मजा भी नहीं आता, हमें भी आदत सी बन गई है । चुनाव घोषित होने के पहले ‘‘तू चल मैं आया’’ वाले आवागमन को देखने की…

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“हम क्या करें”

चुग रहे थे हम गुल हाथ में चुभा कांटा गिरा साजी से फूल    थी  मेरी  ही भूल      हम क्या करें थे खयालों में मशगूल। उठा ज़मीं से धूल चेहरा हो गया धुले-धूल      हम क्या करें। बच कर थे हम चल रहे हौसला से थे हम बढ़ रहे बिछा था पग-पग पर शूल…

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हे शिव

हे शिव शम्भू नमः शिवाय् ,   जगपालक जगत विधाता ।    दुर्गापति जय जनक गणेश के,     स्कन्द पिता जय नमः शिवाय् ।        वैद्यनाथ, संहारक दुर्जन के तुम,          हे केदारनाथ जय नमः शिवाय् ।            त्रिपुरारी शंकर गंगाधर प्रभु जी ,             जय त्रिनेत्र ओउम् नमःशिवाय् ।    हे भोले भंडारी जगपति…

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“गिरते पुल, ढहती ज़िम्मेदारियाँ: बुनियादी ढांचे की सड़न और सुधार की ज़रूरत”

वडोदरा में पुल गिरना कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि भारत के जर्जर होते बुनियादी ढांचे की डरावनी सच्चाई है। पुरानी संरचनाएं, घटिया सामग्री, भ्रष्टाचार और निरीक्षण की अनुपस्थिति — यह सब मौत को दावत दे रहा है। राbजनीतिक घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन टिकाऊ निर्माण और जवाबदेही की योजनाएँ नदारद हैं। अब वक़्त है…

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उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र) एवं वेबपोर्टल में आपका स्वागत है

आदरणीय मित्रो अनुराधा प्रकाशन द्वारा संचालित उत्कर्ष मेल ‘राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र’ जिसमे साहित्यिक रचनाओ के साथ साथ राजनितिक गलियारों में क्या उथल पुथल हुई अथवा सामाजिक समस्याओं का मानवीय आधार पर चितन मनन प्रस्तुत किया जाता है , बड़ी प्रसन्नता के साथ आपसे साझा कर रहे हैं की ‘उत्कर्ष मेल’ राष्ट्रिय पाक्षिक समाचार पत्र को…

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अग्निपथ योजना से अनगिनत मेहनती युवाओं के सपने हुए बर्बाद : राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अल्पावधि सैन्य भर्ती कार्यक्रम अग्निपथ को लेकर शनिवार 30 दिसम्बर को केंद्र की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अनगिनत मेहनती और होनहार युवाओं के समर्पण तथा सपनों को बर्बाद कर दिया है। गांधी ने युवाओं से अपनी मुलाकात पर कहा, ‘‘ये युवा अपना संघर्ष बयां करने के…

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