तांटक छन्द
दुख में दीनानाथ हमेशा, साथ खड़े हो जाते हैं। होते वही सहायक सबके, काम सभी के आते हैं। आता है जो जीव शरण में,भवसागर तर जाता है। दयासिंधु के धाम सहज ही, मानव वह जा पाता है। जपले हरि का नाम सखी री, माया एक झमेला है। चारदिनों का जीवन खाली, बस इतना ही खेला…
