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बढ़ते हुए तलाक कर रहे सामाजिक ताने-बाने ख़ाक

पश्चिमी मीडिया और वैश्वीकरण के प्रभाव ने भारतीय समाज की प्रेम और रिश्तों की धारणा को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी पारंपरिक पारिवारिक अपेक्षाओं की तुलना में व्यक्तिगत खुशी और अनुकूलता को प्राथमिकता देने लगी है, जिसके कारण जब उनकी शादी में संतुष्टि नहीं मिलती है तो वे तलाक को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप…

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(व्यंग्य) मेरी भाषा मेरा देश अभियान की अनसुनी कवर स्टोरी..!

आजकल  भाषा की जंग मची है तो सोचा मै भी बहती गंगा में हाथ धो लूं क्योंकि मेरी भाषा वैसे भी ओवैसी टाईप की है । भारत में जी 20 सम्मेलन और भारत बनाम इंडिया के बीच महासंघर्ष जारी है और इस लड़ाई में सबको एक पक्ष की तरफ से जरूर लड़ना ही होगा ।…

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पूजहि विप्र सकल गुण हीना । शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा ।।

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक़ एवं पत्रकार जौनपुर, यूपी  रामचरित मानस में बाबा तुलसीदास कहते है कि पूजहि विप्र सकल गुण हीना । शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा ।। औऱ वही मनु स्मृति कहती है कि-  अष्टापाद्यं तु शूद्रस्य स्तेये भवति किल्बिषम्। षोडशैव तु  वैश्यस्य  द्वात्रिंशत्क्षत्रियस्य च॥ ब्राह्मणस्य  चतुःषष्टिः पूर्णं वापि शतं भवेत्। द्विगुणा …

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क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। “दामन की प्रतिष्ठा” अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और…

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हैं नमन उनकों जो इस देश की खातिर जिए …!

आजादी का अमृत वर्ष और अब 75वे स्वतंत्रता दिवस पर देश को आह्लादित करने वाला लोकतंत्र निश्चित ही भारत के गौरवशाली इतिहास को उकेरे पर परतंत्रता के विरुद्ध निरंतर एक हजार वर्षों तक सशस्त्र संघर्ष करने के फलस्वरूप अंततः हमारा अखंड भारतवर्ष दो भागों में विभाजित होकर ‘स्वतंत्र’ हो गया। गुलामी की जंजीरों को तोड़…

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डिज़ीज़ फ़्री इँडिया

कविता मल्होत्रा शक्ति, पावर, सत्ता का, आजकल हर तरफ बोलबाला है एक दूजे से आगे निकलने की होड़, हर मन का निवाला है ✍️ ये पश्चिमी सभ्यता के गहन प्रभाव का ही परिणाम है, कि आजकल समाज में विशिष्ट दिवस मनाने का प्रचलन है, जो तथाकथित आधुनिकता की देन है।कभी मातृ दिवस कभी पितृ दिवस…

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गण और तंत्र की बढ़ती दूरी

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सर्वजन हिताय, सर्वजन रक्षाय और सर्वजन सुखाय की भावना से निहित एक सार्वभौमिक संविधान की छाया के तले बहुभाषी, बहुजातीय, बहुधर्मावलंबियों का समूह स्वच्छन्दता और निर्भीकता के साथ जीवनयापन कर रहा हो वह गणतंत्र अपनी माधुर्य मुस्कान के साथ अपना 73 वां दिवस मनाने जा रहा है । स्तुत्य तो होगा ही ।…

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महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे

(पुरुषों के गढ़ तोड़ने वाली “प्रथम महिलाओं” को पहचानने की आवश्यकता) कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियुक्तियों के नवीनतम दौर के साथ पहली बार रेलवे बोर्ड में महिलाएँ ड्राइवर की सीट पर हैं। कांच की छत को तोड़ते हुए, रेलवे बोर्ड का नेतृत्व पहले से ही एक महिला द्वारा किया जा रहा है, अब संचालन और व्यवसाय…

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‘साहस, समर्पण और असाधारण सेवा का प्रतीक’, BSF के स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर जवानों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. रविवार यानी आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी ने कहा “बीएसएफ साहस, समर्पण और असाधारण सेवा का प्रतीक है और यह हमारी सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण पंक्ति के रूप में खड़ा है” उन्होंने…

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किसान

  अन्न उपजाता है जगत हित   वह जग के लिए वरदान है।   कृषक अपने श्रम से करता   जगतपोषण का अवदान है।    अन्न मोती के लिए किसान     लू के झोंके से भी लड़ता।    गेहूं की बालियों के लिए    सघन शीत लहरों में अड़ता।    क्षुधापूर्ति होता है जग का…

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