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पत्रकारिता : चुनौती एवं भविष्य : विजय गर्ग

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर यदि सामाजिक सरोकार रखने वाली निष्पक्ष पत्रकारिता तथा पीत पत्रकारिता के बारे में बात न हो,तो हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्वत्ता का आंकलन नही किया जा सकता। वर्तमान परिदृश्य में पीत पत्रकारिता की प्रबलता और स्वार्थसाधनी राजनीति निजी महत्वकांक्षा के चलते पत्रकारिता मिशन न रहकर व्यवसाय बन चुका है।…

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चंदा मामा दूर के और पुआ पकाये गुड़ के

चंदा मामा दूर के और पुआ  पकाये गुड़ के,आप खाये थाली में नूनू को दिए प्याली  में।बच्चे को सुलाने के लिए मैया लोरी गाती है,गजब की मिठास  है सरस संगीत लहरी में। लोरी का मधुर स्वर जब  भी मुन्ना सुनता है,मैया की गोदी में वह  तुरंत  ही सो जाता है।सो जाने पर भी जननी सदा…

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ममता का साथ छोड़ते नेता

 कुशलेन्द्र श्रीवास्तवओह ! टीएमसी ‘‘क्षणभंगुर जीवन’’ जैसी बरबाद हो गई । कोई भी क्षेत्रीय दल चुनाव हारने के उबाद भी इतने जल्दी खत्म नहीं होती  । अप्रेल माह मेे जोर-जोर से चिघाड़ रहे टीएमसी के नेता, जिस भाजपा कों कोस रहे थे अब उनकी तारीफ करते हुए उनके पाले में बैठे दिखाई दे रहे हैं…

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सुनाते रहे

खामियां, खामियां तुम गिनाते रहे। बेवजह ही हमें, तुम सुनाते रहे।। हो हमारी ख़ता, या तुम्हारी ख़ता। हर दफा ही तुम्हें, हम मनाते रहे।। माना आवाज में मेरी जादू नहीं। गीत तेरे लिए फिर भी गाते रहे।। अंधा कानून है, सुनते हम आ रहे। न्याय अंधों से हम क्यों कराते रहे। अपने महबूब को चाँद…

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मेरे हनुमत तेरा शुक्रिया है

मैंने मांगा वो तूने दिया हैमेरे हनुमत तेरा शुक्रिया है। मुझको अपनों ने जब जब गिराया,तूने बाहों में भर कर उठाया। मुझको हर पल सहारा दिया है,मेरे हनुमत तेरा शुक्रिया है। बाबा तेरी शरण में मैं आया,तूने उजड़ा मेरा घर बसाया। मन के मधुबन को महका दिया है,मेरे हनुमत तेरा शुक्रिया है। मैं तो मन…

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विवाह के बदलते रूप  : डॉ. विजय गर्ग 

माज में समय के साथ कई रीति-रिवाजों और परंपराओं में बदलाव आते रहते हैं। विवाह भी एक ऐसा संस्कार है जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है। लेकिन आधुनिक युग में विवाह का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पुराने समय की शादी पहले…

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डिजिटल युग में हिंदी : उमा त्रिवेदी

(14 सितंबर – हिन्दी दिवस पर विशेष) तकनीक की नई जुबां और बढ़ती पैठ​”निज भाषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल।बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल॥”“भारतेंदु हरिश्चंद्र”​एक दौर था जब यह आशंका जताई जाती थी कि अंग्रेजी और आधुनिक तकनीक के बढ़ते वर्चस्व के बीच हिंदी कहीं पीछे न छूट जाए। लेकिन डिजिटल…

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गंतव्य संस्थान द्वारा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान समारोह आयोजित किया

मकर सक्रांति (15 01 2024 ) के शुभ अवसर पर गंतव्य संस्थान द्वारा वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह  का आयोजन संस्थान के मुख्यालय 368, प्रधान मार्ग , निरंकारी कालोनी, दिल्ली- 9 पर किया गया जिसमे धीरपुर क्षेत्र के 50 महिला व पुरूष बुजुर्गों को सम्मानित किया गया । धर्मगुरु परम् श्रधेय पं चन्द्र वल्लभ बुडाकोटी जी…

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जो तेरी रज़ा मेरी भी वही

श्रीमती कविता मल्होत्रा (संरक्षक – उत्कर्ष मेल) Your mercy is my social status -Guru Nanak परिचय इतना इतिहास यही जो तेरी रज़ा है मेरी भी वही ✍️ निर्बाध गति से तो केवल प्रकृति का दरिया बहता है, मानव जाति तो मात्र उस गति की ताल से अपनी ताल मिलाने का प्रयास किया करती है।जीवन का…

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