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साहित्य और समाज में अपना नाम रौशन करते रहे

।। जन्म दिवस पर शुभकामना सन्देश।। लाल बिहारी लाल जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाये हमारे प्रिय मित्र, कवि गीतकार, पत्रकार, पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सच्चे सलाहकार और लाल कला सामाजिक एवं सांस्कृतिक मंच के महासचिव भाई लाल बिहारी “लाल” जी अपनें जीवन के 48 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।…

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तू चल मैं आया ! : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा                                                                          चलो कपिल सिब्बल भी चल दिए दूसरे घर की ओर उन्हें राज्यसभा मेें जो जाना था । कुर्सी चाहिए जहां मिल जाए । नेता तो रमता जोगी बहता पानी जैसा होता है । आज यहां कल कहां उसे खुद ही नहीं मालूम होता । कुर्सी चाहिए, वे बगैर कुर्सी के नहीं रह सकते…

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लाॅकडाउन

                 इलाहाबाद यानी प्रयागराज अपने आप में एक सम्पूर्ण और गौरवशाली नगरी रही है। महानगरों की तुलना में बिल्कुल शांत शहर मगर शिक्षा के क्षेत्र में उनसे कहीं आगे।यह शहर प्रतिभाओं की नगरी भी कहा जाता है। किसी समय यहां बाहरी लोग भी यदि पानी मांग लें तो उन्हें पानी के साथ साथ कुछ मीठा…

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ये चाक जिगर के सीना भी जरूरी है

ये चाक  जिगर के सीना  भी जरूरी है कुछ रोज़ खुद को जीना  भी जरूरी है ज़िंदगी रोज़ ही नए कायदे सिखाती  है बेकायदे होके कभी पीना भी जरूरी है सब यूँ ही दरिया पार   कर जाएँगे क्या सबक को डूबता सफीना भी जरूरी है  जिस्म सिमट के पूरा ठंडा न पड़  जाए  साल में …

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सोच बदलनी होगी।

गीता—अध्याय3 श्लोक5 न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठतिकर्मकृत। कार्यते ह्यवशःकर्मसर्वःप्रकृतिजैर्गुणैः।। श्लोक का दूसरा पद द्रष्टव्य है जिसमें इंगित है कि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृतिजनित गुणों द्वारा परवश हुआ कर्म करने को बाध्य किया जाता है।इसी सन्दर्भ में एक अन्य श्लोक है– नियतं कुरु कर्म त्वम कर्म ज्यायो ह्यकर्मनः। शरीर यात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः।।–श्लोक-8 –तू…

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“बदलता समय” लघु कहानी— संदीप तोमर

“बदलता समय” लघु कहानी— संदीप तोमर अर्धवार्षिक परीक्षाएं अभी-अभी खत्म हुई थी। सभी अध्यापकों ने अपने-अपने विषय की कापियों की जांच करके बच्चों को मार्क्स दिखाने शुरू कर दिए थे। जैसे ही मिस्टर मेहता ने विज्ञान की कॉपी जाँची, वे एक हाथ मे बंडल उठाये दूसरे हाथ से अपनी छड़ी टिकाते हुए दसवीं कक्षा में…

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संतोष (लघुकथा)

    शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…

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पशु चिकित्सा को चिकित्सा की जरूरत

 सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही नये पशु अस्पतालों का निर्माण और उनमें आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता,हर पशु का बीमा, खण्ड स्तर पर पशु धन मेलों का आयोजन और पालकों को हरसंभव मदद मुहैया करवाकर उन्हें दूध का सही दाम…

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एलोपैथ का टूटता तिलिस्म, आयुर्वेदिक काढ़ा बना लाईफलाइन !

आयुर्वेदिक संस्था के रूप में पतंजलि आज वर्तमान समय में सर्वाधिक प्रचलित प्रतिष्ठान है जो भारत के एलोपैथ को तगड़ा टक्कर दे रहा । भारत समेत वैश्विक व्यापार और बाजार में पतंजलि आयुर्वेद का  सबसे अग्रणी निर्यातक है । अभी हाल ही में बढ़ते करोना संकट में जहां एक तरफ एलोपैथ से सुसज्जित हाईटेक अस्पतालों…

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“मन के हारे हार है”

मन को कर तू शक्तिमय,ले हर मुश्किल जीत।      काँटों पर गाना सदा,तू फूलों के गीत।” मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख- दु:ख,आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं । वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित होती…

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