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विश्व परेशान : भारत में समाधान

 आज पूरा देश ही नहीं अपितु पूरा विश्व मंथन में है किस प्रकार कॉरॉना की समस्या   से निपटा जाये, कैसे इसका कोई हल मिलेगा ।*परेशान विश्व के लिए राहत की खबर है* कि *महामंडेश्वर ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी* कारोना को समाप्त करने के लिए प्रमाणित शास्त्रोक्त सत्य और इसका निश्चित समाधान प्रदान करेंगे। *ब्रह्मऋषि…

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कोहराम

कैसा मचा ये कोहराम फिर से दम तोड़ रही साँसे हो मजबूर कहीं इलाज की कमी कहीं लापरवाही हावी मौत हो या ज़िन्दगी दोनों बस लगी हैं कतार में कितनी भयावह हो गये हालात जहां तक नज़र जाए बस खौफ़, बेबसी, लाचारी है ये कोहराम कैसा जहां जितनी मजबूर ज़िन्दगी उतनी ही मौत भी जितना…

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कोरोना

फोकट में काहे का रोना। बड़ा नही है ये बगरौना।। अगर प्यार परिवार से है तो घर के बाहर पांव धरो ना।। नाक आँख मुंह टच मत करना। बार-बार हाथों को धोना।। देखो लॉकडाउन ना टूटे। जबरन घूमो, व्यर्थ मरो ना।। सामाजिक डिस्टेन्स बनाओ। बीच में आकर यार धसो ना।। बाहर जाओ मास्क लगाओ। भीड़भाड़…

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खुशी-एक सामूहिक जिम्मेदारी

“असफलता” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। सदियों से बुद्धिमान लोग यही कहते आए हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने स्पष्ट रूप से कहा था, “…असफलता का अर्थ है “सीखने का पहला प्रयास”। कलाम जी की इस परिभाषा को मुझसे बेहतर शायद कोई और व्यक्ति नहीं अपना सकता। 21वीं सदी की शुरुआत में अपने गृह…

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पृथ्वी का मौन

आज बैठी हूँ मैं उदास लिखने जा रही हूँ कुछ खास इस महामारी के चलते लोग नहीं हैं आसपास किसी ने नहीं सोचा था कि कोर्इ समय ऐसा आयेगा, इन्सान इन्सान से मिलने के बाद पछितायेगा। कैसे हैं आज के समय के फसाने, लोग ही लोगों को लगे हैं डराने। क्या यह हमारी गलती है…

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सुअवसर पर

समर्पित चंद पंक्तियां:- डॉक्टर सुधीर सिंह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर,योगऔर ध्यान का सबलोग दृढ़-संकल्प लें।संयमित रहते हुए प्रतिदिन योगासन करके,स्वयं को स्वस्थ, सुखी और प्रसन्नचित रखें। मस्ती के साथ  नियमानुसार योग करने से,साधक काआत्मविश्वास सुदृढ़ हो जाता है।योगासन हमें सिखाता हैअनुशासित रहना,सकारात्मक सोच का दायरा  बढ़ा  देता है। सबों का लक्ष्य रहे,…

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जो बाल्कनी हमें मिली थी

जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…

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साहित्य की अदालत।
कचहरी मे रीमा सिंन्हाजी ने लगाई हाजिरी।।

साहित्य की अदालत। साहित्य की कचहरी। अब देना होगा जवाब ।साहित्यकारों को भी, क्या लिखते हैं? क्यों लिखते हैं ?क्या है उनकी समाज के प्रति जवाबदेही??समाज के वर्तमान समय में साहित्य के प्रति अभिरुचि क्या है। आज के साहित्यकारों का रुझान कैसा होना चाहिए साहित्य के प्रति।ऐसे ही कुछ ज्वलंत प्रश्नों को लेकर शुरू की…

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ग़ज़ल : डा. अफ़रोज़ आलम- कुवैत

अत्तार के मस्कन में ये कैसी उदासी है सोने की मुक़ाबिल में हर सम्त ही मिट्टी है तू साहब-ए-क़ुदरत है तू अपना करम रखना सहरा की तरफ़ माइल हालात की कश्ती है रौशन है दरख़्शाँ है ये दौर ब-ज़ाहिर तो मज़दूर के बस में तो बस रीढ़ की हड्डी है लम्हों की तआ’क़ुब में सदियों…

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पेगेसस से भी खतरनाक अवसरवादी नेता

ब्राह्मण सम्मेलन क्युकी ब्राह्मणों को उलझाना है । ईद पर टोपी क्युकी मुसलमानों को टोपी पहनाना है ,ये सब नेताओं का चाल चरित्र है । ये नेता तो इतने गिरे है कि डकैत फूलन देवी तक को माला फूल पहनाकर सोशल मीडिया पर परोश रहे , उससे भी ज्यादा शर्मनाक रहा जब मियां खलीफा की…

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