अनुराधा प्रकाशन का पाँच साझा संकलन,
डॉक्टर सुधीर सिंह अनुराधा प्रकाशन का पाँच साझा संकलन, राष्ट्रभाषा हिंदी हेतु सचमुच अमृत-कलश है. जिसके लोकार्पण के अवसर पर आयोजित, सजाया हुआ इंद्रधनुषी साहित्य-महोत्सव है. समर्पित साहित्यकारों ने हिंदी-साहित्य को, अपनी लेखनी से तहेदिल से खूब संवारा है. लोगों ने सुना और सुनाया बहुत ही चाव से, माँ वीणा वादिनी की ही सब महती…
फागुन का ये मौसम है
बृज छोड़ के मत जइयो,फागुन का ये मौसम है,मोहि और न तरसइयोफागुन का ये मौसम है। मैं जानती हूं जमुना तीर काहे तू आए,हम गोपियों के मन को कान्हा काहे चुराए, जा लौट के घर जाइयो,माखन चुराके खाइयो,पर चीर ना चुरइयो,फागुन का ये मौसम है। इस प्यार भरे गीत के छंदों की कसम है,तोहि नाचते…
गीतकार अनिल भारद्वाज काव्य कौस्तुभ सम्मान से सम्मानित
ग्वालियर,साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, नवांकुर साहित्यिक मंच सीतापुर के तत्वाधान में मध्य प्रदेश ग्वालियर के वरिष्ठ गीतकार व हिंदी सेवी साहित्यकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट को काव्य कौस्तुभ सम्मान 2024 से सम्मानित किया गया है।गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान हिंदी साहित्य में उल्लेखनीय योगदान और वरिष्ठ हिंदी सेवी साहित्यकार, एवं साहित्य सृजन के प्रति…
नवरात्रि विशेष : असुर मारि थापहिं सुरन्ह, राखहिं निज श्रुति सेतु
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर सनातन में चैत्र नवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इस अवधि में पूजा-पाठ के साथ-साथ सुख-समृद्धि के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक वर्ष भर में पढ़ने वाले चारों नवरात्रि में देवी का आगमन पृथ्वी लोक पर होता है, चार…
राष्ट्रभक्ति का प्रतीक ‘‘वंदे मातरम्’’
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर की तनातनी देखने को मिलने लगी है । उत्तर प्रदेश की एक बाबरी मस्जिद की जंग शदियों तक चली अब दूसरी बाबरी मस्जिद की जंग प्रारंभ हो गई है । राजनीति अपनी जगह है पर देश का सांप्रदायिक सद्भाव…
जाना कहाँ है जब हर तीर्थ यहाँ है
कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) मौसम ख़ुश्क,हर सू धुँआ-धुँआ है असामयिक विदाइयाँ,सदी का बयाँ है क्रंदन मुखरित,आज ख़ामोश हर ज़ुबाँ है मानव गंतव्य भ्रमित,नकारात्मकता जवाँ है चंद धड़कनों की तलब में,प्यासा हर रोआँ है ✍️ आज हर तरफ, हर दिल की अशाँति के मुखरित पन्नों पर ओम शाँति के हस्ताक्षर दर्ज़ हो रहे…
भाषा का सम्मान विदेशियों से सीखिए ।
विदेशियों से अपनी भाषा की इज़्ज़त कैसे की जाती है ? यह हमें सीखना होगा। सिर्फ ” हिंदी हैं हम, वतन हैं , हिन्दोस्तां हमारा ” गाने से कुछ नहीं होगा। विदेशों में संडास साफ करने वाला भी अंग्रेज़ी बोलता है और भारत में बोलने का स्तर अमीर गरीब बनाता है। बड़े आदमी अंग्रेज़ी बोलेंगे…
धीरे – धीरे हम भारतीय संस्कृति को स्वयं नष्ट करते जा रहे..!
ग्रामीण क्षेत्रों में माहौल बदल रहा और अब आधुनिकता के नाम पर जो कुसंस्कृति कभी शहरों की पहचान मानी जाती थी अब गांवों में पैर पसार चुकी है । आधुनिकता के नाम पर जमकर अश्लिलिता परोसी जा रही और इसका लुत्फ घर के सभी सदस्य उठा रहें । अगर बात करें शादी विवाह में बढ़ते…
सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,
डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख मांगकर भूख मिटाता है। जिसकी आदत भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में बेनकाब…
