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देश की समस्याओं का नीतिगत हल जरूरी !

दुर्भाग्य है कि आजकल सत्ता से असहमत होने के अधिकार से जनता को वंचित करने की लगातार कोशिश की जा रही । किसान आंदोलन के नाम पर सरकार अपने विरोधीयों को देशविरोधी साबित कर भारतीय संविधान  के असहमति और तर्क के सौंदर्य की हत्या करने एवं संविधान में दिये गये अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य के अधिकार को…

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लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम.

लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम बस देखते रहे गुज़रते पलों को हम l जाता हुआ साल इतिहास लिख गया क्या पाया हमने खोया सब हिसाब लिख गया कुछ हसरतें थीं दिल में जो पूरी न हो सकीं कुछ पल खुशी के साथ मेरे नाम लिख गया लेकर नई आशाएं बढ़ें सबके…

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कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन

ब्रह्माण्ड रूपिणी  भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…

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वर्द्धमान प्ले स्कूल ने मनाया स्थापना दिवस

नई दिल्ली। वर्द्धमान प्ले स्कूल, सीताराम बाजार, चावड़ी बाजार दिल्ली ने सांस्कृतिक कार्यक्रम करके स्थापना दिवस मनाया। श्रीमती सीमा शर्मा गैर राजनीतिक संस्था लक्ष्मीबाई ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की प्रमुख मुख्य अतिथि रही वही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन संस्थापक नितेश भार्गव और प्रिंसिपल मीनाक्षी भार्गव ने किया।

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जय भोले शंकर

भोले शंकर अबके सावन में अपने पास बुलाना। दिल में जगह न दो तो अपने पैरो में जगह बनाना।। शीश तुम्हारे चरणो में रख मेरा जीवन कट जाए। सर पर हाथ रहे तुम्हारा तो हर संकट कट जाए।। जब जब शंकर नाम तुम्हारा मेरे मुख पर आए। मन से लेकर अंतर्मन तक सब पवित्र हो…

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सबको सन्मती दे भगवान : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

गैस की हाहाकार सच्ची में या केवल अफवाह ? अब इस प्रश्न का उत्तर खोजा जा रहा है । जिनको खोजना है वे खोज ही रहे हैं पर आम व्यक्ति परेशान है । रसोई गैस अब आम इंसान के लिए हवा-पानी की भांति ही जरूरी हो चुकी है । रोटी खाना है तो पकाओगे काहे…

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लघुकथा – मैसेज (डॉ. कल्पना पांडेय ‘नवग्रह’)

बच्चे का दाखिला अच्छे कॉलेज में हो गया था। हाँ, उसकी मेहनत रंग लाई थी। उम्मीदों अरमानों के साथ हॉस्टल में व्यवस्था करा, माता-पिता।अश्रुपूरित आँखों से संबंधों-रिश्तों की मिठास भरे घर लौट आए। रीमा! कितना खाली-खाली लग रहा है। बच्चों की शरारत,उछल-कूद बड़ी याद आ रही। सच कहते हो, यहाँ उसके रहने से कुछ तो…

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मोहन राकेश शताब्दी वर्ष के बहाने

अमृतसर में सौ साल पहले मदन मोहन गुगलानी के नाम से एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार में जन्मे मोहन राकेश एक बेहतरीन लेखक थे, जिन्होंने कई विधाओं- कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, अनुवादों, यात्रा-वृत्तांतों, आलोचना और व्यक्तिगत डायरियों में कथा-रचना करने की कोशिश की और कहानियों और नाटकों के क्षेत्र में विशेष रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अमृतसर…

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(लघुकथा) बौद्धिक विकास की कमतरी

ओ यार!  क्या तूने सुना कि फलां फ़िल्म के हीरो ने आत्महत्या कर ली !”     “हाँ , यार मैं तो देखते ही शॉक्ड हो गया ।” फोन पर बात करते हुए अर्णव अपने मित्र अर्जुन से बोला।     “अरे यार! पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ, लगा कि ये फेक न्यूज है, पर यार…

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संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण’ सम्मानित

महासभा शताब्दी समारोह समिति द्वारा आयोजित (मध्य चरण) विशाल समारोह में समाज के प्रतिभाशाली बच्चो को (जिन्होंने कक्षा 10, कक्षा 12 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं) तथा खेल कूद अथवा उच्च सिक्षा में विशिष्ट स्थान बनाया है उनको तथा 80 वर्ष तथा अधिक उम्र के सम्मानित सदस्यों को सम्मानित किया गया…

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