पितृदिवस पर
प्रेम के अक्षय पात्र सापवित्र रिश्ताजो कभी नहीं रीतताबाहर से सख्तअंदर से नर्मदिल में दफन कई मर्मचटकती धूप से इरादे गर्मउर में आस लिएअमावस को भी कर दे रोशन ।अपना दे निवालाबच्चों के हाथों की लकीरोंको बदल दे…जिंदगी की जद्दोजहद में भीमुस्कुराहटों की रवानियांबिखेरसमुद्र सी थाह में अथाह लिएचुभती धूप में सहलाते से…ना रूके, ना…
