चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है…
चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है उजली शब का वो मुनव्वर माहताब लगे है l जब भी देखा है उसे तारीकियों से लड़ते वो फ़लक पर इक चमकता आफताब लगे है l क्या करें तारीफ़ हम उस जल्व ए जाना की सिर से पाँ तक जो ग़ज़ल की इक क़िताब लगे है l सब…
