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क्या आज भी सुरक्षित नहीं हैं बेटियां ?

लोभी लोगों का डरकर नहीं डटकर सामना करें। कहने को हम सभी 21वीं सदी में जी रहे हैं बावजूद इसके मानवता कहीं किसी दरख़्त के नीचे दबी चली जा रही है । वर्तमान में जब हम आधुनिकता, विकास और स्वतंत्रता की बात करते हैं तो कहीं न कहीं ये सब दलीलें और बातें झूठी प्रतीत…

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जागो वोटर जागो : सम्पादकीय

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) आज सेना दिवस (15 जनवरी) है, भारतीय सेना को सहृदयता कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए नमन करता हूँ ।कोरोना – नए वेरिएंट (ओमीक्रॉनद्ध) की बात करें तो हाँ संख्या अति शीघ्रता से बढ़ अवश्य रही है किन्तु हमें यहाँ अपनी सोच को नियंत्र्ति करना होगा । मौसम बदलना–खाँसी–जुकाम के मामले हमेशा…

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पहचान : शशि महाजन

आज मेरा पहला उपन्यास छप कर आया है , इसे मैंने पापा को समर्पित किया है , जो हूँ आज उन्हीं की वजह से हूँ। यूँ तो कुछ साल पहले तक मैं उनसे नफरत करता था , उन्हें पापा भी नहीं कहता था , कोशिश करता था कि उनसे बात ही न करनी पड़े ,…

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अभी तो कई खिसकेंगे , यह तो बस शुरुआत है !

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक उथल पुथल तेज हो गई है । जैसे – जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही हैं, विपक्ष और पक्ष के खेमे के सेनापति खेमा बदलना शुरू कर दिए हैं । जिसकी शुरुआत मंगलवार को बसपा से आए भाजपा में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने कर दी । पांच…

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चुनावी पतंगों से सज चुका आसमान

राजनीतिक सफरनामा              चुनावी पतंगों से सज चुका आसमान                                                                                            कुशलेन्द्र श्रीवास्तव लोहड़ी पर्व पर पतंगबाजी होती है । पहले अपनी पतंग को हवा में ऊंचा उड़ाओ और फिर हवा में उड़ रही दूसरी पतंग को काट डालो । राजनीति में भी ऐसा ही होता है । आवश्वासनों से भरी रंगबिरंगी पतंगें आसमान में उड़ती…

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अब के ऐसा वसंत खिले आर्गेनिक हर निगाह रहे

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार, संरक्षक ) हर साल प्रतीकों के आधार पर हम सभी कुछ राष्ट्रीय और कुछ अँतर्राष्ट्रीय दिवस, कुछ वैश्विक और कुछ प्रतीकात्मक दिवस मनाकर अपने दायित्वों की इति श्री समझ लेते हैं।जिस भारतीय संस्कृति पर समूचा विश्व गर्वित होकर हमारे पारिवारिक संस्कारों के प्रति सम्मोहित होने लगा है, हम सभी उस संस्कृति की…

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वर्ष 2022 संकल्प : क्या करें?… क्या न करें?…

डॉ. नीरू मोहन ‘वागीश्वरी’ वर्ष आते हैं और चले जाते हैं परन्तु अपने साथ बहुत-सी दुखद और सुखद यादों के अनुभव छोड़ जाते हैं; जिनको याद करके मन कभी खुश हो जाता है और कभी दुखी। मुझे लगता है सभी को अपने आने वाले समय का इंतज़ार रहता है मगर वह कैसा बीतेगा इसका एहसास…

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नयी ऊर्जा की ओर : आशा सहाय

वर्ष 2021 गुजर चुका है।समस्याओं और उपलब्धियों से यह लर्षभरा रहा ,ऐसा कहने में हमें संकोच नहीं होता. इसलिए कि समस्याओं ने राष्ट्र को अगर परेशान किया तो उनके समाधान भी देश ने ढूँढ लिए । कोरोना से जूझने के लिए टीकाकरण अभियान ने सामान्य जनता को सामान्य जीवनशैली की ओर उन्मुख कर दिया।यद्यपि इतनी…

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जलना ही है तो सूरज की तरह जलो

जलना ही है तो सुरज की तरह जलो।रौशनी की तरह चमकोगे। जलना ही है तो जलते दिये की तरह जलो।रौशनी की तरह अंधेरे में भी चमकोगे। इंसान को देखकर इंसान से मत जलो।जल्द ही पतन होगा तुम्हारा। न पछताबे से कुछ हासिल होगा।न ही पैर किसी के खिंचने से। किसी से जलने से शून्य में…

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सम्पादकीय : मनमोहन शरण ‘शरण’

‘उत्कर्ष मेल’ के सभी पाठकों को नववर्ष 2022 की शुभकामना देता हूँ और प्रभु के श्रीचरणों में निवेदन करता हूँ कि सभी देशवासियों को मन–बुद्धि–कौशल से दृढ़तापूर्वक संकल्प के साथ कार्य करने की शक्ति दें । सभी स्वस्थ रहें, सुखी हों ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें ।नव वर्ष का उत्साह एक तरफ है और कोरोना के…

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