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नौकरी ही नहीं तो शिक्षक पात्रता परीक्षा के नाम पर ठगी क्यों ?

(   हरियाणा के मुख्यमंत्री का विधान सभा में जवाब कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की अब जरूरत नहीं कितना शातिराना है सोचिये? जब प्रदेश में शिक्षकों की जरूरत ही नहीं तो फिर क्यों पिछले दस सालों से शिक्षक पात्रता के नाम पर बार-बार बेरोजगार युवाओं की जेब काटी जाती रही इनको तो सब पता ही…

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मैं फकीर वो बादशाह

मैं फकीर हूँ सामने तेरेतू जगत का बादशाह है। मैं फकीर वो बादशाह हैसिजदे में सिर झुका मेरा।सबकुछ तो तेरा ही दियाजो भी यहाँ सब कुछ तेरा।सब फकीर हैं तेरे सामनेतू जगत का बादशाह है। तेरी रहमतें बरसें सभी परखुशहाली दिखे हर कहीं।तू दूर कर दे गम सभी केउदासियाँ दिखें कहीं नहीं।तेरी कृपा मिल जाये…

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नारी व्यथा

मेरे हिस्से की धूप तब खिली ना थीमैं भोर बेला से व्यवस्था में उलझी थीहर दिन सुनती एक जुमला जुरूरी सा‘कुछ करती क्यूं नहीं तुम’ कभी सब के लिए फुलके गर्म नरम की वेदी पर कसे जातेशीशु देखभाल को भी वक्त दिये जातेघर परिवार की सुख सुविधा सर्वोपरीहाट बाजार की भी जिम्मेदारी पूरी तंग आ…

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हर्षोल्लास के पावन पर्व होली की अनन्त शुभकामनाएं : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

सर्वप्रथम  आप  सभी  को  हर्षोल्लास  के  पावन  पर्व  होली  की  अनन्त  शुभकामनाएं ।  बात  हम  होली  और  जो  ‘हो  +  ली’  (कोराना  महामारी)  उसकी  भी  करेंगे ।           जो  बात  हो़ली,  जिससे  पूरा  विश्व  अचम्भे  में,  सकते  में  आ  गया  था ।    2021  आते–आते  हम    खुशी  मनाने  लगे  कि  चलिए  अब  तो  बहुत  सारी  वैक्सीन …

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अभिव्यक्ति संस्था के कार्यक्रम “होली की बहार, काव्य की बौछार” में रचनाकारों ने खेली काव्य-होली

दिनांक १४ मार्च २०२१ का दिन अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्थाके लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा क्योंकि “अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था” की ओर से, होली के उपलक्ष में, “होली की बहार, काव्य की बौछार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन, रोहिणी (दिल्ली) में कार्यक्रम आपकीं दोस्त Madhu Madhubala Labana जी के निवास स्थान पर सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अभिव्यक्ति मंच विगत छः…

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होली में मचो है धमाल

होरी में मचो है धमाल कान्हा नगरी में, उड़ रयो देखो गुलाल, कान्हा नगरी में, मस्ती देखो ब्रज में छाए -2 गोपी-ग्वालवाल रंग लगाएँ  -2 अंबर भी देखो भयो लाल कान्हा नगरी  में, होली में मचो है धमाल ——— राधे श्याम के रंग में रंग जाओ -2 राधे-राधे मिल सब गाओ  -2 बड़ो नटखट  यशोदा…

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कुछ मोती ऐसे,कोहेनूर जैसे

कुछ शब्द या पंक्तियां ऐसी होती हैं जो  जिन्दगी में मन को छू जातीं हैं,अगर उनका मनन कर के व्यवहार में ले आएं तो जिन्दगी ही बदल देतीं हैं।शब्द भले ही निःशुल्क लेकिन यह चयन पर कीमत मिलेगी या चुकानी होगी।पिछले 45-50 वर्षों से मैं जब भी कोई अच्छा प्रेरक विचार पढ़ता हूं तो उसे…

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न्याय प्रणाली की सूरत बदलनी चाहिए !

मानव गलतियों का पुतला होता है ऐसा आप सबने जरूर सुना होगा किन्तु मानव जो भी गलतियां करता है उसके पीछे या तो उसकी अपनी मजबूरी होती है या उसका अपना बनाया दकियानूसी सिस्टम ! जी हां ! आज मै एक पत्रकार और लेखक होने के नाते जिस मुद्दे को आपके सामने उठाने जा रहा…

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रंगों का त्यौहार ‘ होली ‘

मंजु लता     भारत त्‍यौहार और मेलों का देश है। वस्‍तुत: वर्ष के प्रत्‍येक दिन उत्‍सव मनाया जाता है। पूरे विश्‍व की तुलना में भारत में सबसे अधिक त्‍यौहार मनाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश त्‍यौहार भारत के अधिकांश भागों में समान रूप से मनाए जाते हैं। प्रमुख त्यौहारों में होली भी बड़ा त्यौहार है…

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टूटे पैर वाले पोस्टर

(राजनीतिक सफरनामा) कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सबकी अपनी-अपनी किस्मत होती है दीदी के पैर की भी अपनी ही किस्मत है । चोट खाया पैर बड़े-बड़े पोस्टर-बेनरों में पूरी आभा के साथ दिखाई देने लगा है । जहां कल तक पश्चिम बंगाल की गलियों में चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर चमक रहे थे अब वहां टूटे हुए पैर की…

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