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दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

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बातों से बात नहीं बनती साहब!

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) पूरे विश्व में मानव जाति पर कोरोना बहुत बड़े संकट के रूप में छाया हुआ है । भारत की बात करें तो दूसरी लहर में क्या–क्या घटित हो गया यह किसी से छिपा नहीं है । दूसरी लहर में युवाओं पर कहर टूटा और संख्या गिनती से परे है । कुछ…

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एक दिन सब यहीं छूट जाएगा

यह दुनिया तो है एक सराय यहां कभी कोई आए तो कभी कोई जाए फिर भी लगी है सबको पैसों की हाय हाय यह पैसा भी एक दिन रूठ जाएगा एक दिन सब यहीं छूट जाएगा। चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात सुख दुख तो है एक आनी जानी बात हैवानियत के मोहरों की…

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अंतिम प्रताड़ना

आंचल ने बी.ए. की परीक्षा दी थी। आंचल के माता पिता (रमा व चेतराम )ने उसका विवाह एक छोटे शहर में अमल नाम के लड़के से कर दिया। एक कंपनी में नौकरी करता था।आंचल के ससुराल वालों को मायके के लोगों का आना-जाना बिल्कुल पसंद नहीं था।आंचल कोई भी काम करती थी उसे तायने ही…

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उत्तर प्रदेश को अब पुनः ब्राह्मण मुख्यमंत्री चेहरे की जरूरत !

उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मंथन करने में जुट गया है । मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा ये अब गंभीर विषय बन रहा । बात करें योगी आदित्यनाथ जी के कार्यकाल की तो उनके कार्यप्रणाली से सवर्णों का एक बड़ा वर्ग, ब्राह्मण वर्ग नाराज है । कारण…

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जब कभी

जब कभी महफिल भी रुलाने लगे। तन्हा-तन्हा पल जब सताने लगे।। हमको आवाज देना मगर दिल से तुम। चाहे इसके लिए अब जमाने लगे।। रिश्ते हर रोज बनते हैं मिटते यहां। दिल लगाना यहां बस फसाने लगे।। ग़मों से अगर बात हो अपनी कभी। इन्तहां में भी हम मुस्कुराने लगे।। रंग भरते हैं ख्वाबों में…

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पिता

हो मजदूर हो फेरीवाला हो रिक्शेवाला हो ठेलेवाला हो कारीगर हो दुकानदार हो ऑफिस कर्मी हो नेता हो अभिनेता हो टाटा, बिरला,अम्बानी हो गरीब या मध्यम या अमीर या करोड़पति पिता तो पिता ही होता है सिर्फ बच्चों की मुस्कान के लिये हर मौसम की मार- हो चिलचिलाती धूप, लू, तेज़ बरसात, आंधी, तूफान या…

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जा रहा है कोरोना

जा रहा है कोरोना लेकर कितनों की जान कितनों की बर्बादी ,कितनों का ईमान इतिहास गवाही देगा, उनकी तबाही की गूंजती है जिनके रोने की आवाज खुलने लगे हैं बाजार होने लगी है चहल पहल सुनाई देने लगी गानो की आवाज,पर गूंजती है उनके रोने की आवाज छिन गई है जिनके घरों में रोटियां बुझ…

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उड़ान

जीवन की मुश्किल राहों में थकना न है… सपनों की उड़ान को पंख लगाने है .. हौसले बुलंद करके मंजिल को पाना है … हौंसले बुलंद हो तो पत्थर भी पानी बन जाता …. इरादे मजबूत हो तो पत्थर भी पिघल जाते …. जीवन में कोई भी बाधा आए सभी अपने आप ही हट जाती…

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हर रूह प्रेम की प्यासी है

कविता मल्होत्रा (संरक्षक एवं स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) उधार की मिली सब साँसें,हर धड़कन मुक्ति की अभिलाषी है अपनी संवेदनाओं को साग़र कर दें, हर रूह प्रेम की प्यासी है ✍️ अति हर चीज़ की बुरी होती है, बचपन से सुनते आए हैं।मानव जाति से किस तरह के गुनाहों की अति हुई है जिनके परिणाम…

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