फिर से अभिमन्यु (दिनेश कपूर )
दुआ मेरी गूंगी है, रब मेरा बहरा है. उफनती दीवारों पर सब्र का पहरा है. हथेलियों पे छाले पड़ जाते हैं, जब परछाइयों को पकड़ता हूँ, जकड़ता हूँ. जकड़ी परछाई डरी सहमी रहती है. ढील हुई नहीं कि ये गई, वो गई. अपने जिस्म से जुडी भी डरती है कम्बखत जिंदगी. तारों से परे दुबक…
