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हे नारी

हे नारी!तू नारी है मत भूल सभी पर भारी है रब ने अलग बनाया तुझको फूलों सा महकाया तुझको तेरी माया तू जाने कोई समझ ना पाया तुझको तेरे कदमों पर दुनिया बलिहारी है मत भूल सभी पर भारी है कहीं पे राधा कहीं पे बाधा कहीं पे थोड़ी कहीं पे ज्यादा कहीं पे ममता…

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“करें नारी का सम्मान सभी जन”

नारी   मानवता की  पहचान , भरती है  सबके अन्दर जान । होती  सभी  गुणों  की  खान , करें  सभी   उसका   सम्मान ।। घर  की  इज्जत  होती  नारी , करती   स्वीकार   जिम्मेदारी । दिल  दया-करुणा का सागर , भरें उसमे सब अपनी  गागर ।। परीश्रम  की  होती  प्रतिमूर्ति , तन-मन मे  विद्धुत सी  फूर्ति । कुछ …

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मधुर पल

       जीवन के मधुर पल        जीवन की डोर थामते,        कटुता के पल से        ये ही तो हैं उबारते।        कांटो के ताज से        रेतीली गरम राह से        भीषण अंधेरे जंगलों में        वे ही तो इक सहारा हैं ।        जीवन के मधुर पल        जीवन की डोर थामते ।…

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राह की तालाश

आज दिवाली का त्यौहार था। चारों ओर पटाखे और  आतिशबाजी की ध्वनि गूंज रही है,तभी अचानक आग की एक चिन्गारी पास की एक झोपड़ी पर गिर गयी,और वह चिंगारी आग की लपटों मे बदल गयी, धीरे-धीरे वह पास के एक घर तक पहुंच गई,जहा परिवार के सभी सदस्य बिराजमान थे, किसी तरह पिता और बेटा…

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आपके आने के बाद

हो गये मौसम सुहाने, आपके आने के बाद, हो गई हर ऋतु बसंती,आपके आने के बाद। नींद कोसों दूर जाकर बैठ जाती आंखों से, ख्वाब सूखे पत्तों की मानिंद झड़ते शाखों से। हो गए सपने सलौने,आपके आने के बाद, नींद मीठी हो गई है,आपके आने के बाद।। मिट गई मीलों पुरानी दूरियां इन दिलों की,…

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कैसे कैसे लोग

    ..दोपहर की तेज चिलचिलाती धूप में रीना बारबार पसीना पोंछती हुई रिक्शेवाले का इंतजार कर रही थी । सामने से ही बहुत सी साथी शिक्षिकाएं अपनी अपनी गाड़ियों से निकल रहीं थी पर सभी के रास्ते अलग अलग थे । तभी सामने एक गाड़ी रुकी ।      “अरे रीना जी कैसे खड़ी है ?”…

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भूकंप

मत बनाओ! इंसानों गगनचुंबी इमारतें धरती खोदकर वरना: कुदरत का करिश्मा! आंखों से देख ली फिर भी नहीं मानते अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करते रहते सर पर मौत का छत डालकर बना लेते सौ सौ तल्ले और अहंकार में कहते मेरे देश की बल्ले बल्ले। जब सहती नहीं भार पृथ्वी की परतें सौ सौ तल्ले…

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पहले जहाँ रोज करते थे

पहले जहाँ रोज करते थे लोग उसका पूजा बन्दन और विवाह के अवसर पर नई दुल्हन करती थी धूप ,प्रसाद का अर्पण। सूख गया वह पेड़ सुन तानो की आँधियाँ बिखर गए सारे दरख़्त और रस भरी पत्तियां नजर लगी कितनो की सहन न कर पायीं जो इनकी अटखेलियां। अबतो सुख ही सुख है दर्द…

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शीर्षक : “वो सर्द रात”

वो सर्द हवाएं हो : वो काली घटाएं हो। वो शर्मीली निगाहे हो : वो सिसकती आहे हो। ठंड की कपन हो : थोड़ी सी अगन हो। थोड़ी सी लगन हो : साथ में सजन हो । बस फिर किया, हो बाहों में बाहें, हो हाथो में हाथ, फिर सदा याद आयेंगी=वो सर्द रात :…

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व्यंग्य- बाबापंथी

आजकल बाबाओं का ट्रेंड चल गया है, एक गया तो छः महीने में दूसरा आना ही है लाइमलाइट में। देखते हैं इस बार वही हाल है या फिर बाबा कमाल है। कमाल से याद आया कि चाची 420 फ़िल्म की तरह किसी ने भी बाबा 420 फ़िल्म नहीं बनाई। मुंह में पान चबाते हुए एक…

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