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आज़ादी का दिन ( लघु कथा )

        सुबह लक्ष्मी काम पर जल्दी आ गई थी। वह बड़ी शीघ्रता से काम निपटा कर जाना चाहती थी। आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उसके विकलांग पुत्र राहुल को जिलाध्यक्ष महोदय की ओर से उत्कृष्टता का पुरस्कार मिलने वाला था। इस वर्ष उसने राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाकर जिले का…

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जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है,

जीवन के वृक्ष  को जीवन्त रखना है, प्रेम के पानी से उसे  सींचते रहना है। उसको सुखाता  है नकारात्मक सोच, शुभ सोच  से सदा हराभरा रखना है। अहंकार की ऊष्मा विष के समान है, जो जीवन को  विषाक्त  कर  देता है। जो  सीख लिया है दंभ को दुत्कारना, मजेदार जीवन का वह मजा लेता है।…

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देवेन्द्र के दोहे

देवेन्द्र कुमार पाठक अपने तीरथ धाम हैं,खेत और खलिहान। अनिल,अनल,जल,भूमि,नभ; हैं प्रत्यक्ष  भगवान।। श्रम ही अपना धरम-व्रत,घोर तपस्या घाम। ओला-पाला,बारिशें,बाढ़ हमारे नाम।। इल्ली,गंधी, गेरुआ,कांसा, गाजर घास। आवारा गोवंश ने, किया फसल को नाश।। माघ-पूस की रात में जब चलता हिमवात। फसल सींचते खेत की,हाड़ा-गोड जुड़ात।। सरहद पर बेटा सजग,अन्न उगाते बाप। उनकी सेवा,त्याग का,कोई मोल…

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पथ के हो राही

पथ के हो राही तुम हो पथिक थक के न हारो  थोड़ा  भी तनिक थोड़ा धीरज धर   बढ़ते जाना एक दूजे का   मनोबल बढ़ाना, आएंगी  बाधाएं हजार साहस को तुम   बनाना आधार, टेड़ी मेड़ी    होगी डगर चलते जाना    तुम हो निडर, आएगी जो भी     है रुकावट वो तो होगी   बस क्षणिक… पथ के हो राही…

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अपने होने का आनंद- आत्म निरीक्षण 

सुख-दुःख का संबंध मन और शरीर से होता है, जबकि आनंद का संबंध अंतरात्मा से होता है। आनंद अगर मिल जाए तो व्यक्ति उसे छोड़ना नहीं चाहेगा। प्रश्न यह है कि आनंद की प्राप्ति कैसे हो? इसके लिए हमें स्वयं से प्रेम करना और दूसरों में प्रेम बांटना होगा। ईश्वर द्वारा निर्मित जीवों के प्रति…

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सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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आत्मालाप : उल्टे पांव भूत के

           देवेन्द्र कुमार पाठक गांव में अब मास्क कोई भी नहीं लगाता.हाँ, वे लोग घर, जेब, बैग-थैले में एक-दो मास्क जरूर रखे रहते हैं, जो कुछ पढ़े-लिखे हैं या फिर वे सयाने जिन्हें शासन-सियासत, आधि-व्याधि, सूखा-बाढ़, अकाल-गिरानी  और दुनियादारी की गहरी समझ है. जिनको ऐसे दुर्दिन भुगतने- झेलने के बड़े तल्ख और कड़वे अनुभव हैं….

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नफरत का आतंक

कातिल जहाँ बेखौफ है कौन सा ये देश हैकानून का है राज नहीं पर कहलाता प्रदेश हैजहाँ कत्ल को लानत नहीं इज्जत वो समझने लगेभारत माता के आंगन में भी क्या विषधर साँप पलने लगे? कितने दिन कितनी रातें कितने घण्टों में सजा मिलेगीफाँसी से ज्यादा कुछ और क्या कानून की रजा मिलेगीइस क्रूरता को…

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योग की महत्वता— योग दिवस—– प्रवीण बहल

सारे विश्व में हर व्यक्ति के जीवन में– योग का महत्व बढ़ गया है– अगर हम 50 वर्ष पीछे चले जाएं तो हमें याद होगा कि हर स्कूल में पढ़ाई शुरू होने से पहले पी टी हुआ करती थी– महत्व था शरीर को चुस्त बनाना– आज यह— अध्ययन के विषय में आ गया– जब से…

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योग

सुबह सुबह हो योग और दिनभर हो कर्मयोग तो क्या बात है ।पुरुषार्थ और परिश्रम हो जीवन का आधार तो क्या बात है ।एक क्षण भी ना हो नकारात्मकता हर पल हो सकारात्मकता तो क्या बात है ।योग से हो अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति तो क्या बात है ।योग से होता सभी मनोविकारों…

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