कविता और कहानी
बदनसीब किसान की व्यथा
डॉक्टर सुधीर सिंह बदनसीब किसान की व्यथा की कहानी सुनें,‘कोरोना’से ज्यादा ही जिसमें पीड़ा व भय है.लॉकडाउन में रहने से कोरोना नहीं सटता है,तैयार फसल की बर्बादी बिना छुए देता दर्द है. बेमौसमआँधी-तूफान,बारिश वओलावृष्टि ने,किसान के भविष्य को खाली कर चल दिया.खेत के मेढ़ पर पड़े हुए मजबूर किसान को,जार-बेजार रोने के लिए अकेला छोड़…
कागा सब तन खाइयो (कहानी)
कई दिनों से भयंकर बीमारी के बावजूद भी नीलिमा का चेहरा बहुत सुंदर दिख रहा था। उसके पति राकेश और बेटे खुश थे कि शायद अब वह बच जाएगी। पिछले कुछ समय से फ़ेसबुक पर लिखने से उसके काफ़ी दोस्त बन गए थे और जिस अकेलेपन के कारण उसकी जान पर बन आई थी, आज…
वक्त इंसान को मजबूर कर देता है
वक्त इंसान को मजबूर कर देता है,‘लॉकडाउन’का पालन करबाता है.समय के सामने हर कोई बौना है,सबों को समय झुका कर रखता है. जग में किसी से डरिए या न डरिए,वक्त से हमेशा संभल कर ही रहिए.जीवन में सदा शुभ कर्म करते हुए,समय का सदुपयोग करना सीखिए. वक्त को जिसने भी बर्बाद किया है,उसको वक्त भी…
मिले मेढक कॉकरोच
मिले मेढक कॉकरोच, भोजन में आज फिर कल मध्यान्ह भोजन में, था छिपकली का सिर था छिपकली का सिर, योजना है अति भारी बड़ा है कष्टप्रद, यह आदेश सरकारी अनपढ़ ही रह जाएँ, भले शिक्षा ही न मिले बच्चों को मध्यान्ह, का भोजन अवश्य मिले। 2 मँहगाई के दौर में, ज़िन्दा है ईमान अचरज होता…
मैच फिक्सिंग ( हास्य कविता )
मैच खिलाड़ियों का फील्डिंग में होता था , देखो , हारकर भी खिलाड़ी चैन से सोता था , हम सोचते थे पहले ,हर मैच में ही हार होती है , क्या समझते थे हम कि , जिंदगी दुशवार होती है । जीतते है तो बस दुनियाँ में ही नाम होता है , मिलते है कम…
( हास्य कविता ) मेरे पति
1 जब जब बीमार मैं पड़ती हूँ पति मेरे प्रेम पूर्वक रूबाब मुझे दिखाते है ख्याल नही रखती अपना सैर भी तेरी बंद है दूर मैं तुमसे रहता हूँ फ्रिक तुम्हारी करता हूँ नौकरी छोडूँ , घर बैठूँ बोलो , तुम क्या कहती हो 2 जब जब बीमार मैं पड़ती है पति मेरे , दोस्त…
वरदान जो मिलते मिलते रह गया
मैं शायद आप से ज्यादा बहादुर हूं, जो अपनी व्यथा कहने की हिम्मत जुटा रहा हूं, व्यथा तो आप की भी यही है, पर आप में, मेरी तरह हिम्मत कहाँ। कुछ हिम्मत जुटाओ तो आओ मेरे साथ,आप भी बता ही दो अपनी व्यथा।पहले तो किसी कारण से डांट पड़ती थी अब लॉक डाउन में तो…
‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है
Doctor Sudhir Singh कर्म ही पूजा है और श्रम ही साधना है; ‘मजदूर-दिवस’ यही सबको सिखाता है. जो भी जीवन जीता हैअकर्मण्य रहकर, संपूर्ण देश के साथ वहअन्याय करता है. 1मई सबों को यह याद दिलाने आता है, सभी लोग क्ष्रमिक हैं;सब क्ष्रम-साधक हैं, संसार में जितने भी विकास कार्य हुए हैं, सबके लिए मजदूर…
