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ममतामयी माँ (कविता-4)

डॉक्टर सुधीर सिंह माँ की नजरों में वयस्क संतान भी, सदा एक मासूम बच्चा ही रहता है. बूढ़ी जननी  की  गोद में माथा रख, बीते बचपन में में जब खो जाता है. ममतामयी माँ जब सर सहलाती है, लगता है वह एक अबोध बालक है. पता नहीं चलता  है  लंबी  उम्र तब, आसपास जब ममता…

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आशीर्वादों की बरसात है मां (कविता-3)

ओम के उपरांत सबसे पूजनीय शब्द है मां आशीर्वादों की बरसात है मां इस दिल की धड़कन है मां श्वांसो का आवागमन है मां प्रथ्वी पर चट्टान है मां देवी का स्वरूप है मां प्यार का दरिया है मां रिश्तों को जोड़े वो कड़ी है मां कर्तव्य का प्रायवाची है मां एक अलग ही राशि…

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माँ (कविता-2)

मार्टिन उमेद नज्मी मैंने जमीं पे चलती फिरती ख़ुदा की अंजा देखी है , मैंने जन्नत नहीं देखी कभी मैंने अपनी माँ देखी है ॥ ———————- बेटी की शादी में गरीबी सह विधवा माँ खर्चे को हिचकिचाती रही , वो ज़बां पर ख़ामोशी के ताले डाल इक इक रस्म-ओ -रिवाज निभाती रही ! ———————- माँ…

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माँ का कमाल (कविता-1)

(पूनम द्विवेदी) माँ ने हमकों जीवन देकर दिखा दिया संसार, माँ ने हमकों चलना सिखाकर घूमा दिया संसार। माँ ने हमकों बोलना सिखाकर ज्ञानी बना दिया, माँ ने हमकों संस्कारित करके सम्मानित बना दिया। माँ ने हमकों समाजिक करके व्यवहारिक बना दिया, माँ ने हमको प्यार देकर प्रेमी बना दिया। माँ ने हमकों भाव देकर…

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ये चाक जिगर के सीना भी जरूरी है

ये चाक  जिगर के सीना  भी जरूरी है कुछ रोज़ खुद को जीना  भी जरूरी है ज़िंदगी रोज़ ही नए कायदे सिखाती  है बेकायदे होके कभी पीना भी जरूरी है सब यूँ ही दरिया पार   कर जाएँगे क्या सबक को डूबता सफीना भी जरूरी है  जिस्म सिमट के पूरा ठंडा न पड़  जाए  साल में …

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मिट्टी के दीये

कुम्हार   बना   मिट्टी   से,मिट्टी   के   दीये   बनाये। अपने   आप    से   अपने   आप   को   बनाने   के  हुनर   से   ‘ नीर ‘   का   मन   अचंबित   हो  जाये।। जोड़ तोड़ करता जीवन को,फिर जीवन कैसे चलाये। ईर्ष्या – द्वेष के धागों पर क्यों चतुराई के मोती चढ़ाये।। जगमगाते दीयो ने कभी ना किसी से समझौता किया। अपनी  रौशनी …

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कभी यह दर ना छूटे

कोई जाए काबा, कोई जाए काशी, कोई जाए चारों धाम। मेरे लिए तो सबसे बड़ा है गुरु द्वार इस दुनिया में सबसे प्यारा है तेरा दरबार। हम पर सदा कृपा रहे तेरी और सतगुरु तेरा प्यार।। कभी गुरु ना हमसे रूठे कभी यह दर न छूटे हम बच्चे गुरु तेरे, अब रखना लाज हमारी हर…

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प्रकाशोत्सव की बधाई बँटे हर दिल से नफरती धुँध छँटे

जिस परमपिता ने जीवन का उपहार दिया मत उसे सँहार दो प्यासी है हर आत्मा ग़र हो सके तो सबको निस्वार्थ प्यार दो आज हर तरफ हिंसा और आक्रोश का बोलबाला है, जिसने समूची मानवता को अपनी गिरफ़्त में लेकर चौपट कर दिया है। कहीं मज़हब के नाम पर बारूदी हमले हो रहे हैं, तो…

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एक खुशी यह भी

                हल्की हल्की बारिश हो रही थी और हवा भी सर्द थी । रजाई में ही बैठे बैठे थोड़ी सी गर्म चाय मिल जाती तो कितना अच्छा होता पर नहीं ऐसा नहीं हो सकता था। घर में गहमागहमी का मौसम पसरा पड़ा था क्योंकी दादी जी की हालत ख़राब थी । कुछ समय बाद उनको…

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इसी ज़मीन पर

धरती को नरक बनाने वालों चले हो चांद-सितारों के सफर पर रहना धरती पर ही है कब तक उडो़गे लगाकर यांत्रिक पर । मालिक जाने क्‍या होगा सितारों का गर बस गये तुम क्‍या निकल पडे़ हो प्रदूषण, जनसंख्‍या और सर्वनाश करने आसमान पर । तुम चाहते तो बना सकते थे धरती पर स्‍वर्ग किन्‍तु…

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