कविता और कहानी
नौकरी (लघुकथा)
प्रमाणपत्रों की फाइल उठाये सुधा रोज कहीं न कहीं, किसी न किसी आफिस में नौकरी मिलने के लिए चक्कर लगाती किंतु नौकरी की जगह उसे लोगों की नापती, तौलती, लिप्सा भरी नजरें हर जगह मिलती बिना पति के दो छोटे बच्चों के साथ पेट पालना कितना दुष्कर कार्य होता है यह उसने पिछले चार महीने में…
अगस्त का मस्त महीना
अगस्त माह की बात निराली चहुं ओर छा जाती हरियाली लेकर आता ये रक्षाबंधन त्योहार हर्षित करता बहन-बेटी का प्यार घर की रौनक जब घर में आती आंगन कली- कली खिल जाती किलकारी से गुंजित होता आंगन जैसे उल्लसित हो उठे धरा गगन अगुवाई में बाजार हो जाते गुलजार जैसे सालों से हो बहनों का…
ग़ज़ल के मिसरे को मिसरे से जोड़ा जाता है
ग़ज़ल के मिसरे को मिसरे से जोड़ा जाता है तमाम रात ग़मों को निचोड़ा जाता है पुराने जाल से बाहर निकलना मुश्किल है इसीलिये तो रवायत को तोड़ा जाता है उतर गये हैं तो अब जीतना ही मंज़िल है कहाँ यू हमसे भी मैदान छोड़ा जाता है उठाना पड़ता है फिर हाथ गर नहीं…
‘सबका विश्वास’ की ओर सशक्त कदम तीन तलाक बिल हुआ पास
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) कभी कभी हम देखते,सुनते और पढ़ते हैं कि ज्योतिषीय गणना / आंकलन के अनुसार आज का दिन बहुत पावन है क्योंकि आज ग्रह–नक्षत्रें का एक अद्भुत एवं सुखद संयोग बन रहा है । ज्योतिष को मानने वाले उत्साहित हो जाते हैं, विशेषकर वे जिनकी राशि में वह संयोग लाभकारी सिद्ध होने…
आज़ादी हमारी
हिम्मत,ताक़त,शौर्य विहंसते,तीन रंग हर्षाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! क़ुर्बानी ने नग़मे गाये, आज़ादी का वंदन है ज़ज़्बातों की बगिया महकी, राष्ट्रधर्म -अभिनंदन है सत्य,प्रेम और सद्भावों के,बादल तो नित छाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! ज्ञान और विज्ञान की गाथा, हमने अंतरिक्ष जीता सप्त दशक का…
बरसी एैसे प्रभु कृपा,दिलों से दिल की बात मिली उमड़ा सावन हिंदी भवन में स्नेह की सौग़ात मिली
इसे प्रभु कृपा नहीं तो और क्या कहा जाए, जब विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अभिन्न रचनाकारों ने, अपने लेखन से अनुराधा प्रकाशन को साहित्यिक समृद्धि देकर, इस काबिल बनाया कि एक साथ 15 पुस्तकों का लोकार्पण सँभव हो पाया। 21 जुलाई 2019 का दिन अनुराधा प्रकाशन के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन कर आया, जिसमें…
हीमा
तुम द्युति गति अनन्त सीमा हो श्वासों का ऊर्जित प्रवाह ऊषा प्रस्फुट हीमा हो! °°°°°°°° तुम गति लय भारत की तुम उत्तंग शिखर पताका तुम गौरवपथधावक विजयी तुम अग्निशिखा शलाका! ••••••••• तुम धीरजधात्री धरणी तुम लक्ष्यभेदक करणी तुम एकलव्य पार्थ हो भारत अस्मिता भवतरणी! °°°°°°°° तुम जठराग्नि अभाव तुम अकिंचन दबाव हो तुम प्रभंजन नियतिकाल…
विकसित राष्ट्रों की सूची में हिंदुस्तान रहे ऊपर
हिमगिरी हुंकार रहा है; हिंदुस्तान जिंदावाद.सीमा पर जो करे शरारत, उसे करना है बर्बाद.भारतवर्ष चाहता है; सुखी सारा संसार रहे.सारी दुनिया ले संकल्प,आतंकी कोई नहीं बचे. यहां की सैन्यशक्ति से सभी पड़ोसी परिचित है,जानता है हिंद के आगे उसकी कोई न हस्ती है.ऐसे में यहां से पंगा लेना बर्बादी को बुलाना है,अंतत:भारत के सामने आत्मसमर्पण…
और बचपन खो गया
नीम पर बैठे पंछियों की चहचहाहट तालाब मे झिलमिलाते दीपों की जगमगाहट बचपन,सुनहले सपनों का एक रेला सुहानी यादों का बढ़ता एक कारवाँ नीले अंबर में उन्मुक्त पंछियों को उड़ते हुए देखना मानो आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं आसमान की बुलंदियों को छूने का सन्देश घूमती हुई उल्काओं को जानने का संदेश सूर्य…
