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प्रिये नव सम्वत्सर बन आना

सभी मौसम सभी ऋतुओं को संग ले आना।प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना। सरसों के फूल बन के यादें तेरी आतीं हैं।मुझसे गेहूॅं की बालियों सी लिपट जातीं हैं। अपनी यादों के संग एक बार आ जाना,प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।सभी मौसम सभी ऋतुओं को संग ले आना। जब भी…

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कमी अपनी परवरिश में

मालती ने आज पूरा घर फिर सर पर उठा रखा था। ससुर जी के खत्म हो जाने के पश्चात यह अब आम बात हो गई थी। मालती की सास दयावती खून का घूंट भरकर रह जाती। मालती अपनी छोटी बहन को पढ़ाई करने के लिए अपने साथ रहना चाहती थी लेकिन घर पर जगह उपलब्ध…

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होली महापर्व

विधा:-विधाता छंद मनाते होलिका मन से, सभी त्यौहार से बढ़कर।  बनें पकवान पूजा के, गुलरियों माल घर रख कर।  बड़ी होली रखें गावों, लकडियाँ बीच में रख कर।  सुहाना फाल्गुन महीना, मनाते पूर्णिमा तिथि पर॥  जलाते पूजकर होली, सभी जन फाग गाते हैं।  जलाने घर रखी होली, वहीं से आग लाते है।  नये गेंहू भुजीं…

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फागुन का ये मौसम है

बृज छोड़ के मत जइयो,फागुन का ये मौसम है,मोहि और न तरसइयोफागुन का ये मौसम है। मैं जानती हूं जमुना तीर काहे तू आए,हम गोपियों के मन को कान्हा काहे चुराए, जा लौट के घर जाइयो,माखन चुराके खाइयो,पर चीर ना चुरइयो,फागुन का ये मौसम है। इस प्यार भरे गीत के छंदों की कसम है,तोहि नाचते…

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गोकुल ने रंग लगाया

सतरंगी डोली में बैठीहोली आई रे। ऋतु बसंत की ओढ़ चुनरिया होली आई रे। मधुऋतु की आंखों को जब,मौसम ने किया गुलाबी,बासंती बयार ने फागुन,को कर दिया शराबी। झूम-झूम कर फाग सुनाती होली आई रे। हर आंगन में रंग बिछे हैंमन की चूनर गीली,धरती गगन हुए सतरंगे,प्रकृति हुई रंगीली। लगा प्रीति का काजल देखो होली…

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पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉक्टर सुधीर सिंह

पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं,हर हिंदुस्तानी यहां  सुखी-समृद्ध रहे।सबों के मन में रहे  भाईचारे का भाव,प्रगति-पथ पर सब  सदा अग्रसर रहे। प्रेमपूर्ण परिवेश के रंग में रंग जाने से,फाग का राग दिल गाने लग जाता है।थिरकने लगता है अधर गीत सुनकर,ढोल,मृदंग पर थाप बरसने लगता है। गुलाल की खुशबू  से  भींगा माहौल,वसंत का एहसास  कराने…

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होली खेलते हैं

होली खेलते हैंचलो हम होली संग खेलते हैचलो हम होली रंग खेलते हैबसंत ऋतु में फागुन माह मेंचंग की थाप पर खेलते हैइंद्रधनुषी रंग बरंगी गुल फूल खिलेभंवरा गीत गुनगुनाते होली खेलते हैलहंगा-चोली भीगी रंगा सारा बदनमुखड़े पर लाली होली खेलते हैंनाचें गीत फाग गाये संग सखियांअखियां चमके काजल होली खेलते हैंहोलिका जली मची खलबली…

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गीत ये बन पाए हैं

गीत ये बन पाए हैं जिगर को चीर के ,बाहर ये निकाले मैंने ,फिर ये अरमान ,आंसुओं में उबाले मैंने ,तब कहीं जा के ,विरह गीत ये बन पाए हैं । इनके सीने में गम ,के तीर चुभाये मैंने ,दिल पै अपनों के दिये ,जख्म दिखाए मैंने ,तब कहीं जा के ,विरह गीत ये बन…

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बेटियों को मत दो गलत सलाह

अवनीश जी की लड़की अपना ससुराल छोड़कर वापस मायके आ गई। सबने वर पक्ष की ही गलती बताई। विवाह के मात्र 6 महीने पश्चात लड़की घर वापस आ गई। खूबसूरत शौकत से विवाह किया गया था। दोनों पक्षों की तरफ से अधांधुध पैसा भी बहाया गया। शुरू में महीना भर तो सही चला। किंतु उसके…

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तुम्हारी जय जय

रचयिता डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र काशीकुंज जमुनीपुर प्रयागराज तुम्हारी जय जय तुम्हारी जय जय हे  भूमि भारत! तुम्हारी जय जय मैं पूज्य बापू की साधना हूं, आज़ाद शेखर की कल्पना हूं, सुभाष की मैं वो कामना हूं, सिंह भगत की संवेदना हूं, शुद्ध आचरण की रीतिका हूं मैं राष्ट्र देवी की दीपिका हूं। तुम्हारी जय…

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