Latest Updates

एक दीया और जला देना

बहुत सारे दीया जलाएँ दीवाली में !घरों, मंदिरों, आँगन और चारदीवारी मे!!कतारे दीयो की, होगी सैकड़ो, हजार!रोशनी की होगी जीत और अंधेरों की हार!!रोशनी से जगमगा उठेगा चहुंओर !रहेगा न अंधेरा, किसी भी ओर!!मनाएंगे खुशियाँ सब मिलकर!दुख,कष्ट ना रहे किसी के उपर!! सब जगहों मे रोशनी ही फैले!दूर रहे अंधेरा,हो उजाले ही उजाले !!लेकिन चुन्नू…

Read More

पति – पत्नी

 सुधांशु बहुत खुश था , बिज़नेस में फायदा हुआ था , और अपनी शादी की तीसवीं वर्षगांठ पर, पत्नी आभा को बढ़िया सा उपहार देना चाहता था, उसने ऑफिस से फ़ोन किया , “ सुनो आज शाम को खाना बाहर खाएंगे। ” “ क्यों ? “ “ क्यों क्या , बहुत दिन हो गए हैं…

Read More

डॉ. मनोज कुमार “मन” की तीन कविताएँ

कवि तुम मुझे जगा देना अंसतोष बहुत था उसके मन में, सो, वो रो दिया। जमा हुई भीड़ में उसने, किसी अपने को खो दिया।। अब तो कोई भी बरगला लेता है, मासूमों को राम के नाम पर। देखो गौर से अब जमाने में, वश नहीं रहा किसी का काम पर।। देखो आज फिर आ…

Read More

कहानी : विश्वास

राजीव  करीब  काम में फस कर दो साल से घर नहीं आ पा रहा था । सारी सुविधाओं के बीच भी रेनू विरह  की वेदना झेल रही थी। उसके ऊपर राह चलते आने -जाने वाले लोगों का ताना मानो हर दिन एक नई ही कहानी सुनने को मिल जाती, लेकिन वह अपना दर्द कभी राजीव…

Read More

नवजीवन खुशियों की ओर

प्रीति आठ महीने के गर्भ से थी। यह उसका तीसरा बच्चा था। पहले से ही उसकी दो बेटियाँ थी। जिन्हें वह खूब लाड प्यार करती थी। उसकी इच्छा नहीं थी कि वह और संतान पैदा करें। लेकिन सास की पोते का मुंँह देखने की लालसा से उसे यह करना पड़ा। प्रीति के पति आयुष भी…

Read More

गरीबो का ये कैसा जालिम कहर है ।

गरीबों से पूछो क्या होती गरीबी है। गरीबी की हालत उन्हीं को पता है। जिसे दर – दर की ठोकर खिलाती गरीबी गरीबी तो फांसी से बढ़कर सजा है । मालिक गरीबी को काहे रचा है। गरीबों के तन को देखाती गरीबी कितना बचा है वजन को देखाती गरीबी खाने को कोई चारा नहीं है।…

Read More

साबरमती के संत

अब तो रह-रह के राजघाट कसमसाने लगा,               मुझको साबरमती के संत तू याद आने लगा। गूंथ कर हार भ्रष्टाचार के गुलाबों का, तेरी तस्वीरों पै बेखौफ डाला जाने लगा। तेरे चित्रों से छपे कागजों के टुकड़ों पर, बड़े बड़ों का भी ईमान बेचा जाने लगा। पहले कातिल बने फिर…

Read More

शरद पूनम

शरद ऋतु की सुहानी आई है पूनम की रात बरस की इसी रात में होती येअमृत बरसात खीर बना कर सब रखें चंद्र-किरण इसमें  झरे भोग लगा कर खाने से रोग भागें तन के सगरे इसी रात में श्रीकृष्ण ने गोपिन संग रास रचाया रास देखने भोला शंकर पार्वती संग में था आया वर्जित  अन्य…

Read More

लघुकथा : मरहम

लेखिका : डोली शाह आज श्रेया म्यूजियम जाने के लिए बिल्कुल तैयार बैठी थी, लेकिन  मेरे दफ्तर से आने में थोड़ी विलंबता के कारण जाना ना हो पाया । वह नाराज  होकर  आराम करने बिस्तर पर चली गई । कुछ ही समय पश्चात सुरेश  पानी पीने फ्रिज तक पहुंचा, श्रेया ने फौरन बोतल लेते हुए…

Read More

आजादी का पर्व मनाते,भारतवासी शान से!

आजादी के महापर्व पर समर्पित देश भक्ति कविता:-1-आजादी का पर्व मनाते,भारतवासी शान से!अगस्त15 याद दिलाता, जीना है सम्मान से॥मुगल हटाये सत्ता से, तो अंग्रेजी शासन आया!इंकलाब हो जिंदाबाद, तब वीरों को नारा भाया॥किया सफाया उनका हमनें, अपना सीना तान के!आजादी का पर्व मनाते भारतवासी शान से॥2- आज तिरंगे से ही मेरी, दुनियाँ में पहिचान है!करते…

Read More