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रश्मि श्रीधर की 2 कविता एवं परिचय

1 क्या खोया ,क्या पाया अतीत के पन्नों को जब पलटा मैंने….तब देखा ,क्या खोया,क्या पाया….धोती-कुर्ता को छोड़,जींस-टाप क्या पहन लिया….चरण स्पर्श को छोड़,हाय-बाय को अपना लिया….दादी-नानी के रिश्तों को भुला दिया,व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर को अपना लिया…अतीत के…..अपने ही घर को मकान बना दिया,नयी दुनिया को अपना मुकाम बना लिया,समय को सपनों की दुनिया में…

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अजय कुमार पाण्डेय जी की 2 कवितायेँ और परिचय

1 कला प्रेमी उकेरता है – चित्र अपने कैनवास पर कला मर्मज्ञ… तलाशता है झुग्गियों में  भूख / अभाव / मज़बूरी  वह जानता है- यह उसका सौंदर्य बोध नहीं है लेकिन… बाज़ार का रुख उसे पता है यही भूख, अभाव और मज़बूरी साधन बनेंगी उसकी दो वक्त की रोटी और प्रसिद्धि का उसे यह भी…

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कृष्णा शर्मा जी की 2 रचना एवं परिचय

तकदीर की लकीरें” कौन आज आया तकदीर का, दरवाजा खटखटाने बता दे मुझे। कैसी है ये दस्तक जिंदगी में, कोई तो बता दे मुझे। तकदीर की लकीरें अजीब है, कौन पढ़ें आज इनको यहाँ। लकीरों में उलझी तक़दीर मेरी, कोई तो बता दे मुझे। कौन है जो मेरी तकदीर के, दरवाजे पर आज है खड़ा।…

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देश हमारा जीतेगा

जलसे-जुलूस अब ख़त्म हुए, दंगो से पीछा छूटा था,  पर कोरोना ने आ घेरा, जिससे ये कुटुंब अछूता था|बर्ड फ़्लू-कभी स्वाइन, कभी गोरो ने आ घेरा था,  अब कोरोना की बारी आई,जिसका चीन बसेरा था| भारत के बाशिंदो पर, विपदा के बादल आन पड़े, श्रमिको के टूटे छप्पर में,सूने राशन के डिब्बे जान पड़े|महामारी की इस…

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लिख जाएँ एक इतिहास नया

(श्रीमती कविता मल्होत्रा ) लॉकडाऊन की अवधि के दौरान तमाम लोगों की सोच के अनुसार कई तरह के सँदेशों का आदान-प्रदान दिखा। अधिकतर लोगों के बीच चर्चा का एक ही विषय था कि कोरोना वायरस मानव-निर्मित है या प्राकृतिक आपदा। इस प्रश्न के उत्तर में स्थित सबकी अपनी अलग सोच दिखी। ज़्यादातर लोग, जो केवल…

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कोरोना’ के कारण तबाही-ही-तबाही है

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘कोरोना’ के  कारण तबाही-ही-तबाही है, गाँव से शहर तक  बेरोजगारी बढ़ गई है. गंभीर चुनौती है गरीबों के लिए रोजगार, विकास की सारी  योजनाएं कुहर रही है. असंभव को संभव करने वाला कामगार, भुखमरी के कगार पर खड़ा दिख रहा है. विकास के कार्य में जुटे मजदूरों के लिए, अपना पेट पालना…

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लॉक डाउन में दिव्य ज्ञान

कोई न कोई ज़ुर्म तो जरूर था ही,जिसमें सभी शामिल थे,तभी तो हर इन्सान चेहरा छुपाए घूम रहा है” सच ऐसे हालात में घर रहना ही बचाव है, अंधेरे में हाथ थामने का समय है और सुनसान में गुनगुनाने का है, एक दूसरे को धीरज बंधाने का है पर इस दौरान पति पत्नी,बच्चे, छोटे बड़े,सब…

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“माँ तुझे सलाम “

सीमा गुप्ता (मशहूर शायरा एवं समाजसेवी) लबो पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती “  देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना  जी का ये शेर माँ शब्द के आस्तित्व को पूरी तरह  से सार्थक करता  है. माँ जो इस धरती पर खुद भगवन का ही  स्वरुप है…

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माँ

।।माँ की महिमा कौन बखाने ।। गंगा जल सम पावन  ममता प्रेमसुधा रस साने । सुखद तृप्ति अनवरत  प्रदात्री   माँ को कहते साधु सयाने।। माँ की महि,,,,,,,।। जगकल्याणी सृजन है जग की   सृष्टा ईश्वर की माता । सब रस में पावनता भरती  सहती कष्ट न मन उकताता।। सुत के हित मे सब दुख…

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आत्मा

कितना हल्का हल्का सा लग रहा है शरीर। अहा! जैसे सारे तनावों और विकारों को किसी ने जड़ से उखाड़ फेंका हो! ऐसा लगता है जैसे 30 -40 साल से नहीं सो पाई थी और आज इतनी गहरी नींद पूरी कर के उठी हूँ। सच बहुत फ्रेश लग रहा है। चलो अच्छा है जाने कब…

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