Blog
जन-गण-मन अधिनायक….. : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामा आइये हम अपनी स्वतंत्रता की एक और वर्षगांठ गर्वोन्मुख मस्तक के साथ मनाएं । हमारा राष्ट, हमारा ध्वज और हमारा राष्टगान हमारी धरोहर है और हर भारतीय इस पर गर्व करता है । ‘‘जनगण मन अधिनायक’’ की मधुर स्वरलहरियां हमारे तन और मन में जोश भर रहीं हैं । हम नतमस्तक हैं अपने…
देश की तरक्की के लिए धन और ब्रेन, ड्रेन को रोकना जरूरी*
(राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के पांच साल) स्कूल समाजीकरण के प्राथमिक माध्यम के रूप में नागरिकों के निर्माण में पहला और सबसे महत्वपूर्ण घटक है। इवान इलिच ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कूलिंग सोसाइटी’ (1971) में तर्क प्रस्तुत किया है कि “शिक्षा का संस्थागतकरण एक अति-संस्थागत समाज के निर्माण को गति प्रदान करता है। शिक्षा प्रणाली एक…
हिंदी के मनीषी विद्वान् आचार्य निशांतकेतु का निधन
17 अगस्त, 2025 लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार, बहुभाषाविद्, उपन्यासकार, कहानीकार, कवि, आलोचक, निबंधकार, कोशग्रंथों एवं धर्म-अध्यात्म विषयक ग्रंथों के रचयिता आचार्य निशांतकेतु का निधन 90 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के पालम विहार में हो गया। वे विगत दिनों से अस्वस्थ थे। वे पत्नी प्रो. सुखदा पांडेय, पुत्रियांँ प्रो. रचना सुचिन्मयी, डॉ. शैली भाषांजलि, पुत्र अभिषेक दिनमान…
भारत@79: अटूट शक्ति की ओर
“79 वर्षों की यात्रा से विश्व-नेतृत्व की दहलीज़ तक — भारत का समय अब है।” “उन्नासी वर्ष की यात्रा में भारत ने संघर्ष से सफलता, और सफलता से नेतृत्व की राह तय की है। आज हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, उभरती अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में खड़े हैं। परंतु असली लक्ष्य अभी…
(रिश्तों की हत्या का आधुनिक ट्रेंड)
नौकरी लगते ही पतियों को छोड़ रही हैं आधुनिक औरतें “रोज़गार मिला, रिश्ते छूटे,जिसने पढ़ाया, वही पराया हो गया” विवाह अब त्याग और समर्पण की बजाय स्वार्थ और स्वतंत्रता की शरण में चला गया है। अनेक मामले सामने आ रहे हैं जहाँ पति ने पत्नी को पढ़ाया, नौकरी लगवाई, पर जैसे ही वह आत्मनिर्भर हुई,…
लघुकथा: “चार बजे की माँ”
(लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ) सुबह के चार बजे थे। बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँखें खुल गई थीं — जैसे उसकी जिम्मेदारियाँ अलार्म से भी पहले जाग जाती हों। बिस्तर छोड़ते ही ठंडी ज़मीन पर पैर रखते हुए एक ही ख्याल…
“देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश”
पहाड़ों का सर्वनाश: उत्तराखंड की आखिरी चेतावनी “देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश” उत्तरकाशी के थराली में बादल फटने से हुई भीषण तबाही उत्तराखंड के पर्यावरणीय संकट की गंभीर चेतावनी है। विकास के नाम पर हो रही पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, अवैज्ञानिक निर्माण और बेतरतीब पर्यटन ने पहाड़ों की सहनशीलता को खत्म कर…
“संवाद का अभाव, संस्कारों की हार, स्कूलों में हिंसा समाज की चुप्पी का फल”
हिसार में शिक्षक जसवीर पातू की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवादहीनता, विफल शिक्षा व्यवस्था और गिरते नैतिक मूल्यों का कठोर प्रमाण है। आज का किशोर मोबाइल की आभासी दुनिया में जी रहा है, जबकि घर और विद्यालय दोनों में उपेक्षित है। मानसिक तनाव, संवाद की कमी और नैतिक शिक्षा…
गुरुग्राम में सिंधी संस्कृति का भव्य उत्सव: ‘सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम’
गुरुग्राम: श्री झूलेलाल सेवा समिति, गुरुग्राम द्वारा सिंधी संस्कृति, कला और साहित्य को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या “सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम” का आयोजन 5 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह मनमोहक कार्यक्रम शनिवार शाम 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक अपैरल हाउस, सेक्टर 44, गुरुग्राम में आयोजित किया गया। इस आयोजन…
