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कालजयी रचनाकार बंकिमचन्द्र चटर्जी-राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के प्रणेता
*(26 जून जन्मदिवस के बहाने)* पहले कलकत्ता में कवियों कलाकारों का भी अपना एक दौर था, जो अपने इस समाज में निस्संदेह सबसे ऊपर और लोकवरेण्य माना जाता था। कलकत्ता का बंगाली समाज आज भी अपने मुकुट के रूप में इसी वर्ग को धारण करता है। बंगाल के लोग अपनी अस्मिता की पहचान आधारभूत तौर…
हरियाणा सरकार के बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में स्मारक निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम
मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन ऐसे कम ही होते हैं जो शोषितों के अधिकारों और न्याय के लिए संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए किसी भी बलिदान के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसे ही एक योद्धा लक्ष्मण दास/माधोदास (बाबा बंदा सिंह बहादुर) का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में राम देव के घर…
भारतीय संयुक्त परिवारों की पृष्ठभूमि है : विजय गर्ग
भारतीय संयुक्त परिवारों की पृष्ठभूमि उस मानवीय संवेदना से जुड़ती है, जिसमें सारे संसार को अपना परिवार माना जाता है। हजारों वर्षों से भारतीय परिवारों की पहचान धन, पद, संपत्ति से नहीं रही है, बल्कि उनमें निहित मूल्यों, विश्वासों, नियमों और संकल्पनाओं से रही है। यहां तक कि राजतंत्र में भी परिवारों का महत्त्व उसी…
क्या हो गया है इन औरतों को?
“जब कोई महिला अपराध में शामिल होती है, तो समाज उसकी परवरिश, चरित्र और कोमलता पर सवाल उठाता है, जबकि पुरुष अपराधियों को अक्सर सहानुभूति या ‘दबंगई’ का जामा पहनाया जाता है। अपराध का कोई लिंग नहीं होता और स्त्री भी इंसान है — जिसमें अच्छाई-बुराई, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी, सब कुछ समाहित है। समाज को…
शोषक भी हम – शोषण भी हमारा, फिर न्याय के लिए भटकना कैसा..!
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक़ एवं पत्रकार जौनपुर यूपी स्टार्टअप से बात शुरू हुई औऱ जज के घर करोड़ों के अधजले नोट मिले, मुद्रा लोन को बढ़ावा दिया जाना था औऱ अडानी को अरबों का लोन मिला, स्वरोजगार की बात चली औऱ सरकारी नौकरियों को कम कर दिया गया। रोजगार देने वाले 70% से…
सोनम-राजा रघुवंशी की कथा ने हिला दिया समाज
राजनीतिक सफरनामा कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सोनम और राजा रघुवशी की कहानी ने आम लोगों को चिन्तित कर दिया है । लगातार घट रही ऐसी घटनाओं से समाज का चिन्तित होना जायज भी है । ऐसा भी अनुमान लगाया जा सकता है कि बहुत सारी ऐसी घटनायें भी होतीहोगीं जो समाज के सामने नहीं आ पा रहीं…
रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए
रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को ‘होम-डिलीवरी’ में बदल दिया है। दिलचस्पी कम होते ही लगाव की नींव दरकने लगती है—माँ-बेटे के फ़ोन-कॉल में ‘ऑर्डर डिलिवर्ड’ का नोटिफ़िकेशन रह जाता है, दोस्ती ‘वीडियो क्लिप फ़ॉरवर्ड’ तक सिमट जाती है, और दाम्पत्य…
हृदय परिवर्तन : अजय कुमार पाण्डेय
सात साल पहले रामदीन के लड़के ने विजातीय लड़की से शादी क्या कर ली रमाकांत ने पूरा गाँव सिर पर उठा लिया था। भरी पंचायत में रामदीन के परिवार की इज्ज़त को तार तार कर के रख दिया था। रमाकांत गांव के रसूखदार व्यक्ति थे, समाज के साथ साथ सारा गांव उनकी इज्ज़त करता था…
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ
इस जून में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ है। भारत के इतिहास में यह एक काला धब्बा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब मीडिया को चुप कराने के लिए हथौड़े की रणनीति का इस्तेमाल किया था। आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर होने से पहले ही, दिल्ली के अखबारों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई…
बिल्ली को ही सौंपी गई है दूध की रखवाली की जिम्मेदारी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने हाल ही में पाकिस्तान को आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी करने वाली समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह ठीक वैसे ही है जैसे- बिल्ली को ही दूध की रखवाली की जिम्मेदारी दे दी जाए। पिछले दिनों पहलगाम के आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका क्रिस्टल क्लियर थी। वे संदिग्ध…
