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तेरे दर पर आया हूॅ…… !
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘बाप रे इतने सारे नोट’’ आम आदमी के मुख से तो यह वाक्य निकल ही जाता है जब किसी के घर से नोटों की ढेर सारी गड्डियां बरामद होती हैं । चलो अच्छा है इस बहाने आम आदमी नोटों को भी देख लेता है और नोटों की गड्डियों को भी वरना अब तो…
भारत विकास परिषद सृष्टि शाखा के तत्वाधान में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ ‘एक शाम मां के नाम’
पिलखुवा, भारत विकास परिषद सृष्टि शाखा के तत्वधान में एक विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ कार्यक्रम के संयोजक| वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल रहे| कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार| डॉ वागीश दिनकर ने की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान से सोहन लाल शर्मा प्रेम रहे।आज के कार्यक्रम का…
कौन कहता है धरती पर नहीं भगवान : सीमा शर्मा
माँ के त्याग ,समर्पण , योगदान और उनके प्यार के प्रति और सम्मान सभी मातृ शक्तियों को समर्पित करते है इन पंक्तियों के साथकौन कहता है धरती पर नहीं भगवानहमे देखा है इस धरती पर देवी के रूप में है माँ”कोख में रखकर नौ महीने तकलीफ़ सहन करती है माँबाहरी दुनिया के दर्शन भी कराती…
विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन
आप सभी को जानकर होगा कि कल दिनांक 5 मई रविवार को सुमित्रा देवी पब्लिक स्कूल सरस्वती एनक्लेव कादीपुर गुरुग्राम में एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें आए हुए कवियों ने हिंदी के उत्थान के लिए छात्र एवं छात्राओं में हिंदी के प्रति जागरूकता पैदा कर अपनी कविताओं के माध्यम से कार्यक्रम…
लड़कों के साथ बेड टच
मम्मी में स्कूल नहीं जाऊंगा, स्कूल नहीं जाऊंगा। छोटा सा बच्चा माधव नींद में चिल्ला रहा था। माधव की मम्मी नेहा को बड़ी विचित्र लगी उसकी यह हरकत। ऐसा तो पहले माधव ने कभी नहीं किया नींद में। माधव तो 5 साल से लगातार स्कूल जा रहा है। पढ़ने में भी खूब अच्छा है। कभी…
अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्…..
पंकज कुमार मिश्रा, मिडिया विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी महाभारत के बाद युधिष्ठिर आश्चर्य में डूब गए। धीमे स्वर में माधव से कहा – यह महाभारत क्यों हुआ ? जबकि वह स्वयं जानते थे कि श्री कृष्ण नहीं होते तो पाण्डु पुत्र भिखारी होते, जैसे 1985 से पहले कश्मीर में पंडित और 2014 से पहले…
जो लोग लक्ष्य नहीं बनाते हैं,वे लक्ष्य बनाने वाले लोगों के लिए काम करते हैं
यदि आप अपनी योजना को सार्वजनिक कर दें, तो आप सामाजिक दबाव की वजह से उस पर अमल करने के लिए ज़्यादा समर्पित हो जाएँगे। योजना बताती है कि आदर्श परिस्थिति में क्या होना चाहिए। समीक्षा बताती है कि क्या हो रहा है और मनचाहा परिणाम पाने के लिए आपको क्या फेरबदल करना चाहिए। योजना…
मैं शिव तो नहीं : महेंद्र शर्मा (हास्य कवि)
मैं शिव तो नहीं, जो पी जाऊं गम के हलाहल को। आंसुओं का अथाह सागर क्या कभी सूख पाएगा? कहने को सभी कहते हैं-दुख के पश्चात् सुख मिलता है, प्रत्येक रात प्रभात के समझ दम तोड़ देती है। रामायण में तुलसीदास ने लिख दिया है, ‘सब दिन होत न एक समाना। मैं नहीं मानता इस…
नृत्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने की एक कला है
नृत्य एक कला है जो न केवल हमें शारीरिक रूप से सक्रिय रखने में मदद करती है बल्कि शब्दों का उपयोग किए बिना खुद को अभिव्यक्त करने में भी मदद करती है। कई भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य रूप संस्कृति, समाज, पौराणिक कथाओं और परंपराओं के बारे में संदेश फैलाने का एक लोकप्रिय माध्यम बने…
