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बंकिमचंद्र के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

भारतीय स्वतंत्रता काल में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत -‘वंदे मातरम्’- जो 1937 में भारत का राष्ट्रगीत बन गया, जिसके रचयिता बंग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मदिन पर “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र नाथ शुक्ल एवं महासचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन…

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“एहसास चाँद के” काव्यसंग्रह  की समीक्षा

समीक्षक:- कमल कांत शर्माएहसासों  को जीवन की सफलता के मामले में  एक बड़ा मानक माना गया है, और जब अपनें दूर जाकर रहने लगते है तो इन एहसासों को सहेजने, संभालने की और भी ज्यादा  आवश्यकता  महसूस की जाती है।  मधुर रिश्तों के लिए सबसे जरूरी होता है, आपसी सामंजस्य और समर्पण का भाव, और जब…

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जीवन गरम चाय की प्याली

पुस्तक समीक्षा : कविता मल्होत्रा ये गर्म चाय की प्याली नहीं बल्कि जीवन को सार्थक दृष्टिकोण देती वो खुशहाली है, जिसके अमृत पान से समूचे ब्रह्मांड में जागृति रूपांतरित हो सकती है। समीक्षा तो नहीं हो पाएगी मुझसे इस अनाहद नाद की कोशिश ज़रूर रहेगी,जागृति संग रहे आपके हर अल्फ़ाज़ की  कई दिन से इस अनूठे…

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चिंता का सबब बनता गिरता हुआ रुपया 

-सत्यवान ‘सौरभ’ रुपये के मूल्यह्रास का मतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कम मूल्यवान हो गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 77.44 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। सख्त वैश्विक मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और जोखिम से बचने, और उच्च चालू खाता घाटे से भारतीय रुपये के लिए गिरावट…

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सम्मान की धज्जियां उड़ाता लूटतंत्र !

खुला समाज कभी खुला नही होता, रैपर में बंद होता है। पैक्डनेस ही ओपन सोसाइटी है , अपनी पॉलिटिक्स है अपना रहन सहन है ।ओपन सोसाइटी में अभिव्यक्ति का खुलापन किसी मुखौटे को लगा कर ही पाया जाता है ताजा उदाहरण विधानसभा में अखिलेश यादव जी है । मुखौटा लगाने और उसे ही वास्तविक चरित्र…

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पर्यावरण सुरक्षित रहे यदि मानव मन लक्षित रहे

कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्थायी स्तंभकार) भला चारित्रिक गठन अनुवांशिक कहाँ होता है अनासक्त प्रेम जहाँ पर्यावरण सुरक्षित वहाँ होता है ✍️ विश्व का असीम और निःशुल्क पुस्तकालय मानव मन में ही विद्यमान है, जो हर किसी को अपने मन का अध्ययन करने में सहायक होता है। लेकिन इस पुस्तकालय तक पहुँचने का न तो कोई…

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उपन्यासकार एवं कथाकार गीतांजलि श्री को मिला 2022 का बुकर सम्मान

लाल बिहारी लाल ……………………………………………………………………………………………………….. इस साल का मैन बुकर सम्मान भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री का उपन्यास ‘रेत समाधि’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘टॉम्ब ऑफ़ सैण्ड’ के लिए दिया गया है जिसे डेजी राकवेल ने अंग्रैजी अनुवाद किया है। यह पहली बार है कि किसी भारतीय भाषा के अनुवाद को यह अवॉर्ड मिला है।………………………………………………………………………………………………….. नई दिल्ली। उपन्यासकार एवं कथाकार गितांजली श्री…

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स्व. प्रो. बाँके बिहारी झा करील द्वारा रचित दो  काव्यसंग्रह “अभिसारिका एवं “हितोपदेश” का भव्य लोकार्पण

प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 22 मई 2022 रविवार को हिन्दी भवन दिल्ली में स्व. प्रो. बाँके बिहारी झा करील द्वारा रचित दो  काव्यसंग्रह “अभिसारिका -आत्मा से अनंत तक” एवं “हितोपदेश” का भव्य विमोचन किया गया। स्व. करील जी बिहार (मिथिला) के एक जाने माने संत, कवि,लेखक ,शिक्षाविद एवं समाजसेवक रहे हैं। उनकी पूर्व रचना “करील कादम्बिनी”…

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कौन सुलगा रहा है हमारे भारतवर्ष को धर्म के नाम पर?

आए दिन दंगों की वजह से भारत की छवि खराब होती जा रही है ।क्या किसी को कारण पता है? दंगों की वजह क्या है ? दंगों के पीछे जो खेल खेला जा रहा है। हम भारतवासी समझ ही नहीं पा रहे ।आपको नहीं लगता है कि ये सिर्फ और सिर्फ साजिश है ,भारत की…

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संस्मरण : यादगार बोहाग बिहू

बैशाख का महीना असम के लिए खास होता है। बैशाख जिसे असमिया में बोहाग कहते है, इस महीने में बोहाग बिहू मनाया जाता है। यह रोंगाली बिहू और भोगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है। गांवों में घर धन-धान्य से भरे होते है। भोग करने के साधन होते हैं और फल-फूल से भरे…

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