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विश्व एड्स दिवस ( 1 दिसंम्बर) पर विशेष एड्स का जागरुकता ही बचाव है-लाल बिहारी लाल
++++++++++++++++++++++++++++++++++ लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मूँह पर सफेद धब्बे,,सुखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदी पर एड्स की संभावना हो सकती हैं।++++++++++++++++++लाल बिहारी लाल नई दिल्ली।लगभग 200-300 साल पहले इस दुनिया में मानवों में एड्स का नामोनिशान तक नही था। यह सिर्फ अफ्रीकी महादेश में पाए जाने वाले एक विशेष प्रजाति के बंदर में पाया जाता था । इसे कुदरत…
गोल्डन बुक ऑफ रिकार्ड द्वारा अनुमोदित कार्यक्रम में शिखा पोरवाल वैनकुंवर कनाड़ा से भाग लेंगी
आयोजक डॉ राजीव पाण्डेय कवि जी ने बताया कि“भारत रत्न काव्य महोत्सव”हिंदी साहित्य का अकल्पनीय ऑनलाइन आयोजन किया हैं।देश विदेश के 300 रचनाकारों की वाणी से गुंजायमान होगी भारत रत्न प्राप्त महापुरुषों की गाथा।21 नवम्बर 2021 प्रातः 10 बजे से रात 10 बजे तक।अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन के फेसबुक पेज पर लाइव रहेगा। सभी विद्वजनों का…
धनाढ्य परिवारों को मिलने वाला आरक्षण गंभीर विषय है!
सामान्य वर्ग के लोग गांवों से रोजगार और बेहतर जीवन की खोज में महानगरों में धक्के खाते है , मजदूरी करते है और आरक्षण के विषबेल में लिपटा संविधान उनकी सुधी नहीं लेता क्योंकि वो सामान्य श्रेणी से है और महानगरों में कमा रहे । वहीं तुलनात्मक रूप से अधिक धनाढ्य पिछड़े और दलित सुविधायुक्त…
जो तेरी रज़ा मेरी भी वही
श्रीमती कविता मल्होत्रा (संरक्षक – उत्कर्ष मेल) Your mercy is my social status -Guru Nanak परिचय इतना इतिहास यही जो तेरी रज़ा है मेरी भी वही ✍️ निर्बाध गति से तो केवल प्रकृति का दरिया बहता है, मानव जाति तो मात्र उस गति की ताल से अपनी ताल मिलाने का प्रयास किया करती है।जीवन का…
उम्मीद: नन्हे दीपों के उजियारे से
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव तिमिर के नाश का पर्व दीपोत्सव द्वार पर दस्तक दे रहा है । हमें अमावश्या की गहन काली रात को नन्हें दीपों का उजियारा कर प्रकाशवान करना है । प्रकाश ही तो हमारे पथ को आलौकिक करता है । पर अंधियारा इतना फेल चुका है कि नन्हे-नन्हे दीपों का प्रकाश हमारा मार्ग…
गहन मंथन और अध्ययन के बाद का सत्य !
यदि कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों पर नजर डाले तो पुरातन समय में बहुत सारी घटनाएं ऐसी है जिसके विषय में चिंतन , मंथन और गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है । जिसके बाद ये पता लगता कि काश यह ना होता तो इतिहास दूसरा होता । ऐसे ही कुछ प्रमुख घटनाओं ने हमारी भारतीय संस्कृति और…
समरथ को नहीं दोष गुसांई
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव रावण की ऊंचाई और बढ़ा दी गई है । रावण तो हर साल ऊंचा होता जा रहा है, उसे जितना भी ऊंचा हम बनाते जा रहे हैं उतना ही रावणीय कृत्य भी बढ़ता जा रहा है । हम तो रावण के पुतले का दहन इस विचार के साथ करते हैं कि रावण…
रहे इस रूह की चूनर धानी
मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…
गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’
(26 अक्टूबर, 1890 से 25 मार्च, 1931) प्रारंभिक जीवन :- गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर, 1890 को इलाहाबाद के अतरसुइया मुहल्ले में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जयनारायण था जो हथगाँव, (फतेहपुर, उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। उनके पिता एक गरीब और धार्मिक प्रवित्ति पर अपने उसूलों के…
आसमान पर उड़ें, पर जमीन से जुड़ें : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
सर्वप्रथम आप सभी को दशहरा पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं । प्रत्येक वर्ष अपने पर्व–त्यौहारों को श्रद्धापूर्वक हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं । अच्छी बात है किन्तु ज्यादा जरूरी यह है हमारे लिए कि पर्वों–त्यौहारों को मनाएँ पर उसके महत्त्व–महिमा को समझने का प्रयास करें और अपनी जीवन शैली में आत्मसात…
