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बैसाख़ पर गुलज़ार हो हर हृदय में प्रेम की शाख़

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, संरक्षक) प्रेम के पल्लवों से गुलज़ार हो जाए हर शाख़ नवचेतना हर रूह में उतरे तो घटित हो बैसाख़ वक्त की रफ़्तार और प्रकृति के प्रहार धीमे धीमे अपने विभिन्न रंगों से समूचे विश्व को रंग रहे हैं।वैश्विक स्वास्थ्य केवल दैहिक उपकरणों की देख-भाल का परिमाण नहीं है, बल्कि वैश्विक मानसिकता…

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राजनीतिक सफरनामा : मैया कर दो दुष्टों का संहार

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नवरात्र तो आत्म जाग्रति का पर्व है । हर छैः माह बाद नवरात्रि पर हम माॅ की आराधना कर दुष्टों के संहार की प्रार्थना करते हैं । श्रद्धा, भक्ति से प्राप्त शक्ति हमें आगे बढ़ने की दिशा देती है । आज समूचे विश्व को ऐसी श्क्ति की आवश्यकता महसूस हो रही है ।…

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बेगम हज़रत महल

(तारीख अज्ञात 1820 से 07 अप्रैल, 1879) प्रारंभिक जीवन :- बेगम हज़रत महल का जन्म अवध प्रांत के फैजाबाद जिले में सन् 1820 में हुआ था। उनके बचपन का नाम मुहम्मदी खातून था। वे पेशे से गणिका थीं और जब उनके माता-पिता ने उन्हें बेचा तब वे शाही हरम में एक खावासिन के तौर पर…

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मंत्रालय वितरण में दिखा खुन्नस , योगी ने खुद सम्हाली अधिकतर महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी !

 जब यूपी में योगी 2.0 के 52 सहयोगियों ने शपथ ली तो जातिवादी समीकरण  ,प्याज के छिलके की तह परत दर परत खुलते दिखे। हद्द तो तब हो गई जब शपथ के बाद ग्रुप फ़ोटो सेशन हुआ था , बीच में मोदी , मोदी के एक बगल राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और दूसरी बगल योगी।…

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1 अप्रैल से दिल्ली की सड़कों पर दिखेगा बड़ा बदलाव, इस एक गलती पर 10,000 रुपये जर्माना; हो सकती है जेल भी

देश की राजधानी दिल्ली में सड़कों पर आवागमन को लेकर आगामी 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिससे सभी तरह के वाहन चालकों को बड़ा आराम मिलेगा। दरअसल, 1 अप्रैल से बसों और माल वाहनों को सड़कों पर अपनी ही निर्धारित लेन में चलना होगा। ऐसा नहीं करने वालों पर 10,000 रुपये का…

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बुरा न मानो, होली है

होली रंगों का त्योहार है। इस दिन लोगों द्वारा एक दूसरे पर रंगीन पाउडर और रंगीन पानी छिड़का जाता है। फागुन के महीने में पूर्णिमा (फरवरी-मार्च) के दिन पड़ने वाला यह वसंत उत्सव प्राचीन काल में ‘मदन-उत्सव’ के रूप में जाना जाता था। ब्रज की होली (उत्तर प्रदेश का मथुरा-वृंदावन क्षेत्र पारंपरिक रूप से कृष्ण…

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नारी का सम्मान जग का कल्याण – लाल बिहारी लाल

हमारी भारतीय संस्कृति में सदैव ही नारी जाति का स्थान पूज्यनीय एवं वन्दनीय रहा है, नारी का रूप चाहे मां के रूप में हो, बहन के रुप में हो, बेटी के रुप में हो याफिर पत्नी के रूप में हो सभी रुपों में  नारी का सम्मान किया जाता है।  यह बात आदिकाल से ही हमारे पौराणिक गाथाओं में…

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सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

आप सभी को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं । सभी मंदिरों में बड़ी–बड़ी कतारें हैं जो भगवान के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास का संकेत देती हैं । आज भले ही ज्योतिष के दृष्टिकोण से कोई महासंयोग बन रहा हो, उस विषय में न जाकर, जो अच्छा संयोग मुझे प्रतीत हो रहा…

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अवस्था कोई भी हो व्यवस्था प्राकृतिक ही होनी चाहिए

कविता मल्होत्रा करोना काल ने ये तो साबित कर ही दिया कि शिक्षा सिर्फ़ पुस्तकों से सीखना और तथ्यों को कंठस्थ करना मात्र नहीं है।बल्कि प्रकृति के हर क़दम का अवलोकन करने की सतत प्रकिया है, जिसमें जीवन का सार छिपा है।हर मौसम,पत्तों के झड़ने,उगने बहार और इंतज़ार के सहज स्वीकार करने की क्रियाएँ सिखाता…

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राजनीतिक सफरनामा : चुनावी समीकरणों में उलझा मतदाता

                                                                                          कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सारे विष्व में उथल-पुथल मची हुई है । ‘‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’’ के सिद्धांत पर अब दुनिया चल रही है । इसमंे जिसके हाथ मं छड़ी तक नहीं है वह पिस रहा है । कोरोना की मार भूल कर अपनी लाठी को कच्चे तेल से चमका का कर वे उठ खड़े हुए…

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