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खूब लड़ी ‘दीदी’ वह तो …..(सम्पादकीय)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) होली भी गई और जिस बात की आशंका भी वह भी हो ली । कोरोना ने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाना प्रारंभ कर दिया है । जबकि लोगों ने लगातार गिरते आंकड़ों को देखकर–सुनकर मानों निश्चित होना प्रारंभ कर दिया था कि शायद हम कोरोना से मुक्त…

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नौकरी ही नहीं तो शिक्षक पात्रता परीक्षा के नाम पर ठगी क्यों ?

(   हरियाणा के मुख्यमंत्री का विधान सभा में जवाब कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की अब जरूरत नहीं कितना शातिराना है सोचिये? जब प्रदेश में शिक्षकों की जरूरत ही नहीं तो फिर क्यों पिछले दस सालों से शिक्षक पात्रता के नाम पर बार-बार बेरोजगार युवाओं की जेब काटी जाती रही इनको तो सब पता ही…

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हर्षोल्लास के पावन पर्व होली की अनन्त शुभकामनाएं : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

सर्वप्रथम  आप  सभी  को  हर्षोल्लास  के  पावन  पर्व  होली  की  अनन्त  शुभकामनाएं ।  बात  हम  होली  और  जो  ‘हो  +  ली’  (कोराना  महामारी)  उसकी  भी  करेंगे ।           जो  बात  हो़ली,  जिससे  पूरा  विश्व  अचम्भे  में,  सकते  में  आ  गया  था ।    2021  आते–आते  हम    खुशी  मनाने  लगे  कि  चलिए  अब  तो  बहुत  सारी  वैक्सीन …

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अभिव्यक्ति संस्था के कार्यक्रम “होली की बहार, काव्य की बौछार” में रचनाकारों ने खेली काव्य-होली

दिनांक १४ मार्च २०२१ का दिन अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्थाके लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा क्योंकि “अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था” की ओर से, होली के उपलक्ष में, “होली की बहार, काव्य की बौछार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन, रोहिणी (दिल्ली) में कार्यक्रम आपकीं दोस्त Madhu Madhubala Labana जी के निवास स्थान पर सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अभिव्यक्ति मंच विगत छः…

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कुछ मोती ऐसे,कोहेनूर जैसे

कुछ शब्द या पंक्तियां ऐसी होती हैं जो  जिन्दगी में मन को छू जातीं हैं,अगर उनका मनन कर के व्यवहार में ले आएं तो जिन्दगी ही बदल देतीं हैं।शब्द भले ही निःशुल्क लेकिन यह चयन पर कीमत मिलेगी या चुकानी होगी।पिछले 45-50 वर्षों से मैं जब भी कोई अच्छा प्रेरक विचार पढ़ता हूं तो उसे…

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न्याय प्रणाली की सूरत बदलनी चाहिए !

मानव गलतियों का पुतला होता है ऐसा आप सबने जरूर सुना होगा किन्तु मानव जो भी गलतियां करता है उसके पीछे या तो उसकी अपनी मजबूरी होती है या उसका अपना बनाया दकियानूसी सिस्टम ! जी हां ! आज मै एक पत्रकार और लेखक होने के नाते जिस मुद्दे को आपके सामने उठाने जा रहा…

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टूटे पैर वाले पोस्टर

(राजनीतिक सफरनामा) कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सबकी अपनी-अपनी किस्मत होती है दीदी के पैर की भी अपनी ही किस्मत है । चोट खाया पैर बड़े-बड़े पोस्टर-बेनरों में पूरी आभा के साथ दिखाई देने लगा है । जहां कल तक पश्चिम बंगाल की गलियों में चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर चमक रहे थे अब वहां टूटे हुए पैर की…

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Redecorate your life with divine grace

(Kavita Malhotra) We are just a bunch of atoms travelling through space, assembling and disassembling. माना कि प्रतिस्पर्धाएँ हर किसी के अँदर छुपी प्रतिभाओं को निखारने का काम करती हैं, लेकिन जब प्रतिस्पर्धाओं में स्वार्थ निहित हो जाते हैं तब वो जनहितकारी नहीं रह पातीं। आजकल हर क्षेत्र की राजनीति अपनी ही मैं के रँग…

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काव्य लेखन की कुंजी है “छंद विन्यास’ काव्य रूप : राजेश कुमार सिन्हा

एक ख्याति लब्ध शल्य चिकित्सक का कवितायें लिखना या दूसरे शब्दों में कहें तो सिर्फ कवितायें नहीं लिखना बल्कि छन्द पर आधारित कवितायें लिखने के लिए काव्य लेखन कुंजी के रुप में एक पुस्तक लिख देने को सही मायने में मणि कांचन संयोग कहा जा सकता है,जो विरले ही देखने को मिलता है।डा संजीव कुमार…

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अधिकारों की अहवेलना कितना जायज !

______ आपने चुनावों के वक्त  देखा होगा कि बातों और वादों  का मश्रफ क्या होता है !  चुनाव आने से पहले और चुनाव बीत जाने के छ माह बाद दो आपसी आभासी मित्र  फेसबुक पर वैचारिक मतभेद प्रकट करते दिख जाते है ,यहां तक कि गाली गलौज भी कर लेते है और तो और आपसी…

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