Special Article
The Person is Constantly Becoming Lonely in Private life : Vijay Garg
That report from the World Health Organization shocked that every sixth human being in the world is alone. Crores of people in the world are living a life of absolute silence by being content with broken relationships and dialogue. In the right way, these silence within a human being has been millions of lives. Ironically,…
उधम सिंह सरदार: एक गोली, सौ सालों की गूंज
उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक विचार थे—संयम, संकल्प और सत्य का प्रतीक। जलियांवाला बाग़ के नरसंहार का प्रत्यक्षदर्शी यह वीर 21 वर्षों तक चुपचाप अपने मिशन की तैयारी करता रहा और लंदन जाकर ओ’डायर को गोली मारकर भारत का प्रतिशोध पूरा किया। उनकी चुप्पी न्याय की गर्जना थी, जो आज भी…
अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्..!
पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी, सम्पर्क सूत्र 8808113709 महोपनिषद् 4.71 वो में एक सूक्ति है :- अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ जिसका आशय है कि संकीर्ण सोच वाले ही “अपना–पराया” करते हैं; उदारजन पूरी पृथ्वी को परिवार मानते हैं। आज जो लोग सांप्रदायिक राजनीति, जातिवाद…
हंगामा करना बन गया है परिपाटी
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सांसदों और विधायकों का ससंद या विधानसभा के अंदर किया जाने वाला व्यवहार अब आम व्यक्तियों को भी अखरने लगा है । वित कुछ वर्षों से यह परिपाटी सी बनती जा रही है कि जब भी संसद का या विधानसभा का सत्र प्रारंभ होगा तब ही विपक्ष हंगामा करेगा ।…
ड्रोन की सदी
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। दुनिया को पाकिस्तान के नापाक इरादों से भी अवगत कराया गया। यह निश्चित रूप से वायु सेना की श्रेष्ठता का एक शानदार प्रदर्शन था, लेकिन सिर्फ़ इसी से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। चीफ ऑफ…
“संवाद का अभाव, संस्कारों की हार, स्कूलों में हिंसा समाज की चुप्पी का फल”
हिसार में शिक्षक जसवीर पातू की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवादहीनता, विफल शिक्षा व्यवस्था और गिरते नैतिक मूल्यों का कठोर प्रमाण है। आज का किशोर मोबाइल की आभासी दुनिया में जी रहा है, जबकि घर और विद्यालय दोनों में उपेक्षित है। मानसिक तनाव, संवाद की कमी और नैतिक शिक्षा…
“गिरते पुल, ढहती ज़िम्मेदारियाँ: बुनियादी ढांचे की सड़न और सुधार की ज़रूरत”
वडोदरा में पुल गिरना कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि भारत के जर्जर होते बुनियादी ढांचे की डरावनी सच्चाई है। पुरानी संरचनाएं, घटिया सामग्री, भ्रष्टाचार और निरीक्षण की अनुपस्थिति — यह सब मौत को दावत दे रहा है। राbजनीतिक घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन टिकाऊ निर्माण और जवाबदेही की योजनाएँ नदारद हैं। अब वक़्त है…
नॉर्मल’ क्या है, ये सवाल खुद से पूछों, दूसरों से नहीं
हर एक मिनट का हिसाब रखती, भागदौड़ भरी वर्तमान जीवनशैली में सबसे बड़ी और लगातार उभरती हुई समस्या है हमारा स्वास्थ्य। प्रतिदिन के तनाव से उपजती और मौत के मुंह में ले जाती गंभीर बीमारियों को देखते हुए “शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्” यह संस्कृत सूक्ति बिल्कुल सही साबित होती है। जिन्हें हमारे समाज में अक्सर…
वोटर लिस्ट पर बवाल
राजनीतिक सफरनामा कुशलेन्द्र श्रीवास्तव वैसे तो बिहार विधानसभा के होने वाले चुनाव में अभी समय है पर उसको लेकर बिगुल बज चुका है । विपक्ष फिलहाल भाजपा से नहीं चुनाव आयोग से लड़ रहा है और इसमें भाजपा पर भी निशाना साध रहा है । दरअसल चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण कराने का…
सोच बदलनी होगी।
गीता—अध्याय3 श्लोक5 न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठतिकर्मकृत। कार्यते ह्यवशःकर्मसर्वःप्रकृतिजैर्गुणैः।। श्लोक का दूसरा पद द्रष्टव्य है जिसमें इंगित है कि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृतिजनित गुणों द्वारा परवश हुआ कर्म करने को बाध्य किया जाता है।इसी सन्दर्भ में एक अन्य श्लोक है– नियतं कुरु कर्म त्वम कर्म ज्यायो ह्यकर्मनः। शरीर यात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः।।–श्लोक-8 –तू…
