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देवदूत

          दोपहर दो बजे का समय था ,मैं सड़क के किनारे खड़ी होकर ई- रिक्शे का इन्तज़ार कर रही थी। वैसे तो विद्यालय में सवा एक पर छुट्टी हो जाती है पर उस दिन विद्यालय में कुछ जरूरी काम होने के कारण  काफी देर से छुट्टी हुई थी। साथ की कुछ शिक्षिकाएँ भी अपने -अपने…

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चलाचली

जीवन की नाव सरक रही है  सासों की ईंधन पा धीरे-धीरे;   कभी गहरे जा खेले झिझरी    खाते हिचकोले नदिया तीरे। नपी तुली भरी हुई है ईंधन  जाने कब उखड़ जाये सांस;   उड़े प्राण पखेरु तज काया    दिखे न दूर तक कोई आश। नाप तौल कर व्यय करना  व्यर्थ का न करना…

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समर्थन

विधवा शब्द कहना कठिन  उससे भी कठिन अँधेरी रात में श्रृंगार का त्याग  श्रृंगारित रूप का विधवा में विलीन होना जीवन की गाड़ी के पहिये में  एक का न होना चेहरे पर कोरी झूठी  मुस्कान होना  घर आँगन में पेड़ झड़ता सूखे पत्ते  ये भी साथ छोड़ते  जीवन चक्र की भाति  सुना था पहाड़ भी…

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मेरे सरताज ना आएंगे

होली में सब रंग आएंगे,प्यासे तीर उमड़ आएंगे।पर ए रंगों की बारात,मेरे सरताज ना आएंगे। सपनों में रंग डाला तुमको,प्यासी पलकों के काजल से,भिगो दिया भीगी अंखियों ने,अंसुओं के खारे बादल से । इंद्रधनुष कांधों पर रखकर,रंगों के कहार आएंगे ,पर ए सतरंगी बरसात ,मेरे सरताज ना आएंगे। सखियों के अधरों से रह-रह,मधुर मिलन के…

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संघर्षशील पथिक हैं महिलाएं.

संघर्ष पथ पर संघर्षशील पथिक हैं महिलाएं…चुनौतियों को स्वीकारती त्वरित निर्णायक हैं महिलाएं।शांत सी नदी की मचलती और कभी कभार उफनती लहरें है महिलाएं…घर परिवार और द्वार की अटूट विश्वास की अनमोल धरोहर हैं महिलाएं….निस्वार्थ भाव और आत्मविश्वास से परिपूर्ण होती हैं महिलाएं… समस्त महिलाओं को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं पूनम मेहता , ऋषिकेश

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दूरियाँ_और_दायरे

जब-जब सिमटती है, एक स्त्री दायरे में। दूरियां बनाती है, वह अपनी कामयाबियों से। देह और प्रजनन के दायरों में सिमटकर , बढ़ती है दूरियां उसकी उपलब्धियों से । एक स्त्री भी जन्मी है ,अपना स्वतंत्र वजूद लेकर। फिर दायरो की सीमा में सदैव क्यों बंधी रही? विवेक व ज्ञान से जिसके वजूद का निर्माण…

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हे नारी

हे नारी!तू नारी है मत भूल सभी पर भारी है रब ने अलग बनाया तुझको फूलों सा महकाया तुझको तेरी माया तू जाने कोई समझ ना पाया तुझको तेरे कदमों पर दुनिया बलिहारी है मत भूल सभी पर भारी है कहीं पे राधा कहीं पे बाधा कहीं पे थोड़ी कहीं पे ज्यादा कहीं पे ममता…

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“करें नारी का सम्मान सभी जन”

नारी   मानवता की  पहचान , भरती है  सबके अन्दर जान । होती  सभी  गुणों  की  खान , करें  सभी   उसका   सम्मान ।। घर  की  इज्जत  होती  नारी , करती   स्वीकार   जिम्मेदारी । दिल  दया-करुणा का सागर , भरें उसमे सब अपनी  गागर ।। परीश्रम  की  होती  प्रतिमूर्ति , तन-मन मे  विद्धुत सी  फूर्ति । कुछ …

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मधुर पल

       जीवन के मधुर पल        जीवन की डोर थामते,        कटुता के पल से        ये ही तो हैं उबारते।        कांटो के ताज से        रेतीली गरम राह से        भीषण अंधेरे जंगलों में        वे ही तो इक सहारा हैं ।        जीवन के मधुर पल        जीवन की डोर थामते ।…

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राह की तालाश

आज दिवाली का त्यौहार था। चारों ओर पटाखे और  आतिशबाजी की ध्वनि गूंज रही है,तभी अचानक आग की एक चिन्गारी पास की एक झोपड़ी पर गिर गयी,और वह चिंगारी आग की लपटों मे बदल गयी, धीरे-धीरे वह पास के एक घर तक पहुंच गई,जहा परिवार के सभी सदस्य बिराजमान थे, किसी तरह पिता और बेटा…

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