कविता और कहानी
काश मैं मोबाइल होती
“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा। “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।” “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…
चर्चा का वो विषय बना ,
चर्चा का वो विषय बना , नाम जोशी मठ। शहर धर्म कर्म की भूमि वो, राज्य उत्तराखंड जिला चमोली। जन जन करता बातें उसकी, क्या हुआ है ऐसा आज दीवारे दरक रहीं, जमीन धस रहीं, बेघर हुए लोग रातों रात। क्या मुद्दा सिर्फ़ इतना है, या अन्य कोई गहन आशंका है। रेलवे हो प्रयाग प्रोजेक्ट,…
दोहा गीतिका
जीवन में हो सादगी, ऊंचे रहे विचार सफर जिन्दगी का कठिन,नही मानना हार अच्छी चीजों को चुनो,अपनाओ सद्भाव अच्छा बनने के लिए,खुद में करो सुधार झूठ,कपट,दुर्भावना, द्वेष फेंक दो दूर अवगुण सारे त्याग दो,हो अच्छा व्यवहार संस्कार के फूल से, महके सकल जहान संचित गुण का कोष हो,गुण का हो विस्तार मोह माया अन्धियार है,करे…
सुनाते रहे
खामियां, खामियां तुम गिनाते रहे। बेवजह ही हमें, तुम सुनाते रहे।। हो हमारी ख़ता, या तुम्हारी ख़ता। हर दफा ही तुम्हें, हम मनाते रहे।। माना आवाज में मेरी जादू नहीं। गीत तेरे लिए फिर भी गाते रहे।। अंधा कानून है, सुनते हम आ रहे। न्याय अंधों से हम क्यों कराते रहे। अपने महबूब को चाँद…
मकर संक्रांति
मकरराशि में सूर्यदेव करते प्रवेश बढ़ती अवधि इस दिन से दिन के । जाड़े का प्रभाव दिन दिन घटता बढती जाती सूरज की है ऊर्जा। शिथिल शरीर पाता स्फूर्ति नव कस जाते मशीन में कल पुर्जा। काँप रहा ये जाड़ा अब खुद ही बीते समय इसका गिन गिन के। लोग मनाते पर्व बड़े ही विधि…
चांदनी मुस्कराई तुम्हारे लिए,
चांदनी मुस्कराई तुम्हारे लिए, वर्णमाला गुनगुनाई तुम्हारे लिए, तुम्हारे आगमन पर सखें, मेरे हृदय की बधाई तुम्हारे लिए। चांद बन तुम जियो, नेह की नूतन छुवन बन जियो, भावना से भरे इस हृदय में, तुम हमारे नयन में सुमन बन जियो। मेरे परिचय बन तुम जियो, मेरा मुकाम बन तुम जियो, जिंदगी अपनी पूरी सफल…
वासंतिक दोहे
छे ऋतुओं का अंजनी,अपने यहां विधान। रहता है दो माह तक,वसंत ऋतु का मान।। माह चैत-बैशाख में,खुशी लाता वसंत। शोभा बढ़ता धरा की, चारो तरफ अनंत।। ऋतुओं के अनुरूप ही,बदलता खान-पान। भंवरे और तितलियां,करती हैं गुणगान।। चारो ओर सज जाते,वन-उपवन,घर-द्वार। बहती रहती हर तरफ,मस्त फगुआ बयार।। आता फूल में पराग, औ बाग में बहार। सुहाते…
सिविल सेवा कविता
हर कोई देखे सिविल का ख्वाब बड़ी शानो-शौकत बड़ा है नाम बेहद चुनौतीभरा इसका सफर बहुत कठिन है इसका एक्जाम। कैसे बने हम आईएएस पीसीएस कैसे बने हम अफसर अधिकारी हर अभ्यर्थी की यही है चिन्ता कैसे करें हम सिविल की तैयारी। माजिद हुसैन की पढ़ो भूगोल लक्ष्मीकान्त की राजव्यवस्था बिपिन चंद्रा का पढ़ो इतिहास…
तुम्हारे आगमन से
इक तुम्हारे आगमन से खिली धरा, फैला उजास सृष्टि के कण कण में दिखता नित नया ही अब हुलास….. मन ने भँवर बांध तोड़े छोड़ बैठा हर प्रवास नव स्वप्न जीवित हो उठे दृष्टिगत है अब विभास….. प्रेम अनुभूति में भी है नवीन कल्पना का वास सब धुला व सजा है ज्यों आयोजन हो ख़ास…….
लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम.
लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम बस देखते रहे गुज़रते पलों को हम l जाता हुआ साल इतिहास लिख गया क्या पाया हमने खोया सब हिसाब लिख गया कुछ हसरतें थीं दिल में जो पूरी न हो सकीं कुछ पल खुशी के साथ मेरे नाम लिख गया लेकर नई आशाएं बढ़ें सबके…
