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योग की महत्वता— योग दिवस—– प्रवीण बहल

सारे विश्व में हर व्यक्ति के जीवन में– योग का महत्व बढ़ गया है– अगर हम 50 वर्ष पीछे चले जाएं तो हमें याद होगा कि हर स्कूल में पढ़ाई शुरू होने से पहले पी टी हुआ करती थी– महत्व था शरीर को चुस्त बनाना– आज यह— अध्ययन के विषय में आ गया– जब से…

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योग

सुबह सुबह हो योग और दिनभर हो कर्मयोग तो क्या बात है ।पुरुषार्थ और परिश्रम हो जीवन का आधार तो क्या बात है ।एक क्षण भी ना हो नकारात्मकता हर पल हो सकारात्मकता तो क्या बात है ।योग से हो अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति तो क्या बात है ।योग से होता सभी मनोविकारों…

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( पितृ दिवस पर )

दर्द का मंज़र है तुम कहां हो पापा,ज़ख्मी मेरा दर है तुम कहां हो पापा । जुल्म का चश्मा रखे हैं अब अपने हीपीठ में नश्तर है तुम कहां हो पापा। छा चुकी हैं बर्बरी घटाएं शब में ,खौफ में छप्पर है तुम कहां हो पापा। झुकने से मिलती विजय गलत है बापूटूटने को घर…

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पितृदिवस पर

प्रेम के अक्षय पात्र सापवित्र रिश्ताजो कभी नहीं रीतताबाहर से सख्तअंदर से नर्मदिल में दफन कई मर्मचटकती धूप से इरादे गर्मउर में आस लिएअमावस को भी कर दे रोशन ।अपना दे निवालाबच्चों के हाथों की लकीरोंको बदल दे…जिंदगी की जद्दोजहद में भीमुस्कुराहटों की रवानियांबिखेरसमुद्र सी थाह में अथाह लिएचुभती धूप में सहलाते से…ना रूके, ना…

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संजीवनी।

धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। भीड़ है निकल आने का इरादा तो करो।। सो जाऊगा गहरी नींद पल दो पल। सपनो में आने का,दावा तो करो।। जमाना ऐसा ही है,ऐसा ही रहेगा। थोड़ा मुस्कुराने में इजाफा तो करो।। मजबूर नहीं करते,साथ चलने को। पायल…

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गर्मी के दोहे

सूरज आतिश बन गया,तपे नगर,हर गाँव। जीव सभी अकुला उठे,ढूँढ रह सब छाँव ।। सूरज का आक्रोश है,बिलख रहे तालाब । कुंओं,नदी ने भी ‘शरद’,खो दी अपनी आब ।। कर्फू सड़कों पर लगा,आतंकित हर एक । सूरज के तो आजकल,नहीं इरादे नेक ।। कूलर,पंखे हँस रहे,ए.सी.का है मान । ठंडे ने इस पल “शरद’,पाई नूतन…

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मन बुद्धि और ध्यान को योग में लगाओ,

मन बुद्धि और ध्यान को योग में लगाओ, और प्यारे प्रभु की कृपा से आनंदमई जीवन बिताओ! सारे फिकर को सौंप दो और योग में सिर्फ घ्यान दो, सब सरल हो जाएगा जीवन कमल खिल जाएगा, सकारात्मक पे सोच लो,नकारात्मक को छोड़ दो, एक बार योग का दामन तुम थाम लो,सारे फिकर त्याग दो! स्वास्थ…

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योग आत्मा के परमात्मा से जुड़ाव का संयोग

आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत पड़ाव पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जहाँ आजकल हर तरफ़ असहिष्णुता और हिंसा का शोरगुल है।जिसके परिणामस्वरूप हरि जनों की मानसिक स्थिति कंपित हो रही है। गोलियों से भूना किसी ने और किसी ने बोलियों से धुन डाला कैसे हज़म करेगी मानव जाति अतृप्त रूहों के…

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दोहों के मनके

अपना अपना ज्ञान है,सब जग रहा बखान। माने खुद को ही बड़ा,दें न किसी को मान।। देखो सजा बजार है , दुनिया में सब ओर। अपना अपना ज्ञान वे , बेच रहे पुरजोर ।।  ज्ञानी सब बनते फिरें , सच से होकर दूर।  अपना अपना ज्ञान ले, फिरते मद में चूर ।।  राम और रहमान…

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योग और अध्यात्म

आओ, योग करें  हम  और   करें     आत्म- मन्थन, योग   हमारे   लिए आज  है   कितना      उपयोगी? इसका है अभिप्राय पुरुष-प्रकृति की विवेचना और पुरुष- तत्व   का   आसन- रूप  में    विश्लेषण  है। गीता में भी कहा कृष्ण ने पुरुष-प्रकृति विश्लेषण है, अन्य वक्ता  भी  इसको   इसी अर्थ  मैं   हैं    मानते। इसके  होते   पन्द्रह  प्रकार  जो  अति महत्वपूर्ण …

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