कविता और कहानी
( पितृ दिवस पर )
दर्द का मंज़र है तुम कहां हो पापा,ज़ख्मी मेरा दर है तुम कहां हो पापा । जुल्म का चश्मा रखे हैं अब अपने हीपीठ में नश्तर है तुम कहां हो पापा। छा चुकी हैं बर्बरी घटाएं शब में ,खौफ में छप्पर है तुम कहां हो पापा। झुकने से मिलती विजय गलत है बापूटूटने को घर…
पितृदिवस पर
प्रेम के अक्षय पात्र सापवित्र रिश्ताजो कभी नहीं रीतताबाहर से सख्तअंदर से नर्मदिल में दफन कई मर्मचटकती धूप से इरादे गर्मउर में आस लिएअमावस को भी कर दे रोशन ।अपना दे निवालाबच्चों के हाथों की लकीरोंको बदल दे…जिंदगी की जद्दोजहद में भीमुस्कुराहटों की रवानियांबिखेरसमुद्र सी थाह में अथाह लिएचुभती धूप में सहलाते से…ना रूके, ना…
गर्मी के दोहे
सूरज आतिश बन गया,तपे नगर,हर गाँव। जीव सभी अकुला उठे,ढूँढ रह सब छाँव ।। सूरज का आक्रोश है,बिलख रहे तालाब । कुंओं,नदी ने भी ‘शरद’,खो दी अपनी आब ।। कर्फू सड़कों पर लगा,आतंकित हर एक । सूरज के तो आजकल,नहीं इरादे नेक ।। कूलर,पंखे हँस रहे,ए.सी.का है मान । ठंडे ने इस पल “शरद’,पाई नूतन…
मन बुद्धि और ध्यान को योग में लगाओ,
मन बुद्धि और ध्यान को योग में लगाओ, और प्यारे प्रभु की कृपा से आनंदमई जीवन बिताओ! सारे फिकर को सौंप दो और योग में सिर्फ घ्यान दो, सब सरल हो जाएगा जीवन कमल खिल जाएगा, सकारात्मक पे सोच लो,नकारात्मक को छोड़ दो, एक बार योग का दामन तुम थाम लो,सारे फिकर त्याग दो! स्वास्थ…
योग आत्मा के परमात्मा से जुड़ाव का संयोग
आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत पड़ाव पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जहाँ आजकल हर तरफ़ असहिष्णुता और हिंसा का शोरगुल है।जिसके परिणामस्वरूप हरि जनों की मानसिक स्थिति कंपित हो रही है। गोलियों से भूना किसी ने और किसी ने बोलियों से धुन डाला कैसे हज़म करेगी मानव जाति अतृप्त रूहों के…
दोहों के मनके
अपना अपना ज्ञान है,सब जग रहा बखान। माने खुद को ही बड़ा,दें न किसी को मान।। देखो सजा बजार है , दुनिया में सब ओर। अपना अपना ज्ञान वे , बेच रहे पुरजोर ।। ज्ञानी सब बनते फिरें , सच से होकर दूर। अपना अपना ज्ञान ले, फिरते मद में चूर ।। राम और रहमान…
योग और अध्यात्म
आओ, योग करें हम और करें आत्म- मन्थन, योग हमारे लिए आज है कितना उपयोगी? इसका है अभिप्राय पुरुष-प्रकृति की विवेचना और पुरुष- तत्व का आसन- रूप में विश्लेषण है। गीता में भी कहा कृष्ण ने पुरुष-प्रकृति विश्लेषण है, अन्य वक्ता भी इसको इसी अर्थ मैं हैं मानते। इसके होते पन्द्रह प्रकार जो अति महत्वपूर्ण …
सिद्ध बहुत तन की गुफा (दोहे)
साधे तो सधता सभी, योग बड़ा विज्ञान | मन की इच्छा पूर्ण हो, आ जाये संज्ञान || मन की आंखें खोल तो, देख जगह संसार | वरना सब कुछ सो रहा, जो तेरा अधिकार || सांसों में है भेद सब, सब सांसों का सार | भार समर्पित भाव यह, जीवन का आधार || योग चेतन…
आओ मिलकर करेंगे योग
आओ मिलकर करेंगे योग, मिट जाएंगे सारे रोग । सारी दुनिया जिसे करेगी , आया ऐसा शुभ संयोग ।। आओ मिलकर करेंगे योग … चुस्ती फुर्ती मुस्कान रहेगी योग करोगे जीवन में , नहीं बुढ़ापा कभी आएगा काया होगी यौवन में । निडर निर्भीक बनेगा यारों कभी न होगा वह डरपोक । आओ मिलकर करेंगे……।।…
